सुरेंद्र राणा, पंजाब दस्तक
सोशल मीडिया और यादों के गलियारों से ना जाने कहां से अतीत के पन्नों की एक ऐसी अद्भुत, अलौकिक और ऐतिहासिक तस्वीर सामने आई है, जिसे देखकर इतिहास खुद-ब-खुद जीवंत हो उठता है। यह तस्वीर हिमाचल प्रदेश के उन तीन महान कप्तानों, उन तीन नेक और पवित्र आत्माओं की है जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी देवभूमि के भाग्य और भविष्य को संवारने में झोंक दी। कांग्रेस के ये तीनों ही पूर्व मुख्यमंत्री अपनी युवावस्था के पूरे ओज, आत्मविश्वास और बेमिसाल तालमेल के साथ एक साथ नजर आ रहे हैं।
इस अत्यंत पुरानी और अनमोल ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीर का फ्रेम इतना जादुई है कि बैकग्राउंड में हिमाचल के वही ऊंचे, विशाल और दुर्गम पहाड़ नजर आ रहे हैं, जिन्हें चीरकर इन महानायकों ने विकास का रास्ता निकाला था। अगर हम सामने से देखें, तो ठीक बीच (केंद्र) में हिमाचल के निर्माता डॉ. यशवंत सिंह परमार अपनी गहरी प्रशासनिक सूझबूझ और दृढ़ता समेटे खड़े हैं। परमार जी के बाईं ओर ठाकुर रामलाल जी बिल्कुल फ्रंट में अपनी मजबूत और जनता के प्रति समर्पित स्थिति संभाले हुए हैं, और परमार जी के दाईं ओर आधुनिक हिमाचल के शिल्पकार राजा वीरभद्र सिंह जी अपनी चिरपरिचित राजसी गरिमा, शालीनता और एक दूरदर्शी विजन के साथ सजे हैं।
आज ये तीनों ही महान विभूतियां भौतिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं और स्वर्ग सुधार चुकी हैं, लेकिन इन तीनों नेक आत्माओं के जीवन पर यह संस्कृत श्लोक और इसका भावार्थ बिल्कुल सटीक बैठता है:
संस्कृत श्लोक:
परोपकाराय फलन्ति वृक्षाः परोपकाराय वहन्ति नद्यः।
परोपकाराय duhanti गावः परोपकारार्थमिदं शरीरम्।।
भावार्थ:
जिस तरह वृक्ष दूसरों को फल देने के लिए धूप सहते हैं, नदियां दूसरों की प्यास बुझाने के लिए बहती हैं और गाएं दूसरों के पोषण के लिए दूध देती हैं; ठीक उसी तरह इन महापुरुषों का जीवन और शरीर केवल परोपकार तथा हिमाचल की जनता की सेवा के लिए समर्पित था।
1. डॉ. यशवंत सिंह परमार: जिन्होंने हिमाचल को वजूद और स्वाभिमान दिया
तस्वीर के केंद्र में पूरी दृढ़ता के साथ खड़े डॉ. वाई.एस. परमार वो महान आत्मा हैं, जिन्होंने तमाम राजनीतिक विरोधों और पंजाब में हिमाचल के विलय की बड़ी-बड़ी साजिशों को अकेले दम पर नाकाम किया। उन्होंने इस पहाड़ी राज्य को देश के नक्शे पर एक स्वतंत्र पहचान दिलाई।
कुर्बानी और संघर्ष: आज जो हिमाचल देश का सबसे समृद्ध पहाड़ी राज्य है, उसकी नींव परमार जी ने ही रखी थी। सड़कों का जाल बिछाना हो या हिमाचल को बागवानी राज्य बनाना, उन्होंने इन्हीं दुर्गम पहाड़ों की खाक छानी, नंगे पैर चले और सूबे को अपने पैरों पर खड़ा किया।
2. ठाकुर रामलाल: जमीनी हकीकत से जुड़ा और जनता के हक में खड़ा मजबूत नेतृत्व
फ्रेम में बाईं ओर अपनी बेबाक और असरदार उपस्थिति दर्ज करा रहे ठाकुर रामलाल जी का अंदाज यह साफ बयां करता है कि वे हमेशा जनता के हक और हकूक की रक्षा के लिए चौबीसों घंटे मुस्तैदी से तैयार रहते थे।
सहजता और विकास: एक साधारण परिवार से उठकर सूबे के सर्वोच्च पद तक पहुंचने वाले ठाकुर रामलाल जी का दिल हमेशा गरीब, किसान, मजदूर और कर्मचारी के लिए धड़कता था। हिमाचल के प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने और बिजली-रोजगार को घर-घर पहुंचाने में उनका योगदान स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज है।
3. राजा वीरभद्र सिंह: आधुनिक हिमाचल के अमर शिल्पकार और सर्वमान्य नेता
परमार जी के दाईं ओर युवावस्था की इस तस्वीर में गौरवशाली मुद्रा में खड़े राजा वीरभद्र सिंह की चमकती हुई आंखें और अद्भुत ऊर्जा देखते ही बनती है। छह बार मुख्यमंत्री रहे वीरभद्र जी ने हिमाचल को पिछड़ेपन और लाचारी के अंधकार से निकालकर देश के सबसे अग्रणी राज्यों की कतार में सबसे आगे ला खड़ा किया।
अथाह मेहरबानियां: सुदूर किन्नौर, लाहौल-स्पीति और पांगी-भरमौर की दुर्गम चोटियों से लेकर कांगड़ा, हमीरपुर, ऊना, सोलन और बिलासपुर के मैदानों तक—हर घर में स्कूल, हर क्षेत्र में कॉलेज, अस्पताल और पक्की सड़कों की रोशनी पहुंचाने का श्रेय ‘राजा साहब’ के अथक परिश्रम को जाता है। उन्होंने क्षेत्रवाद की राजनीति को कुचलकर सिर्फ और सिर्फ ‘हिमाचली’ पहचान को सर्वोपरि रखा।
पंजाब दस्तक की विशेष राय (संपादकीय विचार)
चंबा के चुराह से लेकर किन्नौर की सरहदों तक और सिरमौर की पहाड़ियों से लेकर ऊना के मैदानों तक, आज हिमाचल का जो भी नागरिक इस खुशहाल, शांत और प्रगतिशील प्रदेश में गर्व से सांस ले रहा है, उसे यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि हमारी इस खुशहाली के पीछे इन तीन नेक आत्माओं का कितना बड़ा त्याग, तपस्या और समर्पण है।
पहाड़ों की पृष्ठभूमि में एक साथ खड़े कांग्रेस के इन तीनों महान मुख्यमंत्रियों की यह पुरानी तस्वीर सिर्फ एक फोटो नहीं, बल्कि हिमाचल के स्वाभिमान का सबसे बड़ा और जीवंत इतिहास है। राजनीति में चेहरे बदलते रहते हैं, लेकिन देवभूमि को बुलंदियों पर ले जाने का जो संकल्प इन महानायकों के भीतर था, वो आज के दौर में मिलना नामुमकिन है। इन तीनों मुख्यमंत्रियों ने अपनी पूरी जिंदगी देवभूमि की सेवा में खपा दी, हिमाचल हमेशा-हमेशा इनका कर्जदार रहेगा। ऐसी महान दिव्य आत्माओं के चरणों में ‘पंजाब दस्तक’ के तमाम दर्शक और पाठक कोटि-कोटि नमन करते हैं।
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