हिमाचल पेंशनर्स जॉइंट एक्शन कमेटी का बकाया भुगतान को लेकर अल्टीमेटम

पंजाब दस्तक EXCLUSIVE INTERVIEW: 15 दिन का अल्टीमेटम! हिमाचल सरकार ने देनदारियां अदा नहीं कीं तो 18-19 नवंबर को धर्मशाला शीतकालीन सत्र का होगा घेराव

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​पेंशनर्स जॉइंट एक्शन कमेटी की तीखी हुंकार: 11 नवंबर तक हक दो, वरना कई पेंशनर्स एसोसिएशन मिलकर करेंगी जिला मुख्यालयों पर धरना और विधानसभा का घेराव


​चंडीगढ़ न्यूज़ रूम | सुरेंद्र राणा, ब्यूरो चीफ (पंजाब दस्तक)
​चंडीगढ़ / शिमला:
हिमाचल प्रदेश के लाखों सेवानिवृत्त पेंशनरों का सब्र अब जवाब दे चुका है। हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स जॉइंट एक्शन कमेटी के बैनर तले (जिसमें कई पेंशनर्स एसोसिएशन जुड़ी हुई हैं) 18 संगठनों ने प्रदेश की सुक्खू सरकार के खिलाफ आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया है।
​सरकार को 15 दिनों का अल्टीमेटम देते हुए स्पष्ट कह दिया गया है कि यदि 11 नवंबर तक पेंशनरों की तमाम देनदारियां अदा नहीं की गईं, तो 18 या 19 नवंबर को धर्मशाला में होने वाले शीतकालीन सत्र के दौरान विधानसभा का ऐतिहासिक घेराव और उग्र प्रदर्शन किया जाएगा।
​इसी गरमाए माहौल में पंजाब दस्तक के ब्यूरो चीफ सुरेंद्र राणा ने हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स जॉइंट एक्शन कमेटी (जिसमें कई पेंशनर्स एसोसिएशन जुड़ी हैं) के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश ठाकुर से टेलीफोन पर सीधी, तीखी और धारदार बातचीत की।


​सुरेंद्र राणा संग प्रदेश अध्यक्ष सुरेश ठाकुर की टेलीफोन पर सीधी बात (Q&A)
​पंजाब दस्तक (सुरेंद्र राणा): सुरेश ठाकुर जी, पंजाब दस्तक पर आपका स्वागत है। टेलीफोन के माध्यम से जुड़ने के लिए धन्यवाद। पेंशनर्स जॉइंट एक्शन कमेटी ने सरकार को 15 दिनों का अल्टीमेटम देकर 11 नवंबर की डेडलाइन तय की है। क्या वजह बनी कि आप लोगों को इतना कड़ा रुख अपनाना पड़ा?


​सुरेश ठाकुर (प्रदेश अध्यक्ष): राणा साहब, पेंशनरों के साथ लगातार छलावा हो रहा है! 18 सितंबर को बिलासपुर में हमारी राज्यस्तरीय बैठक हुई थी, जिसमें हमने 17 सूत्री मांग पत्र पर सरकार से वार्ता का समय मांगा था। हमने कहा था कि यदि हमें बातचीत के लिए नहीं बुलाया गया तो हम सांकेतिक प्रदर्शन करेंगे, लेकिन सरकार के कान पर जूं तक नहीं रेंगी। हमारे साथ कई पेंशनर्स एसोसिएशन जुड़ी हुई हैं और महासचिव इंद्रपाल शर्मा व अतिरिक्त महासचिव भूपराम वर्मा सहित हमारे 18 संगठनों की जॉइंट एक्शन कमेटी के बैनर तले अब सड़कों पर उतरने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है।


