मंडी में मंच पर बैठे थे कौल सिंह और रंगीला राम राव, तभी प्रभारी ने नए चेहरों और बार-बार हारने वालों के टिकट काटने के दिए सीधे संकेत
मंडी से वरिष्ठ पत्रकार अंजना ठाकुर, पंजाब दस्तक:
हिमाचल प्रदेश कांग्रेस में आने वाले चुनावों को लेकर टिकटों की जंग अब चरम पर पहुँच गई है। कांग्रेस की प्रदेश मामलों की प्रभारी रजनी पाटिल (Rajani Patil) के हालिया बयानों ने पार्टी के दिग्गज नेताओं और पूर्व मंत्रियों के खेमे में हड़कंप मचा दिया है। रजनी पाटिल ने साफ़ संकेत दिए हैं कि बार-बार चुनाव हार रहे नेताओं को बार-बार मौका नहीं मिलेगा और आगामी विधानसभा चुनावों में संघर्षशील युवा कार्यकर्ताओं व नए चेहरों को प्राथमिकता दी जाएगी।
सबसे बड़ी राजनीतिक खलबली तब मची जब मंडी में एक कार्यक्रम के दौरान मंच पर पूर्व मंत्री ठाकुर कौल सिंह और रंगीला राम राव जैसे कद्दावर नेता मौजूद थे। इसी मंच से जब रजनी पाटिल ने संगठन में नए चेहरों और लगातार हार का सामना कर रहे नेताओं के विकल्प की बात कही, तो सियासी गलियारों में सुगबुगाहट तेज हो गई।
’मैं नहीं तो मेरा बेटा सही’ की राजनीति पर लटकी तलवार
प्रदेश के कई दिग्गज नेता लंबे समय से “मैं नहीं तो मेरा बेटा सही या मेरा पोता सही” की परिपाटी पर अपनी पारिवारिक विरासत को आगे बढ़ाने का ताना-बाना बुन रहे थे। पाटिल की इस घोषणा के बाद प्रकाश चौधरी, ठाकुर कौल सिंह, गंगूराम मुसाफिर, ठाकुर रामलाल और ठाकुर सिंह भरमौरी सहित 5 पूर्व मंत्रियों के चुनावी समीकरण पूरी तरह बिगड़ते नजर आ रहे हैं।
विधानसभा क्षेत्रों में बदला सियासी गणित:
भरमौर विधानसभा क्षेत्र:
ठाकुर सिंह भरमौरी के परिवारवाद के विकल्प के तौर पर अब वर्षों से जमीनी स्तर पर पसीना बहा रहे युवा नेता ललित ठाकुर और सुजीत भरमौरी जैसे कई नए नाम मजबूती से आगे आ गए हैं।
द्रंग विधानसभा क्षेत्र:
ठाकुर कौल सिंह के मजबूत गढ़ में अब युवा नेतृत्व की मांग उठने लगी है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि जो चेहरे लगातार चुनाव हार रहे हैं, उन्हें बार-बार आगे लाने के बजाय नए कार्यकर्ताओं को मौका मिलना चाहिए।
पच्छाद विधानसभा क्षेत्र:
पूर्व मंत्री गंगूराम मुसाफिर के विकल्प के तौर पर कांग्रेस के कई नए व संघर्षशील चेहरे अब सीधे टिकट की दौड़ में शामिल हो चुके हैं।
नैना देवी विधानसभा क्षेत्र:
ठाकुर रामलाल के चुनाव हारने के बाद से ही क्षेत्र में नई पीढ़ी का आगाज हो चुका है और पाटिल के बयान से युवा समर्थकों के हौसले बुलंद हैं।
सुक्खू सरकार और गुटबाजी पर अंदरूनी मंथन
मंडी में जब ठाकुर कौल सिंह, रंगीला राम राव और प्रकाश चौधरी जैसे पुराने दिग्गज एक साथ बैठे, तो मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व और पार्टी की मौजूदा कार्यप्रणाली को लेकर भी अंदरूनी चर्चाएं गरमा गईं। कार्यकर्ताओं के बीच यह सवाल जोर-शोर से उठ रहा है कि क्या आलाकमान सच में इन दिग्गजों का दबाव दरकिनार कर निष्ठावान युवाओं को टिकट देगा या फिर पुराने नेता अपनी सियासी साख के दम पर एक बार फिर टिकट झटकने में कामयाब रहेंगे?
पंजाब दस्तक विशेष सवाल:
क्या कांग्रेस आलाकमान सच में दिग्गज नेताओं के पारिवारिक दबाव से आगे बढ़कर युवाओं को मौका दे पाएगा?
जिन नेताओं के टिकट पर तलवार लटकी है, क्या वे बगावत या निर्दलीय चुनाव लड़ने का रास्ता चुनेंगे?
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हिमाचल कांग्रेस में चल रही इस अंदरूनी खींचतान और टिकटों की जंग को आप कैसे देखते हैं? आपकी क्या राय है? कमेंट बॉक्स में अपने विचार जरूर साझा करें।
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