प्रिंट मीडिया में अब भी जवाबदेही, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया झूठ का एजेंडा चला रहा है
पंजाब दस्तक, सुरेंद्र राणा, प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) एनवी रमना ने मीडिया ट्रायल पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा, न्यायिक मामलों व सामाजिक मुद्दों पर टीवी डिबेट और सोशल मीडिया पर चलाए जाने वाले अधकचरे और एजेंडा वाले ‘ कंगारू कोर्ट ‘ लोकतंत्र के लिए नुकसानदेह हैं। सीजेआई ने कहा , प्रिंट मीडिया जवाबदेह है , लेकिन इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में जवाबदेही खत्म हो चुकी है ।
इससे कई बार अनुभवी जजों को भी सही – गलत का फैसला करने में मुश्किल आती है । मीडिया की ओर से फैलाए जा रहे पूर्वाग्रह से लोग प्रभावित होते हैं। यह लोकतंत्र को कमजोर कर रहा और व्यवस्था को नुकसान पहुंचा रहा। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर जवाबदेही की मांग बढ़ी है। मीडिया को सरकार या अदालतों को हस्तक्षेप का मौका देने की जगह खुद को संतुलित और विनियमित करना चाहिए।
जजों को कमजोर या लाचार न समझें :
सीजेआई ने खासतौर पर सोशल मीडिया में जजों के खिलाफ अभियान चलाने का जिक्र करते हुए कहा , जज त्वरित प्रतिक्रिया नहीं दे सकते , लेकिन इसे कमजोरी या लाचारी नहीं समझना चाहिए ।
गौरतलब है कि भाजपा की पूर्व नेता नूपुर शर्मा के खिलाफ फैसले और टिप्पणी के लिए सुप्रीम कोर्ट के दो जजों के खिलाफ सोशल मीडिया पर अभियान चलाया गया था।
वंही एक कार्यक्रम के दौरान जस्टिस रमना ने अपनी निजी जिंदगी के भी कई राज भी खोले । उन्होंने बताया कि वे नेता बनना चाहते थे। हालांकि किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। कहा , एक जज जिसने अपराधियों को सजा दी हो , उसके रिटायर होते ही उसकी सुरक्षा वापस ले ली जाए। जजों को बिना सुरक्षा के उसी समाज में रहना पड़ता है जिनमें से कई को वे दोषी ठहरा चुके होते हैं।
सीजेआई ने कहा , कोई ऐसी चीज जिसके लिए आपने बहुत मेहनत की हो, उसे छोड़ने का फैसला आसान नहीं होता। जज के तौर पर सेवा देने का मौका चुनौतियों के साथ मिलता है। इसलिए उन्हें कोई मलाल नहीं है।
