रिपोर्ट: प्रियंका, पंजाब दस्तक
शिमला: हिमाचल प्रदेश के पशुपालन महकमे से जुड़ी एक बेहद गंभीर खबर सामने आ रही है। प्रदेश में तैनात 58 वेटनरी फार्मासिस्टों को पिछले 2 महीनों से फूटी कौड़ी तक नसीब नहीं हुई है। दीपावली का त्यौहार सर पर आ चुका है, लेकिन इन कर्मचारियों के घरों में खुशियों के बजाय आर्थिक तंगी का सन्नाटा पसरा हुआ है। दो-दो महीने से पगार न मिलने के कारण कर्मचारी भारी आर्थिक और मानसिक परेशानी झेलने को मजबूर हैं।
वित्त विभाग की चिट्ठी बनी जी का जंजाल
पूरे मामले का खुलासा करते हुए पशुपालन विभाग कर्मचारी महासंघ के सूबा अध्यक्ष संजीव भारद्वाज ने बताया कि इन 58 वेटनरी फार्मासिस्टों को साल 2022 में विशेष छूट देकर पक्का किया गया था। जिन जिलों में पद खाली नहीं थे, वहां के कर्मचारियों को दूसरे जिलों के जरिए तनख्वाह दी जा रही थी।
लेकिन अब वित्त विभाग की 17 जुलाई 2026 की एक नोटिफिकेशन का बहाना बनाकर इन कर्मचारियों का वेतन पूरी तरह से ठप कर दिया गया है। महासंघ का कहना है कि नियमों का ऐसा अड़ंगा लगाकर कर्मचारियों का हक रोकना सरासर अन्याय है।
पंजाब दस्तक के 3 तीखे सवाल:
त्यौहार पर तंगी क्यों? दिवाली के महीने में जहां हर कोई त्यौहार की तैयारियों में जुटा है, वहीं 58 परिवारों को अपने ही हक के पैसों के लिए तरसाया जा रहा है।
अफसरशाही की लापरवाही की सजा कर्मचारियों को क्यों? विभागों की कागजी खींचतान और टेक्निकल पचड़ों की मार जमीनी स्तर पर काम करने वाले वर्करों पर क्यों पड़े?
कब खत्म होगा कर्मचारियों का इंतजार? महासंघ ने सूबे के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और पशुपालन मंत्री चंद्र कुमार से तुरंत इस मामले में दखल देकर अटका हुआ वेतन जारी करने की मांग की है।
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