कुलदीप सिंह पठानिया 12वें BRICS संसदीय मंच में विधायी नियमों पर विचार रखते हुए

12वें ब्रिक्स संसदीय मंच में कुलदीप सिंह पठानिया की दो टूक: “सशक्त लोकतंत्र के लिए विधायी नियमों में एकरूपता जरूरी”

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​सुरेंद्र राणा ब्यूरो चीफ पंजाब दस्तक
​नई दिल्ली।

राजधानी दिल्ली के होटल ताज पैलेस (मुमताज बैंक्वेट हॉल) में आयोजित पीठासीन अधिकारियों की समिति की एक बेहद अहम और उच्चस्तरीय बैठक में हिमाचल प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने बड़ा बयान दिया है। 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच में भाग लेने नई दिल्ली पहुंचे कुलदीप सिंह पठानिया ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती सीधे तौर पर उसकी विधाई संस्थाओं की प्रभावशीलता और कार्यकुशलता पर निर्भर करती है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि कार्य संचालन के नियम महज तकनीकी प्रावधान नहीं हैं, बल्कि यह लोकतंत्र की जवाबदेही, पारदर्शिता और जन-प्रतिनिधित्व का असली आधार हैं।


​ओम बिरला के विजन की सराहना: “स्वर्णिम कार्यकाल”
​अपने संबोधन के दौरान विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि देश के सभी विधानमंडलों के प्रति ओम बिरला की गहरी प्रतिबद्धता और कार्य संचालन नियमों में एकरूपता लाने के उनके भरसक प्रयास बेहद प्रशंसनीय हैं। पठानिया ने खुले दिल से कहा कि ओम बिरला का पिछला और वर्तमान कार्यकाल भारतीय लोकतांत्रिक प्रणाली तथा विधानमंडलों के इतिहास में ‘स्वर्णिम कार्यकाल’ के रूप में दर्ज किया जाएगा।


​एक समान मॉडल नियमावली पर मंथन: समिति की अहम बैठक
​गौरलतब है कि लोकसभा द्वारा पिछले वर्ष देश भर के विधानमंडलों की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन नियमों के लिए एक समान ‘मॉडल’ तैयार करने के वास्ते इस विशेष पीठासीन अधिकारियों की समिति का गठन किया गया था। उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष सतीश महाना की अध्यक्षता वाली इस अहम समिति में हिमाचल प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया, दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता, नागालैंड विधानसभा अध्यक्ष सेरी सेरिंगेन लांगकुमेर, महाराष्ट्र विधानसभा उपाध्यक्ष राहुल नार्वेकर और कर्नाटक विधानसभा के प्रतिनिधि सदस्य के रूप में शामिल हैं।
​बैठक की शुरुआत दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता के शानदार स्वागत भाषण के साथ हुई, जिन्होंने सभी गणमान्य पीठासीन अधिकारियों को उपहार भेंटकर सम्मानित किया। इसके बाद समिति के सभापति सतीश महाना ने बैठक का एजेंडा पेश किया और शुरुआती टिप्पणियां रखीं।


​कुलदीप सिंह पठानिया के अनुभव को सराहा गया
​बैठक के दौरान समिति के सभापति सतीश महाना ने हिमाचल विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया की कार्यकुशलता और उनके अमूल्य योगदान की भूरि-भूरि प्रशंसा की। महाना ने कहा कि पठानिया का लंबा राजनीतिक अनुभव और मार्गदर्शन इस समिति के मसौदे को तैयार करने में मील का पत्थर साबित हुआ है, जिसके दम पर आज समिति एक ठोस निष्कर्ष तक पहुँच पाई है। बैठक में सभी सदस्यों ने अपनी-अपनी रिपोर्ट और सुझाव प्रस्तुत किए, जिन पर अंतिम विचार-विमर्श के बाद रिपोर्ट को लोकसभा को प्रेषित करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया।


​हिमाचल की कार्यशैली का जिक्र: “पक्ष-विपक्ष से ऊपर उठकर दिया जाता है बोलने का पूरा समय”
​इस मंच से हिमाचल प्रदेश विधानसभा की कार्यप्रणाली का जिक्र करते हुए कुलदीप सिंह पठानिया ने अपनी पीठ की कार्यशैली का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि हिमाचल सदन में बजट और अन्य तमाम जनहित के मुद्दों पर पूरी गंभीरता और विस्तार से चर्चा की जाती है। उन्होंने दो टूक कहा, “मुझे इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि सदस्य किस राजनीतिक दल का है, मैं सदन में हर विधायक को अपनी बात रखने और बार-बार बोलने का पूरा मौका देता हूँ, जिससे लोकतांत्रिक बहस और अधिक मजबूत होती है।”


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