पंजाब दस्तक ब्यूरो
सुरेंद्र राणा, शिमला:
हिमाचल प्रदेश में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करने, मानहानि (Defamatory) और हेट स्पीच फैलाने वाले अनरेगुलेटेड सोशल मीडिया चैनलों और फेसबुक पेजों पर अब सरकार कड़ा कानूनी शिकंजा कसने जा रही है। इस तरह के भ्रामक प्रचार पर रोक लगाने के लिए प्रदेश सरकार एक नई और सख्त रेगुलेटरी नीति (पॉलिसी) तैयार कर रही है।
इस संबंध में गठित की गई कैबिनेट सब-कमेटी की एक उच्च स्तरीय बैठक मंगलवार को शिमला में आयोजित की गई, जिसमें निराधार आरोपों और सनसनीखेज कंटेंट पर प्रभावी निगरानी रखने के लिए कड़ा रोडमैप तैयार किया गया।
डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री की अध्यक्षता में हुई समीक्षा
इस विशेष कैबिनेट सब-कमेटी का गठन मुख्य रूप से सोशल मीडिया के दुरुपयोग को रोकने के लिए किया गया है। मंगलवार को इस बैठक की अध्यक्षता उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने की। बैठक में कमेटी के सदस्य उद्योग मंत्री हर्षवर्धन सिंह चौहान और लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
नीति को कानूनी रूप से मजबूत बनाने के लिए इस बैठक में प्रदेश के डीजीपी अशोक तिवारी, विधि विभाग (Law Department) के वरिष्ठ अधिकारी और अन्य आला अफसर शामिल हुए। इस दौरान इस तरह के भ्रामक प्रचार से निपटने के लिए वर्तमान में मौजूद कानूनों की गहन समीक्षा की गई।
सनसनीखेज कंटेंट और AI के दुरुपयोग पर रहेगी पैनी नजर
बैठक में इस बात पर गहरी चिंता जताई गई कि कई अनरेगुलेटेड डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और फेसबुक पेज केवल अपनी रीच और व्यूअरशिप बढ़ाने के उद्देश्य से बिना किसी पुख्ता आधार के सनसनीखेज खबरें और वीडियो प्रसारित कर देते हैं। इसमें कई मामलों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी आधुनिक तकनीक का भी गलत सहारा लिया जा रहा है। ऐसी खबरों से समाज में बेवजह भ्रम और तनाव की स्थिति पैदा होती है, जिसे रोकने के लिए अब सरकार सख्त कदम उठा रही है।
सूचना एवं जनसंपर्क विभाग को बनाया गया नोडल एजेंसी
सरकार ने इस पूरी व्यवस्था और डिजिटल कंटेंट की मॉनिटरिंग के लिए सूचना एवं जनसंपर्क विभाग (Information & Public Relations/Publication Department) को नोडल विभाग नियुक्त किया है। यह विभाग अनरेगुलेटेड चैनलों और फेसबुक पेजों द्वारा लगाए जाने वाले निराधार आरोपों और भ्रामक पोस्टों पर निरंतर स्क्रूटनी (निगरानी) रखेगा।
सब-कमेटी की अगली बैठक में ड्राफ्ट होगा फाइनल, फिर जाएगा कैबिनेट
कैबिनेट सब-कमेटी ने इस बैठक में अपनी रणनीति पूरी तरह साफ कर ली है। तय प्रक्रिया के तहत, अब सब-कमेटी की एक और आगामी बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें इस नई नीति के कानूनी ड्राफ्ट (मसौदा) को अंतिम रूप दिया जाएगा। सब-कमेटी से ड्राफ्ट फाइनल होने के बाद इसे अंतिम मंजूरी के लिए सीधे राज्य कैबिनेट (मंत्रिमंडल) की बैठक में भेजा जाएगा। इस नीति के लागू होने के बाद भ्रामक और गैर-जिम्मेदाराना कंटेंट परोसने वाले चैनलों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
