पंजाब दस्तक, सुरेंद्र राणा: जालंधर लोकसभा उपचुनाव में आम आदमी पार्टी की शानदार जीत के साथ मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपनी नेतृत्व क्षमता पर उठ रहे सवालों पर विराम लगा दिया है। वहीं जनता ने भी विपक्षी दलों द्वारा उठाए जा रहे कानून-व्यवस्था, वादाखिलाफी जैसे मुद्दों को सिरे से नकार दिया। इस जीत ने 14 माह पुरानी मान सरकार को यह हौसला भी दिया है कि सरकार जनहित को लेकर सही दिशा में आगे बढ़ रही है।
जून, 2022 में संगरूर लोकसभा उपचुनाव मामूली अंतर से हारने के बाद जालंधर लोकसभा उपचुनाव आप सरकार के लिए एक बड़ी परीक्षा थी। कांग्रेस का गढ़ रही इस सीट पर आप ने सफलतापूर्वक सेंध लगा ली। खास बात यह रही कि स्थानीय मुद्दों को लेकर लड़े गए इस उपचुनाव में पार्टी का नेतृत्व खुद मुख्यमंत्री मान ने संभाला और उनका सूक्ष्म प्रबंधन विरोधियों पर भारी पड़ा।
पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या के मामले को विपक्ष ने जालंधर उपचुनाव में भी जोरशोर से उठाया और मान सरकार पर मूसेवाला कांड के हत्यारों को पकड़ने में असफल रहने का आरोप लगाया। यहीं नहीं, सिद्धू मूसेवाला के पिता बलकौर सिंह भी जालंधर में आप सरकार के खिलाफ चुनाव प्रचार में उतरे और उन्होंने लोगों से आप प्रत्याशी को वोट न देने की अपील की। पंजाब में सिद्धू मूसेवाला युवा वर्ग के पसंदीदा गायक रहे हैं और उनके सुनने वालों की तादाद लाखों में है। इसके बावजूद, जालंधर में आप की जीत से साफ हो गया कि आम लोग मूसेवाला हत्याकांड में मान सरकार को दोषी नहीं मान रहे।
