EVM का बहाना खत्म, बैलेट से भी मिली करारी शिकस्त; जानिए क्यों MLC चुनाव में आम जनता नहीं डालती सीधा वोट
चंडीगढ़ न्यूज़ रूम | सुरेंद्र राणा, ब्यूरो चीफ (पंजाब दस्तक)
देश के चार प्रमुख राज्यों—बिहार, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र के विधान परिषद (Member of Legislative Council – MLC) चुनाव के नतीजों ने देश की राजनीति में तहलका मचा दिया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने चारों राज्यों में अपना परचम लहराते हुए विपक्षी खेमे को पूरी तरह से पछाड़ दिया है।
सबसे करारी हार कांग्रेस पार्टी को मिली है, जिसका इन चारों राज्यों में ‘ZERO’ पर पूरी तरह सूपड़ा साफ हो गया है।
चारों राज्यों का ‘स्ट्राइक रेट’: आंकड़े दे रहे गवाही
1. बिहार (कुल सीटें: 8)
NDA: 6 सीटें
BJP: अकेले 5 सीटें
कांग्रेस: ZERO
अन्य: 2 सीटें (जन सुराज व निर्दलीय)
2. उत्तर प्रदेश (कुल सीटें: 11)
NDA: 8 सीटें
BJP: अकेले 7 सीटें
कांग्रेस: ZERO
अन्य: 3 सीटें (समाजवादी पार्टी)
3. कर्नाटक (कुल सीटें: 4)
NDA: 4 सीटें
BJP: अकेले 3 सीटें
कांग्रेस: ZERO
अन्य: ZERO
(विशेष बात यह कि जहाँ कांग्रेस की अपनी सरकार है, वहाँ भी जनता ने कांग्रेस को पूरी तरह नकार दिया।)
4. महाराष्ट्र (कुल सीटें: 5)
NDA: 3 सीटें
BJP: अकेले 2 सीटें
कांग्रेस: ZERO
अन्य: 2 सीटें
(नोट: NDA यानी नेशनल डेमोक्रेटिक एलायंस, जिसमें भारतीय जनता पार्टी मुख्य भूमिका में है।)
’EVM हैक’ का रोना रोने वाले अब क्या बहाना बनाएंगे?
हर चुनाव के नतीजों के बाद कांग्रेस और विपक्ष का सबसे पसंदीदा राग ‘EVM हैकिंग’ का होता है। लेकिन प्रबुद्ध जनता और जागरूक नागरिक अब सीधे सवाल पूछ रहे हैं कि इस बार तो चुनाव बैलेट पेपर (कागजी पर्ची) से हुआ था!
अब EVM का बहाना बनाने वाली कांग्रेस आखिर क्या नया शगूफा छोड़ेगी? बैलेट पेपर से चुनाव होने के बावजूद कर्नाटक जैसे अपने ही राज्य में कांग्रेस ZERO पर सिमट गई। लोकतंत्र में जनता का फैसला सर्वोपरि होता है। प्रबुद्ध वर्ग का मानना है कि ईवीएम हैक होने की बातें सिर्फ एक अफवाह और अपनी नाकामी छुपाने की छटपटाहट मात्र हैं।
प्रबुद्ध जनता के सीधे सवाल: आखिर कब तक प्रेस कॉन्फ्रेंस से काम चलाएगी कांग्रेस?
बड़े-बड़े शहरों में जाकर आलीशान प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले कांग्रेस के कद्दावर नेताओं से अब जागरूक जनता सीधे तीखे सवाल कर रही है:
क्या हार की बाजीगरी पर अब आत्ममंथन करेगी कांग्रेस? रोज़ाना की हड़ताल-प्रदर्शनों और बयानों से हटकर क्या कांग्रेस अपनी रणनीतियों में सुधार करेगी?
जहाँ अपनी सरकार, वहाँ भी ZERO क्यों? कर्नाटक जैसे राज्य में सत्ता में होने के बावजूद खाता भी न खुल पाना किस तरह का जनादेश है?
क्यों पिछड़ती जा रही है पार्टी? ज़मीनी धरातल पर जनता के मुद्दों को समझने के बजाय सिर्फ बयानों तक सीमित रहने का नतीजा आज सबके सामने है।
विधानसभा चुनावों की सरगर्मियों के बीच अब देश और उत्तरी भारत की निगाहें इस बात पर टिकी हैं—क्या NDA और BJP कोई नया सियासी गुल खिलाएगी, या कांग्रेस अपनी कार्यशैली सुधारकर कोई वापसी कर पाएगी?
पंजाब दस्तक EXPLAINER: Member of Legislative Council (MLC) क्या है और इसमें आम जनता वोट क्यों नहीं डालती?
MLC का मतलब क्या है?
MLC का अर्थ होता है Member of Legislative Council (विधान परिषद सदस्य)। जिस तरह केंद्र की संसद में लोकसभा और राज्यसभा होती है, ठीक वैसे ही राज्यों में विधानसभा (MLA) और विधान परिषद (MLC) होती है।
आम जनता इसमें सीधे वोट क्यों नहीं डाल सकती?
अप्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली (Indirect Election): भारतीय संविधान (अनुच्छेद 171) के तहत विधान परिषद का चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से होता है।
MLA (विधायक): 1/3 सदस्यों को राज्य के चुने हुए विधायक चुनते हैं।
स्थानीय निकाय: 1/3 सदस्यों को नगर निगम पार्षद, नगर पालिका अध्यक्ष और जिला पंचायत सदस्य चुनते हैं।
स्नातक (Graduates): 1/12 सदस्यों को वे नागरिक चुनते हैं जिनकी ग्रेजुएशन 3 साल पहले पूरी हो चुकी हो।
शिक्षक (Teachers): 1/12 सदस्यों को माध्यमिक स्कूल या कॉलेज के 3 साल से पढ़ा रहे शिक्षक चुनते हैं।
राज्यपाल का मनोनयन: बाकी 1/6 सदस्यों को कला, साहित्य, विज्ञान और समाज सेवा के क्षेत्र से राज्यपाल मनोनीत करते हैं।
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