​पंजाब दस्तक (सुरेंद्र राणा): 11 नवंबर तक अगर सरकार मांगें पूरी नहीं करती, तो संघर्ष की रूपरेखा क्या होगी?
​सुरेश ठाकुर (प्रदेश अध्यक्ष): बहुत साफ संदेश है! 11 नवंबर तक अगर हमारी तमाम देनदारियां चुकता नहीं होती हैं, तो प्रदेशभर के पेंशनर पहले जिला मुख्यालयों पर प्रचंड धरना-प्रदर्शन करेंगे। इसके बाद 18 या 19 नवंबर को धर्मशाला में आयोजित होने वाले शीतकालीन सत्र के दौरान विधानसभा का घेराव और विशाल प्रदर्शन किया जाएगा।


​पंजाब दस्तक (सुरेंद्र राणा): आपकी मुख्य वित्तीय मांगें क्या-क्या हैं, जिन्हें सरकार दबाकर बैठी है?
​सुरेश ठाकुर (प्रदेश अध्यक्ष): 1 जनवरी 2016 से 31 जनवरी 2022 के बीच सेवानिवृत्त हुए पेंशनरों का संशोधित लीव इनकैशमेंट, ग्रेच्युटी, कम्यूटेशन, 196 माह का पे-एरियर और पेंशन एरियर्स अटका हुआ है। इसके अलावा 10 प्रतिशत डीए/डीआर (Dearness Relief) की तुरंत अदायगी की जाए और लंबित मेडिकल बिलों के भुगतान के लिए तुरंत धनराशि उपलब्ध कराई जाए।


​पंजाब दस्तक (सुरेंद्र राणा): आप लोग सरकार पर दोहरा रवैया और पक्षपात का आरोप भी लगा रहे हैं, इसकी क्या सच्चाई है?
​सुरेश ठाकुर (प्रदेश अध्यक्ष): यह तो सरासर अन्याय है, राणा साहब! 1 मार्च 2022 के बाद सेवानिवृत्त हो रहे कर्मचारियों की सारी देनदारियां तो सरकार तुरंत अदा कर रही है, लेकिन 1 जनवरी 2016 से 31 जनवरी 2022 के बीच रिटायर्ड हुए पेंशनरों की फाइलों को जानबूझकर लटकाया जा रहा है। 13 मई को सचिवालय में खुद माननीय मुख्यमंत्री जी ने कहा था कि 31 जुलाई तक 40% लीव इनकैशमेंट और ग्रेच्युटी की राशि जारी कर दी जाएगी। आज तक एक ढेला नहीं मिला! कई पेंशनर तो अपने हक का इंतजार करते-करते इस दुनिया से चले गए। पेंशनरों में भारी रोष और आक्रोश है।


​पंजाब दस्तक (सुरेंद्र राणा): 14 सितंबर को जारी संशोधित कम्यूटेशन की अधिसूचना को लेकर भी भारी विरोध है, उस पर आपका क्या कहना है?
​सुरेश ठाकुर (प्रदेश अध्यक्ष): हमारी जॉइंट एक्शन कमेटी ने 14 सितंबर की उस जनविरोधी कम्यूटेशन अधिसूचना का कड़ा विरोध किया है। हमारी मांग है कि इस अधिसूचना को तुरंत वापस लेकर पुरानी व्यवस्था को पुनः बहाल किया जाए।


​पंजाब दस्तक का तीखा सवाल व आपकी राय:
​वर्षों तक राज्य की दिन-रात सेवा करने वाले बुजुर्ग पेंशनरों को आखिर अपने ही हक के पैसे के लिए इस उम्र में सड़कों पर क्यों घसीटा जा रहा है? कई बुजुर्ग पेंशनर तो अपना एरियर और ग्रेच्युटी देखे बिना ही दुनिया छोड़ गए, उस समय पर न मिलने वाले पैसे का क्या फायदा?
​एक तरफ तो फिजूलखर्चियों पर कोई लगाम नहीं है, और दूसरी तरफ जीवनभर की कमाई मांगने वाले पेंशनरों को खाली हाथ रखा जा रहा है। क्या सरकार को फिजूलखर्चियों पर रोक लगाकर इन बुजुर्गों का हक तुरंत नहीं देना चाहिए?
​इस पूरे मुद्दे पर आपकी क्या राय है? क्या पेंशनरों को उनका हक और बकाया एरियर तुरंत मिलना चाहिए या नहीं? कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर दें!


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