शिमला, सुरेंद्र राणा: वेतन आयोग के एरियर का भुगतान ब्याज सहित करने के हाई कोर्ट के आदेशों के बाद राज्य सरकार भी अलर्ट हो गई है। मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना ने अपने प्रशासनिक सचिवों के साथ इस बारे में बैठक की है और उन्हें अपने विभागों से संबंधित ऐसे मामलों को लेकर अलर्ट रहने को कहा ।
दूसरी तरफ संबंधित फैसलों में एडवोकेट जनरल से राय लेने को कहा गया है। मुख्य सचिव ने प्रशासनिक सचिवों को साफ कहा है कि राज्य सरकार में वेतन आयोग के एरियर पर ब्याज देने की परंपरा नहीं और न ही ऐसी वित्तीय हालत है। इसलिए संबंधित विभाग के माध्यम से अगला लीगल कदम क्या होगा ? इस बारे में रिपोर्ट तैयार की जाए। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में अन्य विभागों के प्रशासनिक सचिवों के अलावा वित्त विभाग में पेंशन और बजट देख रहे अधिकारी भी शामिल थे। कोर्ट से आए इन फैसलों के कारण राज्य सरकार का ध्यान एरियर के भुगतान की तरफ भी गया है।
वेतन आयोग के एरियर को लेकर पूर्व जयराम सरकार के समय सिर्फ एक किस्त दी गई हैं और इसे भी अधिकतम 50000 रुपये की सीलिंग के साथ दिया गया था। अभी राज्य सरकार को पहली जनवरी, 2016 से 2022 के बीच का एरियर कई कर्मचारी वर्गों और पेंशनरों को देना है और यह भुगतान करीब 10500 करोड़ काअलग-अलग कैटेगरी के पेंशनर हाई कोर्ट गए थे।
सचिवालय से रिटायर हुए एक अनुभाग अधिकारी के मामले में हाई कोर्ट ने छह फीसदी ब्याज के साथ एरियर चुकाने के आदेश दिए थे। इसके अलावा एचआरटीसी से भी एक ड्राइवर और एक कंडक्टर के केस में हाई कोर्ट ने खराब आर्थिक स्थिति के तर्क को नकारते हुए छह फ़ीसदी ब्याज के साथ ही बकाया चुकाने के आदेश दे रखे हैं। इन तीन कोर्ट ऑर्डर में एक आर्डर सिंगल बेंच का है, जबकि दो फैसले डिवीजन बेंच के हैं।
मुख्य सचिव ने इसलिए भी इस बारे में बैठक बुलाई थी, क्योंकि ऐसे पहले देखा गया है कि अधिकांश विभाग कोर्ट के इस तरह के फैसलों की समय पर जानकारी वित्त विभाग या सरकार को नहीं देते और फिर वित्तीय भुगतान करना पड़ता है। संपर्क करने पर मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना ने बताया कि वेतन आयोग का एरियर ब्याज के साथ देने की परंपरा नहीं है और यह कर्मचारी भी जानते हैं। उन्होंने कहा कि पहले एडवोकेट जनरल से राय ली जाएगी। उसके बाद अगले जरूरी कदम उठाए जाएंगे। एरियर का भुगतान कब करना है, यह है। इसी भुगतान को लेकर यह सरकार निर्णय लेगी।
