चंडीगढ़ प्रशासन के कथित टेंडर घोटाले से जुड़े CBI जांच मामले की खबर

चंडीगढ़ प्रशासन का 1000 करोड़ का महा-घोटाला: CBI की ताबड़तोड़ रेड से हिला एडमिनिस्ट्रेशन, चार एजेंसियों के सिंडिकेट और अफसरों-राजनेताओं की सांठगांठ बेनकाब

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​सुरेंद्र राणा, ब्यूरो चीफ पंजाब दस्तक, चंडीगढ़
​चंडीगढ़: चंडीगढ़ प्रशासन के विभागों में मैनपावर सप्लाई और आउटसोर्सिंग के नाम पर चल रहे 1,000 करोड़ रुपये के सबसे बड़े और संगठित भ्रष्टाचार का पर्दाफाश हुआ है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की एंटी-करप्शन ब्रांच ने चंडीगढ़ में ताबड़तोड़ छापेमारी करते हुए भ्रष्टाचार के इस विशाल नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। शुरुआती जांच में लगभग 1,000 करोड़ रुपये के इस टेंडर घोटाले के सामने आने से प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। इस कार्रवाई के बाद से शहर के उन तमाम महकमों में खलबली मची हुई है, जहां इन दागी एजेंसियों के जरिए पिछले लंबे समय से यह काला खेल चल रहा था।


​अंदरखाने की कहानी: मलाई के बंटवारे में आपसी फूट और यूनियन की धमाकेदार एंट्री
सूत्रों से मिली अंदरूनी और बेहद सनसनीखेज जानकारी के मुताबिक, यह कोई अचानक सामने आया मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक लंबी साजिश और बाद में ‘मलाई के बंटवारे’ को लेकर हुई आपसी फूट है। यह सिंडिकेट पिछले कई सालों से सक्रिय था। शुरुआत में सब कुछ तय फार्मूले और मिलीभगत से चल रहा था, लेकिन जैसे-जैसे घोटाले का दायरा हजारों करोड़ में पहुंचा, वैसे-वैसे आपस में ही कमीशन और वर्चस्व को लेकर खींचतान शुरू हो गई। जब अंदरूनी बंटवारे में कुछ लोगों के हाथ मायूसी लगी, तो आपसी रंजिश के चलते पोल खुलने लगीं। इसी बीच, जब शिक्षा विभाग की ग्रुप-डी कर्मचारी यूनियन के हाथ पुख्ता सबूत लगे, तो उन्होंने बिना देर किए सीधे केंद्रीय जांच एजेंसी (CBI) के दरवाजे पर दस्तक दे दी और इस पूरे सिंडिकेट का कच्चा-चिट्ठा खोलकर रख दिया।


​राजनीतिक संरक्षण और बड़े अधिकारियों की भूमिका पर बड़ा सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या इस खेल में केवल निजी एजेंसियां ही शामिल थीं या फिर इसके पीछे कुछ बड़े रसूख वाले प्रशासनिक अधिकारी और राजनीतिक संरक्षण प्राप्त चेहरे भी थे? अंदरखाने चर्चा जोरों पर है कि चंडीगढ़ जैसे केंद्र शासित प्रदेश में बिना उच्च स्तरीय राजनीतिक रसूख और बड़े स्तर के अधिकारियों की सीधी मिलीभगत के इतना बड़ा घोटाला संभव ही नहीं था। CBI अब इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि पर्दे के पीछे कौन-कौन से सफेदपोश, बड़े अधिकारी और राजनीतिक दलों से जुड़े चेहरे इस सिंडिकेट को खाद-पानी दे रहे थे। आने वाले दिनों में कई बड़े राजनीतिक चेहरों और रसूखदारों के नाम भी बेनकाब होने की पूरी संभावना है।


​शहर के मुख्य हब से चल रहा था सिंडिकेट और GeM पोर्टल की आड़
विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक, इस पूरे रैकेट का मुख्य संचालन केंद्र चंडीगढ़ के व्यावसायिक हब और प्रमुख ठिकानों से हो रहा था। यहीं से उन चार प्रमुख सर्विस प्रोवाइडर एजेंसियों (जहारवीर कंपनी मैनपावर एंड सिक्योरिटी सर्विसेज, ए टू Z मैनपावर, नेशनल ग्रुप ऑफ सर्विसेज और किमसी एंटरप्राइजेस) का जाल बिछाया गया था। चंडीगढ़ प्रशासन के विभिन्न विभागों में मैनपावर सप्लाई का एकाधिकार इन्हीं के पास था। शिकायत और शुरुआती पड़ताल में यह बात प्रमुखता से सामने आई है कि जब भी इन टेंडरों की पारदर्शिता या नियमों पर सवाल उठाए गए, तो सरकारी GeM (Government e-Marketplace) पोर्टल की प्रक्रियाओं का आवरण ओढ़कर हर आपत्ति को दबा दिया गया। पोर्टल की आड़ में भाई-भतीजावाद और चुनिंदा फर्मों को फायदा पहुंचाने का यह खेल सालों से बेखौफ चल रहा था।


​वेतन, पीएफ और फर्जी हाजिरी का नंगा नाच
घोटाले की परतें जैसे-जैसे खुल रही हैं, वैसे-वैसे कर्मचारियों के शोषण की खौफनाक तस्वीरें सामने आ रही हैं। आरोप है कि कागजों में कर्मचारियों की संख्या और उनकी हाजिरी में भारी हेरफेर किया जाता था। कागजों में फर्जी आंकड़े दिखाकर सरकारी खजाने से पैसा डकारने के साथ-साथ कर्मचारियों के नाम पर मिलने वाले भविष्य निधि (EPF) और ईएसआईसी (ESIC) के फंड में भी बड़े पैमाने पर गोलमाल किया गया है।


​जांच के घेरे में नामी संस्थान और 30,000 कर्मचारियों का भविष्य
यह भ्रष्टाचार सिर्फ निजी एजेंसियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार सरकारी महकमों के भीतर तक जुड़े बताए जा रहे हैं। CBI के रडार पर चंडीगढ़ के कई नामी संस्थान और कॉलेज आ चुके हैं। इनमें मुख्य रूप से गवर्नमेंट कॉलेज (सेक्टर-11), पोस्ट ग्रेजुएट गवर्नमेंट कॉलेज (सेक्टर-46), चंडीगढ़ कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (CCET), पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (PEC), बुड़ैल जेल, चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (CHB) और खेल विभाग शामिल हैं।


इस पूरी कार्रवाई का सबसे बड़ा पहलू यह है कि इन दागी एजेंसियों के माध्यम से चंडीगढ़ के विभिन्न विभागों में लगभग 30,000 आउटसोर्स कर्मचारी कार्यरत हैं। एजेंसियों की इस मनमानी और भ्रष्टाचार के कारण अब इन हजारों कर्मचारियों का भविष्य भी अधर में लटकता नजर आ रहा है। सूत्रों का दावा है कि CBI की इस सख्त कार्रवाई के बाद आने वाले दिनों में कुछ और बड़े खुलासे, राजनीतिक चेहरों की संलिप्तता और ताबड़तोड़ गिरफ्तारियां हो सकती हैं।


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