पंजाब दस्तक: भारतीय क्रिकेट के इतिहास में ऐसे कई धुरंधर खिलाड़ी रहे हैं जिन्होंने अपने प्रदर्शन और खेलने के तरीकों से एक नया मुकाम बनाया है। इसी सूची में बिशन सिंह बेदी का नाम भी शामिल हैं। जो सरदार ऑफ स्पिनर के रूप में मशहूर हुए। अमृतसर में 25 सितंबर 1946 को पैदा हुए बिशन सिंह बेदी ने सख्त मेहनत से अपना और देश का नाम रौशन किया। अमृतसर की गांधी ग्रांउड इस बात की गवाह है कि बेदी इस ग्राउंड में भी प्रेक्टिस करते रहे और यहां पर नए खिलाड़ियों को समय समय पर प्रेक्टिस के दौरान बढ़िया खिलाड़ी बनने के गुर भी सिखाते रहे।
टीम इंडिया के पूर्व कप्तान और बायें हाथ के दिग्गज स्पिनर बिशन सिंह बेदी सोमवार को देश के करोड़ों क्रिकेट प्रेमियों की आंखों को नम करके इस संसार को अलविदा कह गए। वह यारों के यार और स्पिनरों के सरदार के रूप में जाने जाते रहेंगे। बेदी जब भी अमृतसर आते तो गांधी ग्राउंड जरूर जाते और नए क्रिकेट खिलाड़ियों से मुलाकात कर विचार सांझा भी करते।
बेदी ने एक इंटरव्यू के दौरान खुलासा किया था कि वह अपने उंगलियों को शक्तिशाली व कलाई को फिलेक्सिीबल बनाने के लिए कपड़े धोते थे। ताकि बाजुओं और उंगलियों में लचकता बनी रहे।
स्पिन की कला में महारथ हासिल करने वाले बिशन भारत के लिए 13 सालों तक 1966 से 1979 तक का हिस्सा रहे। बेदी ने 67 टेस्ट मैचों में 266 विकेट और 10 वन-डे में सात विकेट हासिल किए। बेदी ने अपने करियर में कुल 370 प्रथम श्रेणी मैच खेले, जिसमें उन्होंने 1560 विकेट झटके। इसके साथ ही वह घरेलू क्रिकेट में सबसे ज्यादा विकेट चटकाने के मामले में सबसे आगे हैं।
बताया जाता है कि बिशन सिंह बेदी ने अपना पदार्पण टेस्ट 31 दिसंबर 1966 को वेस्टइंडीज के खिलाफ खेला था। बिशन सिंह ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उन्होंने पहली बार टेस्ट मैच तभी देखा जब उन्होंने पदार्पण किया था। उससे पहले कभी भी टेस्ट क्रिकेट उन्होंने नहीं देखा था।
1978 में पाकिस्तान के साहिवाल में बेदी के गुस्से की वजह से टीम इंडिया को मैच गंवाना पड़ा। इस मैच में भारत को 18 गेंदों में 23 रन बनाने थे और उसके आठ विकेट बचे हुए थे। तभी पाकिस्तान के तेज गेंदबाज सरफराज नवाज ने लगातार चार बाउंसर फेंकी और किसी भी गेंद को अंपायर ने वाइड नहीं दिया। यह देख कप्तान बेदी भड़क उठे और उन्होंने अपने बल्लेबाज वापस बुला लिए। बेदी के इस फैसले के बाद पाकिस्तान को विजेता घोषित कर दिया गया। इसे लेकर उन्हें काफी विवाद का सामना करना पड़ा था।
बेदी हमेशा खिलाड़ियों के हित में सबसे आगे रहते थे यही कारण है कि अपनी कप्तानी के दौरान उन्होंने कई ऐसे फैसले लिए, जिससे उन्हें सवालों का सामना करना पड़ा। बिशन का हमेशा से कहना रहा है कि पहले अच्छा इंसान बनना सीखो, क्रिकेट तो बाद में भी सीख लोगे। इसका एक उदाहरण 1976 में वेस्टइंडीज दौरे पर भी देखने को मिलता है। इस दौरे पर कप्तान बने बेदी ने खराब पिच को देखते हुए टीम की दोनों पारियां घोषित कर दी थी। दौरे के तीसरे टेस्ट में ऐसी पिच बनाई गई थी कि वेस्टइंडीज तेज गेंदबाजों की घातक गेंदों ने भारत के पांच बल्लेबाजों को चोटिल कर दिया। जिस पर कप्तान बेदी ने विरोध में टीम की दोनों पारियां घोषित कर दी थीं। इसके बाद वेस्टइंडीज मैच का विजेता घोषित हुआ।
बेदी सुनील गावस्कर से काफी प्रभावित थे। इसी लिए उन्होने अपने बड़े बेटे का नाम गावस्कर के सर नाम के साथ गावस इंद्र सिंह रखा। दुनिया के महानतम गेंदबाजों में से एक पूर्व आस्ट्रेलियाई लेग स्पिनर शेन वार्न बेदी को अपना आदर्श मानते थे। वार्न का कहना था कि उन्होंने लेग स्पिन का ककहरा बेदी से ही सीखा।
बेदी यहा खेल के अलग अलग मुद्दों पर सवाल उठाते थे वहीं समाजिक मुद्दों पर भी अपने विचार खुल कर पेश करते थे। एक बार बिशन सिंह बेदी दिल्ली से अमृतसर सड़क मार्ग से जाते समय लुधियाना में बैड ट्रैफिक सैंस का शिकार हुए। बेदी ने अपनी नाराजगी ट्विटर पर ट्वीट कर जाहिर की है। बेदी के ट्वीट के बाद कई अन्य लोगों व लुधियाना पुलिस ने इस पर जवाब भी दिया है। ट्वीट में बेदी ने स्मार्ट सिटी लुधियाना को प्लस प्वाइंट वाला शहर बताया है लेकिन ट्रैफिक सैंस इसमें शामिल नहीं। बेदी के अनुसार सारे शहरों में यही हाल है, विशेषकर राजधानी दिल्ली में। बेदी के ट्वीट पर लुधियाना पुलिस ने भी उन्हें जवाब देकर उनकी इस चिंता पर प्रशंसा की है और इसे शहर की गंभीर समस्या माना। अमृतसर के भी कई मुद्दों और क्रिकेट खेल पर भी वह अपनी प्रक्रिया देते थे, जिस के चलते वह हमेशा चर्चा में रहे।

