सुरेंद्र राणा, ब्यूरो चीफ, पंजाब दस्तक
शिमला (विधानसभा परिसर): हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान कुल्लू क्षेत्रीय अस्पताल में प्रसूता रजनी शर्मा (उर्फ मंजू शर्मा) की उपचार के दौरान हुई दर्दनाक मृत्यु का मामला सदन में पूरी आक्रामकता के साथ गूंजा। प्रश्नकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष और विपक्षी सदस्यों ने स्वास्थ्य व्यवस्था की लचर कार्यप्रणाली, जांच रिपोर्टों के विरोधाभास और परिजनों व सामाजिक कार्यकर्ताओं पर दर्ज मुकदमों को लेकर सरकार को चौतरफा घेरा। आधे घंटे से अधिक चली तीखी बहस में स्वास्थ्य मंत्री और मुख्यमंत्री ने हस्तक्षेप कर स्थिति स्पष्ट की और निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया।
नेता प्रतिपक्ष के कड़े सवाल: जांच में देरी और सोशल मीडिया पर दोहरे मापदंड पर घेरा
विपक्ष ने सदन में अस्पताल प्रशासन और सरकार की जवाबदेही पर सीधे प्रहार किए:
जांच रिपोर्टों में टकराव: विपक्ष ने आरोप लगाया कि अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट (MS) और एसडीएम की जांच रिपोर्टों के तथ्यों में भारी विरोधाभास है। डॉक्टरों के आने-जाने के समय और तारीखों का रिकॉर्ड तक मेल नहीं खा रहा। सरकार अब तक ठोस कार्रवाई करने के बजाय मामले को ‘विचाराधीन’ बता रही है।
समय पर रेफर क्यों नहीं किया: सुबह 9:15 बजे प्रसूता की हालत बिगड़ने के बावजूद दोपहर 1:30 बजे मौत होने तक उसे उच्च स्वास्थ्य संस्थान रेफर क्यों नहीं किया गया?
सोशल मीडिया पर दोहरा रवैया: विपक्ष ने सवाल उठाया कि न्याय की मांग करने वाले आम लोगों के सोशल मीडिया अकाउंट्स तुरंत बंद कर दिए गए, जबकि विपक्षी नेताओं के खिलाफ लगातार अभद्र प्रचार करने वाले चार-चार पेजों पर एफआईआर दर्ज होने के बावजूद वे अब भी बेधड़क चल रहे हैं। सरकार स्पष्ट करे कि अगर लिखित उत्तर में लापरवाही मानी गई है, तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
स्वास्थ्य मंत्री का जवाब: ’30 जून को ही डॉक्टर को किया सस्पेंड’
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. कर्नल धनीराम शांडिल ने घटना पर गहरा शोक जताते हुए कहा:
पीड़ित परिवार के प्रति सरकार की पूरी संवेदना है।
मामले की गंभीरता और डॉक्टर के व्यवहार व प्राथमिक लापरवाही के पहलुओं को देखते हुए संबंधित डॉक्टर को 30 जून को ही निलंबित कर दिया गया था।
पहले मेडिकल और फिर संयुक्त प्रशासनिक जांच होने के कारण प्रक्रिया में समय लगा है। वर्तमान में पूरी रिपोर्ट की गहन जांच (क्लोज स्क्रूटनी) की जा रही है और शीघ्र ही अंतिम रिपोर्ट सदन में रखी जाएगी।
मुख्यमंत्री का दो-टूक जवाब: ‘न दोषी को संरक्षण, न निर्दोष पर आंच’
मुख्यमंत्री ने सदन को आश्वस्त करते हुए पूरे मामले का विस्तृत ब्योरा रखा:
संवेदनशीलता और निष्पक्षता: एक 23 वर्षीय बेटी की जान जाना और नवजात बच्ची के सिर से मां का साया उठना अत्यंत पीड़ादायक है। इसे राजनीतिक लाभ-हानि के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। यदि विपक्ष के पास कोई मेडिकल रिकॉर्ड या विश्वसनीय साक्ष्य हैं, तो वे जांच एजेंसी को सौंपें, सरकार हर तथ्य की जांच कराएगी।
अस्पताल में प्रदर्शन और एफआईआर की वजह: 29 जून को सोशल मीडिया अपीलों के बाद 2000 से 2500 लोगों की भीड़ अस्पताल परिसर के संवेदनशील वॉर्डों में घुस गई थी। उस समय अस्पताल में 218 मरीज भर्ती थे और 11 मरीज आपातकालीन वार्ड में उपचाराधीन थे। मरीजों की सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए 1 जुलाई को थाना कुल्लू में एफआईआर नंबर 101/2026 दर्ज की गई थी।
एसआईटी जांच और धारा हटाना: निष्पक्षता के लिए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) की अध्यक्षता में विशेष जांच दल (SIT) गठित किया गया है। जांच और डॉक्टरों के बयानों के आधार पर एफआईआर से धारा 132 BNS हटा दी गई है। किसी भी निर्दोष को केवल विरोध करने के कारण नहीं फंसाया जाएगा और बिना विशेषज्ञ मेडिकल राय के किसी डॉक्टर को भी अपराधी घोषित नहीं किया जाएगा।
विस्तृत चर्चा के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने व्यवस्था देते हुए प्रश्नकाल की अगली विधायी कार्यवाही आरंभ करवाई।
