शिमला प्रॉपर्टी टैक्स पोर्टल की समस्या और नगर निगम

​सवाल नगर निगम शिमला से: क्या मेयर साहब और कमिश्नर साहब देंगे इन तीखे सवालों के जवाब?

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पंजाब दस्तक’ विशेष रिपोर्ट
​रिपोर्ट: सुरेंद्र राणा


पंजाब दस्तक, शिमला
​शिमला की जनता का सब्र अब पूरी तरह टूट चुका है। ‘व्यवस्था परिवर्तन’ के दौर में नगर निगम शिमला (Municipal Corporation) की बदहाली का आलम यह है कि शहर के लोग अपना प्रॉपर्टी टैक्स (Property Tax) और गार्बेज बिल (Garbage Bill) जमा कराने के लिए चक्कर काट रहे हैं, लेकिन नगर निगम का आईटी सिस्टम पैसा लेने को ही तैयार नहीं है।


​महीनों बीत जाने के बाद भी न तो ऑनलाइन पोर्टल ठीक हुआ है और न ही वार्डों व घरों का एरिया-वाइज टैक्स डाटा वेबसाइट पर अपलोड किया गया है। अब शिमला के नागरिक सीधे तौर पर माननीय मेयर साहब और नगर निगम कमिश्नर साहब से जवाब मांग रहे हैं।


​शिमला की जनता के सीधे सवाल:
​जिम्मेदारी किसकी और कब होगी तय?
आईटी पोर्टल महीनों से ठप पड़ा है और राजस्व (Revenue) अटका हुआ है। आखिर इस नाकामी और लापरवाही की जिम्मेदारी किसकी है? दोषियों पर कार्रवाई कब होगी?


​सुस्त आईटी विभाग की ‘क्लास’ कब लगेगी?
जब जनता पैसा देने को तैयार है, तो आईटी टीम काम क्यों नहीं कर रही? मेयर और कमिश्नर साहब तुरंत अधिकारियों व संबंधित कंपनी की आपात बैठक बुलाकर उनकी क्लास क्यों नहीं लगा रहे?


​कमेटी की गलती का हर्जाना जनता क्यों भुगते?
सिस्टम खराब होने के कारण टैक्स जमा करने में देरी हो रही है। कल को जब पेनाल्टी (Penalty) लगेगी, तो उसका जिम्मेदार कौन होगा? क्या नगर निगम अपनी गलती मानकर जनता का पेनाल्टी माफ करेगा?


​कर्मचारियों की तनख्वाह का क्या होगा?
लाखों-करोड़ों रुपए का टैक्स और गार्बेज बिल इकट्ठा नहीं हो पा रहा है। अगर नगर निगम के खजाने में पैसा ही नहीं आएगा, तो आने वाले समय में निगम के कर्मचारियों को वेतन (Salary) कहां से दिया जाएगा?


​तुरंत हस्तक्षेप की मांग
​शिमला वासियों का स्पष्ट कहना है कि यह काम किसी मंत्री या मुख्यमंत्री का नहीं, बल्कि नगर निगम के कमिश्नर और मेयर का है। जनता मांग कर रही है कि तुरंत प्रभाव से:
​पोर्टल की सभी तकनीकी खामियों को दूर किया जाए।
​एरिया-वाइज प्रॉपर्टी टैक्स का डाटा ऑनलाइन अपलोड हो।
​ऑनलाइन बिल भुगतान प्रक्रिया को तुरंत सुचारू किया जाए ताकि आम जनता को राहत मिल सके।

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