पंजाब DA मामले में हाईकोर्ट की सख्ती और चीफ सेक्रेटरी की पेशी

​पंजाब सरकार की बढ़ी मुश्किलें: DA मामले में हाईकोर्ट का सबसे सख्त रुख, खाते सील करने तक की नौबत; ₹1 लाख जुर्माना और चीफ सेक्रेटरी तलब

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​हाईकोर्ट का कड़ा प्रहार — “फैसला लागू नहीं किया तो सील होंगे सरकारी खाते”

पंजाब दस्तक — एक्सक्लूसिव न्यूज़ रिपोर्ट
​विशेष ग्राउंड रिपोर्ट: सुरेंद्र सिंह राणा (ब्यूरो चीफ, पंजाब दस्तक)


स्थान: चंडीगढ़ / पंजाब
​चंडीगढ़ (पंजाब दस्तक):
पंजाब के लाखों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के महंगाई भत्ते (DA) और 6वें वेतन आयोग के एरियर के मामले में आज पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के खिलाफ अब तक का सबसे सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। अदालत की लगातार अवहेलना करने पर हाईकोर्ट ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि 3 अगस्त के फैसले पर अमल नहीं हुआ, तो पंजाब सरकार के प्रमुख सरकारी खाते (Government Heads/Accounts) तक सील (Attachment) किए जा सकते हैं।
​हालांकि, अदालत ने यह भी साफ किया कि कोई भी अंतिम आदेश जारी करने से पहले मुख्य सचिव को अपनी बात रखने का एक आखिरी मौका दिया जाएगा।


​हाईकोर्ट के आज के फैसले की 4 बड़ी बातें:
​₹1 लाख की कॉस्ट (Cost) ठोकी:
डिवीजन बेंच के स्पष्ट आदेशों को ठंडे बस्ते में डालने और बार-बार अदालती समय बर्बाद करने के लिए हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार पर ₹1 लाख का जुर्माना लगाया है।
​मुख्य सचिव 3 नवंबर को व्यक्तिगत रूप से तलब:
पंजाब के चीफ सेक्रेटरी के. पी. सिन्हा को 3 नवंबर को निजी तौर पर (Personally) हाईकोर्ट में पेश होकर यह हलफनामा देने का हुक्म दिया गया है कि 3 अगस्त का फैसला लागू क्यों नहीं हुआ और सरकार अब तक क्या कर रही थी।
​वित्तीय संकट की दलील खारिज:
सरकारी पक्ष ने अदालत में खजाने में पैसों की कमी का हवाला दिया, लेकिन हाईकोर्ट और कर्मचारियों के वकीलों ने इसे सिरे से खारिज कर दिया।


​8% DA पर घेरा, एरियर का क्या?
सरकार की तरफ से कहा गया कि 8% DA जारी कर दिया गया है। इस पर अदालत ने करारा जवाब दिया कि आदेश केंद्रीय पैटर्न और IAS/IPS अधिकारियों की तर्ज पर पूरा 18% DA देने का था। जो 8% दिया गया है, वह भी केवल सितंबर की सैलरी के साथ आया है—पिछला करोड़ों का एरियर अभी भी लटका हुआ है।


​30 अक्टूबर और 3 नवंबर: पंजाब सरकार के लिए दोहरी अग्निपरीक्षा
​कानूनी जानकारों के मुताबिक पंजाब सरकार इस समय दोतरफा संकट में घिर चुकी है:
​30 अक्टूबर: मुख्य सचिव के खिलाफ चल रही कंटेंप्ट (अदालती अवमानना) की सुनवाई एक अलग डिवीजन बेंच के सामने होगी।
​3 नवंबर: आज के आदेश के तहत मुख्य सचिव को खुद हाजिर होकर जवाब देना होगा।
​अगर पंजाब सरकार ने 3 अगस्त के फैसले को लागू करने में अब भी ढिलाई दिखाई, तो आने वाले दिनों में सरकार के प्रशासनिक प्रमुखों पर और भी कठोर कानूनी गाज गिरना तय माना जा रहा है।


​पंजाब दस्तक का स्पेशल एनालिसिस — सुरेंद्र सिंह राणा (ब्यूरो चीफ)
​”आज पंजाब विधानसभा सत्र के दौरान भी इस फैसले को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में भारी खलबली देखने को मिली। हाईकोर्ट के इस ऐतिहासिक कदम के बाद पंजाब सरकार के पास अब बहानेबाजी का कोई रास्ता नहीं बचा है। कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के हक का पैसा रिलीज करने के अलावा सरकार के पास अब कोई विकल्प नहीं दिखता।”


​आवाज़ पंजाब की — पंजाब दस्तक
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