विदेश: भारतीय जहाजों पर फायरिंग के बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट पर सख्त रुख बरकरार रखते हुए रविवार को एक चीनी जहाज को भी वापस लौटा दिया। ईरान की रेवोल्यूशनरी गार्ड (आईआरजीसी) नौसेना ने कहा कि जब तक अमरीका उसकी नाकेबंदी नहीं हटाता, तब तक यह अहम समुद्री रास्ता बंद रहेगा। अमरीकी नाकाबंदी के विरोध में ईरान ने दूसरे दौर की वार्ता के लिए इस्लामाबाद में अपना डेलिगेशन भेजने से भी इनकार कर दिया है। नौसेना ने चेतावनी दी है कि जो भी जहाज इस फैसले का उल्लंघन करेगा, उसे निशाना बनाया जाएगा। ईरान का कहना है कि अमरीका की नाकाबंदी सीजफायर का उल्लंघन है, जिसके जवाब में यह कदम उठाया गया है। यहां से ईरान के जहाज नहीं गुजरेंगे, तो किसी अन्य देश के जहाज को भी गुजरने नहीं दिया जाएगा। ईरान के मुताबिक ‘सन प्रोफिट’ नाम के चीनी जहाज को परमिशन नहीं मिलने के बाद रास्ता बदलना पड़ा। ईरान ने साफ किया कि वह किसी भी देश के जहाजों को ‘ब्लैंकेट अप्रूवल’ नहीं देता। हर जहाज को अलग से मंजूरी लेनी होती है। इसी बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने रविवार को कहा कि अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान के परमाणु अधिकारों को रोकने का कोई हक नहीं है। ट्रंप कहते हैं कि ईरान अपने परमाणु अधिकारों का इस्तेमाल नहीं कर सकता, लेकिन यह नहीं बताते कि किस जुर्म में। वह कौन होते हैं, किसी देश को उसके अधिकारों से वंचित करने वाले। पजशकियान का यह बयान ऐसे समय आया है, जब सीजफायर की समय सीमा खत्म होने वाली है। अमरीका-ईरान के बीच बातचीत में अब भी गतिरोध बना हुआ है। दोनों के बीच मतभेद ईरान के परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज स्ट्रेट के नियंत्रण को लेकर हैं।पजशकियन ने दोहराया कि ईरान युद्ध नहीं चाहता है। सिर्फ आत्मरक्षा में कदम उठा रहा है। उन्होंने अमरीका और इजरायल पर नागरिक ढांचे को निशाना बनाने का आरोप लगाया और इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया। इससे पहले ईरानी संसद स्पीकर मोहम्मद बाघेर ने कहा था कि अमरीका पर भरोसा नहीं किया जा सकता है। हालात कभी भी बिगड़ सकते हैं। उधर, दो भारतीय क्रूड ऑयल जहाजों पर ईरानी नौसेना की गोलीबारी में भले ही कोई हताहत नहीं हुआ है, लेकिन इस घटना से नाराज भारतीय अधिकारियों ने रविवार को तेहरान को साफ संदेश दिया कि ऐसी किसी भी हरकत के नतीजे भुगतने पड़ेंगे। नई दिल्ली ने ईरानी राजदूत को तलब किया और घटना पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। अधिकारियों ने कहा कि भारत आईआरजीसी की गोलीबारी को बहुत गंभीरता से ले रहा है और देश स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में खुली और स्वतंत्र नौवहन का समर्थन करता है। समझा जाता है कि भारत में ईरानी दूतावास और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड काप्र्स (आईआरजीसी) के बीच इस घटना को लेकर मतभेद है। सूत्रों ने बताया कि आईआरजीसी अमरीका और इजरायल के साथ संघर्ष के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले सभी जहाजों पर टोल वसूलना चाहता है, जबकि भारतीय अधिकारी ऐसी मांग मानने को तैयार नहीं हैं। दो भारतीय जहाजों (जग अर्णव और सन्मार हेराल्ड) पर ईरानी नौसेना की ओर से गोलीबारी की यह घटना तब हुई है, जब ईरानी युद्धपोत आईआरआईएस लवान अब भी कोच्चि बंदरगाह पर खड़ा है। यह भारत से शरण मांगकर आया था।दूसरे दौर की वार्ता के लिए इस्लामाबाद में तैयारियां तेजअमरीका और ईरान के बीच मंगलवार को दूसरे दौर की बातचीत की संभावना के बीच पाकिस्तान में तैयारियां आखिरी चरण में हैं। इस्लामाबाद का फाइव स्टार होटल मैरियट खाली करा लिया गया है। सुरक्षा एजेंसियां तैनात कर दी गई हैं और सबसे बड़ी बात, सरकार ने होटल के पास पूरा ट्रांसपोर्ट अगले कुछ दिनों के लिए बंद कर दिया है। सूत्रों के अनुसार दूसरे दौर की बातचीत के लिए अमरीकी डेलिगेशन सोमवार को इस्लामाबाद पहुंचेगा। मंगलवार को यह वार्ता होना संभावित है।
