सुरेंद्र राणा
शिमला:हिमाचल प्रदेश में प्रशासनिक व्यवस्था को पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के सरकारी दावों को खुद व्यवस्था के भीतर बैठे आला अफसर और बाबू ही ठेंगा दिखा रहे हैं। प्रदेश को डिजिटल युग में ले जाने और जनता के पैसे की फिजूलखर्ची रोकने के लिए सरकार ने जो कड़े नियम तय किए थे, विभागों ने उनका ही तोड़ निकाल लिया है। अंदरखाने की बड़ी खबर यह है कि वित्तीय अनुशासन में सुधार करने के बजाय कई रसूखदार महकमे सीधे तौर पर वित्त विभाग (Finance Department) को ही बाईपास कर मनमर्जी के फैसले ले रहे हैं। इस प्रशासनिक मनमानी का सीधा असर सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं पर पड़ रहा है, जो धरातल पर उतरने से पहले ही फाइलों में दम तोड़ रही हैं और असली पात्र वर्ग तक समय पर लाभ नहीं पहुंच पा रही हैं।
विश्व बैंक की करोड़ों की संजीवनी, फिर भी बाबुओं की सुस्ती बरकरार
सरकारी ढर्रे को आमूल-चूल बदलने के लिए प्रदेश में ‘हिमाचल प्रदेश पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट कैपेसिटी बिल्डिंग प्रोग्राम’ के तहत एक हाई-टेक अभियान छेड़ा गया है। विश्व बैंक (World Bank) द्वारा पोषित इस विशेष प्रोजेक्ट का एकमात्र मकसद सूचना प्रौद्योगिकी (IT) के जरिए सरकारी खर्चों पर कड़ा नियंत्रण रखना और सार्वजनिक धन के इस्तेमाल में पूरी पारदर्शिता लाना है।
इसी रणनीति के तहत अब सभी सरकारी विभागों और सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs) में ऑनलाइन टेंडरिंग के दायरे को बढ़ाया जा रहा है। जल शक्ति विभाग में जहां ठेके और अनुबंधों को पूरी तरह ऑनलाइन कर पारदर्शिता लाने की कोशिश है, वहीं लोक निर्माण विभाग (PWD) में भी ऑनलाइन टेंडरिंग के नियमों में भारी फेरबदल किए गए हैं ताकि भ्रष्टाचार और चहेतों को रेवड़ियां बांटने के खेल पर लगाम लगाई जा सके।
ई-फाइलिंग का छलावा: सचिवालय में आज भी हावी है ‘कागजी खेल’
पॉलिसी और कागजी दावे अपनी जगह बेहद खूबसूरत हैं, लेकिन धरातल की कड़वी हकीकत यह है कि आम जनता को आज भी एक छोटे से काम के लिए सरकारी दफ्तरों की चौखट पर चप्पलें घिसनी पड़ रही हैं। चौंकाने वाला सच यह है कि साल 2024 में ही राज्य सचिवालय में पूरी तरह ‘ई-फाइल प्रणाली’ (e-File System) लागू कर दी गई थी ताकि फाइलों की आवाजाही पर सीधी नजर रहे। इसके बावजूद, अंदरूनी सूत्रों की मानें तो आज भी ज्यादातर महत्वपूर्ण फाइलें जानबूझकर पारंपरिक कागजी रूट से ही घुमाई जा रही हैं। अफसरों की इसी सुस्ती और फाइलों को दबाकर रखने की आदत के कारण ऑनलाइन सेवाओं का शत-प्रतिशत लक्ष्य अब तक हवा में तैर रहा है।
प्रशासनिक सुस्ती और वित्तीय बाईपास पर भड़के वित्त सचिव देवेश कुमार
इस पूरे ढर्रे और विभागों की मनमानी पर वित्त विभाग के प्रधान सचिव (Principal Secretary Finance) देवेश कुमार ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। सचिवालय गलियारों से छनकर आ रही खबरों के मुताबिक, वित्त सचिव ने साफ लहजे में चेतावनी दी है कि वित्तीय नियमों की अनदेखी और सुधारों को दरकिनार करने की आदत को अब कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए सभी विभागों को बार-बार न सिर्फ कड़े दिशा-निर्देश भेजे जा रहे हैं, बल्कि उनकी जवाबदेही भी तय की जा रही है। कुछ महकमों में बदलाव शुरू जरूर हुआ है, लेकिन प्रशासनिक तंत्र में घर कर चुकी इस सुस्ती को जड़ से उखाड़ने के लिए इस तकनीकी मुहिम को युद्ध स्तर पर ले जाना होगा। देवेश कुमार ने दोटूक कहा है कि सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ बिना किसी देरी के जनता की दहलीज तक पहुंचना ही चाहिए और इसमें रोड़ा बनने वाले अधिकारियों पर गाज गिरना तय है।
सरकार की मंशा साफ है कि जनता का काम घर बैठे हो और खजाने में पारदर्शिता रहे, लेकिन अब देखना यह होगा कि वित्त विभाग को बाईपास करने वाले इन सुस्त विभागों पर मुख्यमंत्री की जीरो टॉलरेंस नीति का डंडा कब तक चलता है।
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