पूर्व जस्टिस एस. एन. ढींगरा बोले: “देश में 5.5 करोड़ केस पेंडिंग, 44 करोड़ आबादी भुगत रही है लचर व्यवस्था की मार”
चंडीगढ़ (पंजाब दस्तक विशेष कवरेज / सुरेंद्र राणा, ब्यूरो चीफ):
चंडीगढ़ स्थित होटल पार्क View में भारतीय जनता पार्टी (BJP) द्वारा आयोजित ‘जख्म-84’ सिख सम्मेलन का विशेष आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों को न्याय दिलाने और सिख समाज से जुड़े ज्वलंत मुद्दों पर ऐतिहासिक एवं गंभीर मंथन हुआ। सम्मेलन में पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश से भारतीय जनता पार्टी के चुनिंदा पदाधिकारी, प्रबुद्ध नागरिक और पीड़ित परिवार शामिल हुए।
कार्यक्रम को सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता व पूर्व कैबिनेट मंत्री हरविंदर सिंह फूल्का (H. S. Phoolka), दिल्ली उच्च न्यायालय के पूर्व जज जस्टिस एस. एन. ढींगरा (शिव नारायण ढींगरा), पंजाब बीजेपी अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों, पूर्व पंजाब बीजेपी अध्यक्ष सुनील जाखड़ और आर. के. सिंह समेत कई दिग्गज हस्तियों ने संबोधित किया।
एच. एस. फूल्का (H. S. Phoolka) का संबोधन: न्याय की अनसुनी दास्तान
1984 दंगा पीड़ितों की कानूनी लड़ाई लड़ने वाले वरिष्ठ वकील एच. एस. फूल्का ने मंच से 1984 के केसों को दबाने की साजिशों और अपने निजी संघर्ष का ब्योरा दिया:

1. “1991 में नरसिम्हा राव सरकार के वक्त दबाया गया सज्जन कुमार का केस”
एच. एस. फूल्का ने खुलासा करते हुए बताया:
”1987 में सज्जन कुमार के खिलाफ एक केस दर्ज हुआ था। 1989-90 में वी. पी. सिंह सरकार के दौरान इसकी जांच हुई और सज्जन कुमार के खिलाफ गवाहों के पुख्ता बयान दर्ज हुए। लेकिन 1991 में जब केंद्र में नरसिम्हा राव की सरकार आई, तो इस केस पर रिपोर्ट दाखिल करवाकर मामला बंद कर दिया गया।”
2. “सज्जन कुमार को जेल भिजवाने के लिए छोड़ दिया मंत्री पद”
फूल्का ने 2017 के घटनाक्रम का जिक्र करते हुए कहा:
”2017 में जब सज्जन कुमार के खिलाफ मामला दिल्ली हाई कोर्ट में अंतिम सुनवाई (Final Hearing) पर आया, तब मैं पंजाब सरकार में कैबिनेट मंत्री था। बार काउंसिल के नियमों के मुताबिक, मंत्री पद पर रहते हुए मैं कोर्ट में पैरवी नहीं कर सकता था। मेरे सामने दो ही रास्ते थे—या तो मंत्री पद रखकर केस छोड़ दूं, या मंत्री पद त्यागकर पीड़ित सिखों के लिए कोर्ट में लड़ूं। मैंने बिना देर किए मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया और सज्जन कुमार को सजा दिलाने के लिए कोर्ट में उतर गया।”
3. “सीजेआई दीपक मिश्रा की टिप्पणी और सुप्रीम कोर्ट कमेटी”
फूल्का ने बताया कि अगस्त 2017 में जब मामला तत्कालीन चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) जस्टिस दीपक मिश्रा की कोर्ट में गया, तो CJI ने कहा था— “The community is still feeling hurt, we have to do something.” इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस राधाकृष्णन की अध्यक्षता में कमेटी का गठन कर बंद केसों की री-ओपनिंग की समीक्षा करवाई।
पूर्व जस्टिस एस. एन. ढींगरा का न्याय प्रणाली पर करारा प्रहार
दिल्ली उच्च न्यायालय के पूर्व जज जस्टिस शिव नारायण ढींगरा (Justice S. N. Dhingra) ने देश की लचर न्याय व्यवस्था के आंकड़ों से सबको चौंका दिया:
5.5 करोड़ पेंडिंग केस यानी 44 करोड़ लोग प्रभावित: देश की अदालतों में 5.5 करोड़ केस पेंडिंग हैं। यदि एक केस में 2 परिवार और प्रति परिवार 4 सदस्य मानें, तो देश के लगभग 44 करोड़ नागरिक अदालती देरी का दंश झेल रहे हैं।
50 साल बाद न्याय का कोई औचित्य नहीं: उन्होंने कहा कि 50 साल बाद मिलने वाला न्याय न्याय नहीं होता, क्योंकि तब तक मूल पीड़ित की मृत्यु हो चुकी होती है और उनके पोते-पोतियां केस लड़ रहे होते हैं।
दंगों के पीछे राजनीतिक साजिश: 1984 के दंगे अपने आप नहीं हुए, वे करवाए गए थे। 1994-95 में जब केस अलग हुए, तो फाइलों में साफ था कि स्थानीय विधायक (अशोक कुमार कैडर) और म्युनिसिपल काउंसलर (पार्षद) भीड़ को उकसाने में दोषी थे, लेकिन उनके खिलाफ जानबूझकर केस नहीं चलाए गए।
सिस्टम का फायदा उठाया: जजों, वकीलों और नेताओं ने इस लचर व्यवस्था का पूरा फायदा उठाया, जबकि असली पीड़ित दर-दर भटकते रह गए।
पंजाब, हरियाणा व हिमाचल से पहुंचे चुनिंदा प्रतिनिधि
सम्मेलन में पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश से आए वरिष्ठ बीजेपी नेताओं, चुनिंदा कार्यकर्ताओं और प्रतिनिधियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। मंच से संबोधित करते हुए पंजाब बीजेपी अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने 1984 के पीड़ितों के प्रति संवेदना व्यक्त की और कहा कि भाजपा सरकार पीड़ितों को पूरा न्याय दिलाने के लिए कटिबद्ध है। तीनों राज्यों से पहुंचे प्रतिनिधियों ने एक स्वर में मांग की कि 1984 के बाकी बचे दोषियों को जल्द से जल्द सख्त सजा दी जाए।
प्रमुख वक्ताओं का परिचय
हरविंदर सिंह फूल्का (H. S. Phoolka): सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता (Senior Advocate) और पूर्व पंजाब कैबिनेट मंत्री। (वे पीड़ितों की कानूनी लड़ाई लड़ने वाले मुख्य वकील थे)।
जस्टिस शिव नारायण ढींगरा (Justice S. N. Dhingra): दिल्ली उच्च न्यायालय के पूर्व जज (2006-2011)। वे संसद हमला और लाल किला हमला जैसे हाई-प्रोफाइल केसों में सख्त फैसले सुनाने के लिए जाने जाते हैं।
केवल सिंह ढिल्लों: अध्यक्ष, पंजाब भारतीय जनता पार्टी।
सुनील जाखड़: वरिष्ठ भाजपा नेता एवं पूर्व अध्यक्ष, पंजाब भारतीय जनता पार्टी।
विशेष कवरेज: पंजाब दस्तक (सुरेंद्र राणा, ब्यूरो चीफ)
पंजाब दस्तक की अपील:
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