दिल्ली छात्र प्रदर्शन मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला

पंजाब दस्तक: दिल्ली में प्रदर्शन हिंसा मामले पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, निर्दोष छात्रों को राहत, साक्ष्य सुरक्षित रखने का कड़ा आदेश

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​नई दिल्ली। हाल ही में आंदोलन के दौरान हुई हिंसा, तोड़फोड़ और उपद्रव के मामले में सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) ने एक बेहद अहम और सख्त दिशा-निर्देश जारी किया है। अदालत ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि 18 साल से कम उम्र के नाबालिगों और निर्दोष छात्रों का भविष्य दांव पर नहीं लगने दिया जाएगा। इसके साथ ही अदालत ने जांच प्रक्रिया और डिजिटल साक्ष्यों की सुरक्षा पर कड़े निर्देश जारी किए हैं।


​1. 18 वर्ष से कम उम्र के नाबालिगों को तुरंत रिहा करने का आदेश
​अदालत ने सख्त निर्देश दिए हैं कि आंदोलन के दौरान हिरासत में लिए गए या नामजद 18 साल से कम उम्र के ऐसे सभी बच्चे, जिनका पहले से कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उन्हें तुरंत रिहा किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यदि आवश्यक हो तो परिजनों या स्वयं बच्चे द्वारा एक साधारण बॉन्ड जमा कराने पर उन्हें छोड़ दिया जाए और उनके खिलाफ कोई पीड़क कार्रवाई न की जाए।


​2. एफआईआर की जांच रहेगी जारी, पर छात्रों पर नहीं होगी कठोर कार्रवाई
​शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि दिल्ली पुलिस व अन्य राज्यों की पुलिस दर्ज मुकदमों की जांच आगे बढ़ा सकती है, लेकिन प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ कोई भी कठोर या दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। अदालत ने छात्रों को पूर्ण सुरक्षा कवच प्रदान किया है।
​विशेष ध्यान दें: सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि यह कानूनी राहत केवल निर्दोष छात्रों के लिए है। जिन असामाजिक तत्वों का पहले से आपराधिक रिकॉर्ड रहा है, उन पर यह छूट लागू नहीं होगी और कानून अपना काम करेगा।


​3. डिजिटल व इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की कड़ी हिदायत
​मामले की निष्पक्षता और सच सामने लाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार व अन्य राज्यों को सख्त आदेश दिया है कि इस आंदोलन से जुड़े तमाम डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाए। अदालत ने निम्नलिखित रिकॉर्ड्स को संभालकर रखने का निर्देश दिया है:
​सीसीटीवी फुटेज और ड्रोन फुटेज
​पुलिसकर्मियों के बॉडी वॉन कैमरा की रिकॉर्डिंग
​घटनास्थल की पूरी वीडियोग्राफी
​वायरलेस कम्युनिकेशन रिकॉर्ड्स
​पीसीआर लॉग कलेक्शंस का पूरा रिकॉर्ड


​पंजाब दस्तक का विशेष विश्लेषण
​सर्वोच्च न्यायालय के इस अंतरिम आदेश से साफ संदेश गया है कि आंदोलनों में शामिल हुए निर्दोष छात्रों के भविष्य की सुरक्षा सबसे ऊपरी प्राथमिकता है। वहीं, सबूतों को सुरक्षित रखने का फैसला यह सुनिश्चित करेगा कि भविष्य में जांच पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष बनी रहे।
​विशेष विश्लेषण एवं ब्यूरो रिपोर्ट: सुरेंद्र राणा, प्रियंका और अखिलेश वर्मा (पंजाब दस्तक)

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