जब रायजादा PGI में भर्ती थे तो सत्ती हाल पूछने पहुंचे थे; आज सत्ता के नशे में पूर्व विधायक उड़ा रहे अस्पताल और ऑपरेशन का मज़ाक!
विशेष रिपोर्ट – वरिष्ठ पत्रकार: काजल
ऊना / शिमला: हिमाचल प्रदेश की शांत वादियों में ऊना का सियासी पारा इन दिनों उबाल पर है। पूर्व कांग्रेस विधायक सतपाल रायजादा द्वारा भाजपा के मौजूदा विधायक सतपाल सिंह सत्ती की बीमारी और उनके ऑपरेशन को लेकर की गई अभद्र टिप्पणी ने प्रदेश की राजनीति में हड़कंप मचा दिया है। उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में बीमारी का मज़ाक उड़ाए जाने पर भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस की ‘कुसंस्कृति’ और ‘संवेदनहीन मानसिकता’ के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया है।
बीमारी पर ओछा व्यंग्य बेहद शर्मनाक — प्रो. रामकुमार का जोरदार प्रहार
भाजपा के वरिष्ठ नेता प्रो. रामकुमार शर्मा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर कांग्रेस नेताओं के इस आचरण की बखिया उधेड़ दी। प्रो. रामकुमार ने वायरल वीडियो का हवाला देते हुए कहा:
”किसी जनप्रतिनिधि की बीमारी और उसके इलाज पर इस तरह का ओछा व्यंग्य कसना न सिर्फ घटिया राजनीति है, बल्कि इंसानियत के पतन की पराकाष्ठा है। जब पूर्व कांग्रेस विधायक सतपाल रायजादा सत्ती जी के स्वास्थ्य का मज़ाक उड़ा रहे थे, उस समय प्रदेश के डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कुलदीप कुमार और कई विधायक वहां मौजूद थे। दुख की बात यह है कि किसी ने उन्हें रोकने की ज़हमत नहीं उठाई, बल्कि सभी इस अशोभनीय हरकत पर ठहाके लगाते रहे।”
महाभारत के प्रसंग से घेरा: “चीर-हरण के समय धृतराष्ट्र भी ऐसे ही खामोश थे”
पत्रकार वार्ता में प्रो. रामकुमार शर्मा ने इस समूचे वाकये की तुलना महाभारत के ऐतिहासिक प्रसंगों से करते हुए कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर तीखे बाण चलाए:
दुर्योधन के अहंकार को मौन समर्थन: उन्होंने कहा कि जब भगवान कृष्ण शांतिदूत बनकर कौरवों की सभा में गए थे और दुर्योधन उनका अपमान कर रहा था, तब सभा में मौजूद लोग या तो चुप थे या दुर्योधन का हौसला बढ़ा रहे थे।
द्रौपदी चीर-हरण जैसी चुप्पी: ठीक उसी तरह जैसे द्रौपदी के चीर-हरण के वक्त धृतराष्ट्र और अन्य कौरव मूकदर्शक बने रहे, कल ऊना में भी वही शर्मनाक दृश्य दोहराया गया।
वरिष्ठ नेताओं का गिरता स्तर: प्रो. रामकुमार ने गहरा दुख जताते हुए कहा कि कुलदीप कुमार जैसे वरिष्ठ और सभ्य माने जाने वाले नेताओं का इस घटिया बयान पर मुस्कुराना और चुप रहना बेहद निराशाजनक और गंभीर चिंता का विषय है।
संस्कारों का अंतर: जब सत्ती पहुंचे थे PGI, रायजादा ने दिया धोखा!
प्रो. रामकुमार शर्मा ने दोनों नेताओं की कार्यशैली और नैतिक मूल्यों का अंतर स्पष्ट करते हुए जनता को पुरानी घटना की याद दिलाई:
”हिमाचल की जनता को याद रखना चाहिए कि जब पूर्व विधायक सतपाल रायजादा बीमार पड़कर पीजीआई चंडीगढ़ में भर्ती हुए थे, तब सतपाल सिंह सत्ती जी शिमला में अपने सारे राजनीतिक काम छोड़कर तुरंत उनका हाल-चाल जानने अस्पताल पहुंचे थे। लेकिन आज जब सत्ती जी अस्वस्थ हुए, तो रायजादा और उनकी पार्टी ने इंसानियत को शर्मसार करते हुए उनके ऑपरेशन का मज़ाक उड़ाया। यही अंतर है भाजपा के संस्कारों और कांग्रेस की संकीर्ण मानसिकता में!”
विकास का शून्य रिपोर्ट कार्ड: “ऊना में केवल खनन और ड्रग माफिया का राज”
पत्रकार वार्ता में प्रो. रामकुमार ने पूर्व विधायक रायजादा को आईना दिखाते हुए विकास के मुद्दों पर भी कांग्रेस सरकार को पूरी तरह कटघरे में खड़ा किया:
सत्ती का समर्पण: जब भाजपा सत्ता में थी और जयराम ठाकुर मुख्यमंत्री थे, तब सत्ती जी ने विधायक न रहते हुए भी ऊना के विकास के लिए नए आयाम स्थापित किए। सत्ती जी को काम करने की ललक है और रायजादा को उनसे राजनीति का ‘र’ सीखना चाहिए।
दावों की खुली पोल: रायजादा आज खुद ढिंढोरा पीटते हैं कि मुख्यमंत्री से उनकी बहुत नजदीकियां हैं, लेकिन सत्ता में होने के बावजूद उन्होंने ऊना की जनता के लिए एक भी ढंग का काम नहीं किया।
माफिया को संरक्षण: प्रो. रामकुमार ने सीधा और संगीन आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस के इस शासनकाल में अगर ऊना में किसी चीज़ का विकास हुआ है, तो वह केवल खनन माफिया और ड्रग माफिया है।
जनता में भारी आक्रोश, अब सफाइयां देने में जुटे कांग्रेसी नेता
इस पत्रकार वार्ता और सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद ऊना सदर समेत पूरे हिमाचल की जनता में कांग्रेस नेताओं के प्रति भारी रोष है। आम जनता का मानना है कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता अपनी जगह है, लेकिन किसी की अस्वस्थता का इस तरह सार्वजनिक रूप से मज़ाक उड़ाना हिमाचल की समृद्ध राजनीतिक मर्यादाओं पर बहुत बड़ा कलंक है।
चौतरफा घिरने और जनता की लानत-मलानत झेलने के बाद अब कांग्रेसी नेता लीपापोती करने और तरह-तरह की सफाइयां पेश करने में जुट गए हैं, लेकिन जनता के दिलों में उपजा आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा।
पंजाब दस्तक की विशेष टिप्पणी एवं आपके विचार (कमेंट्स):
पंजाब दस्तक का नज़रिया: राजनीति में शब्दों का चयन और संवेदनशीलता ही किसी नेता के कद का निर्धारण करती है। बीमारी और शारीरिक कष्ट किसी के भी जीवन में आ सकते हैं, उस पर राजनीति या ठहाके लगाना लोकतंत्र और इंसानियत दोनों के लिए घातक है।
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