पंजाब दस्तक
सुरेंद्र राणा
शिमला (माल रोड):
हिमाचल की शांत वादियों में सोमवार शाम अचानक सियासी और जन-आक्रोश का लावा फूट पड़ा। केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ उबले किसान और मजदूरों ने शिमला के दिल कहे जाने वाले माल रोड पर ऐसा जोरदार धावा बोला कि शासन-प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। ‘जेल भरो आंदोलन’ के तहत सड़कों पर उतरे आक्रोशित जनसैलाब ने बीएनएस (BNS) की सख्त धारा 163 को पूरी तरह तार-तार करते हुए सीधे पुलिस रिपोर्टिंग रूम के मुहाने पर कब्जा जमा लिया।
चौकन्ने प्रशासनिक पहरे और भारी-भरकम पुलिस बल की मौजूदगी के बावजूद लगभग एक घंटे तक माल रोड पर सीधी घेराबंदी, जोरदार नारेबाजी और धरना जारी रहा। हैरतंगेज बात यह रही कि धारा 163 का सरेआम जनाजा निकलने के बावजूद पुलिस बल पूरी तरह मूकदर्शक बना रहा और एक भी प्रदर्शनकारी को गिरफ्तार करने की हिम्मत नहीं जुटा सका।
तीन तरफ से घेराबंदी, रिपोर्टिंग रूम बना जन-आक्रोश का अखाड़ा
हिमाचल किसान सभा और सीटू (CITU) की अगुवाई में आंदोलनकारियों ने शिमला को तीन रणनीतिक रास्तों से घेरा। जैन धर्मशाला, ऐतिहासिक रिज मैदान और इवनिंग कॉलेज से एक साथ निकले तीखे रैलियों के काफिले जब माल रोड स्थित रिपोर्टिंग रूम के पास आकर मिले, तो पूरा इलाका गूंज उठा।
देखते ही देखते माल रोड पर इंसानों का ऐसा समंदर उमड़ा कि आम आवाजाही ठप हो गई। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र की नीतियों को सीधे कटघरे में खड़ा करते हुए चार कड़े अल्टीमेटम दिए:
खेती बचाओ: किसानों के अस्तित्व और खेतों की रक्षा का संकल्प।
उद्योग बचाओ: दम तोड़ते स्थानीय उद्योगों को तुरंत उबारने की मांग।
रोजगार बचाओ: युवाओं के छिनते भविष्य और मजदूरों के अधिकारों पर दो टूक चेतावनी।
भारत बचाओ: मजदूर-किसान विरोधी फैसलों को तुरंत निरस्त करने का कड़ा पैगाम।
बैकफुट पर खाकी, बेअसर साबित हुआ प्रशासनिक इकबाल
रिपोर्टिंग रूम के ठीक सामने हुई ताबड़तोड़ जनसभा में किसान-मजदूर नेताओं ने केंद्र सरकार की बखिया उधेड़ी। यद्यपि मौके पर भारी पुलिस अमला तैनात था, लेकिन प्रदर्शनकारियों के तेवरों के आगे प्रशासनिक तंत्र पूरी तरह से बैकफुट पर नजर आया। करीब एक घंटे तक चले इस अभूतपूर्व शक्ति प्रदर्शन के बाद आंदोलनकारी अपनी बात पुरजोर ढंग से रखकर वहां से रवाना हुए।
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