सुरेंद्र राणा, ब्यूरो चीफ, पंजाब दस्तक, अर्की (सोलन)
हिमाचल प्रदेश में इन दिनों स्वर्ण समाज के अधिकारों, हक और अपनी मांगों को लेकर निकाली जा रही बहुचर्चित ‘स्वर्ण न्याय यात्रा’ के दौरान एक बेहद चिंताजनक और भावुक कर देने वाला वाकया सामने आया है। अर्की क्षेत्र में जनसभा को संबोधित कर रहे राष्ट्रीय देवभूमि पार्टी के अध्यक्ष रुमित सिंह ठाकुर अचानक अचेत होकर मंच पर गिर पड़े। इस घटना के बाद से समर्थकों और आंदोलनकारियों में हड़कंप मच गया है, जिन्हें आनन-फानन में अर्की अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, राष्ट्रीय देवभूमि पार्टी के अध्यक्ष रुमित सिंह ठाकुर और श्री राजपूत करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना के नेतृत्व में हिमाचल प्रदेश में स्वर्ण न्याय यात्रा का दौर जारी है। गत 2 अक्टूबर को मनाली से आरंभ हुई यह पदयात्रा कई जिलों का लंबा सफर तय करते हुए 16 अक्टूबर को अर्की पहुंची थी। लगातार कई दिनों से जारी इस लंबी पदयात्रा के चलते रुमित सिंह ठाकुर के पैरों में छाले तक पड़ चुके थे और शरीर पूरी तरह थक चुका था। बावजूद इसके, वे हर पड़ाव पर जनता के बीच जोश के साथ डटे हुए थे। लेकिन अर्की में संबोधन के दौरान अत्यधिक शारीरिक थकान और स्वास्थ्य की नासाज़ियों के चलते वे अचानक बेहोश होकर गिर पड़े। उनके गिरते ही वहां मौजूद कार्यकर्ताओं और समर्थकों में अफरा-तफरी मच गई और तुरंत उन्हें अर्की के अस्पताल ले जाया गया।
समर्थकों के लिए विशेष संदेश: हम अपने सभी समर्थकों और शुभचिंतकों को आश्वस्त करना चाहते हैं कि रुमित सिंह ठाकुर अब काफी हद तक ठीक हैं और अस्पताल में आवश्यक स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं। किसी को भी घबराने या परेशान होने की बिल्कुल आवश्यकता नहीं है।
अस्पताल के भीतर का एक दृश्य हर किसी का कलेजा चीर देने वाला था। अचेत अवस्था में अस्पताल में भर्ती रुमित सिंह ठाकुर के पास जब उनके घर से वीडियो कॉल आई, तो फोन की स्क्रीन पर उनके मासूम बेटे ने अपने पिता को इस हालत में देखा। मासूम बार-बार “पापा-पापा” कहकर फफक-फफक कर रोने लगा। एक तरफ हजारों लोगों के हक और अधिकारों की लड़ाई लड़ने का अटूट जुनून, और दूसरी तरफ अस्पताल के बिस्तर पर पड़े पिता को पुकारता उनका मासूम बेटा—इस मार्मिक दृश्य ने वहां मौजूद हर एक व्यक्ति की आंखें नम कर दीं।
यह पदयात्रा सिर्फ कुछ किलोमीटर का सफर तय करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह स्वर्ण समाज के अस्तित्व और उनकी जायज मांगों की एक बड़ी हुंकार है। आंदोलनकारियों और आयोजकों का साफ तौर पर कहना है कि यह लड़ाई तब तक जारी रहेगी जब तक उनकी प्रमुख मांगें पूरी नहीं हो जातीं, जिसमें मुख्य रूप से यूजीसी के प्रस्तावित नियमों को तुरंत वापस लेने की मांग, देश और प्रदेश में आरक्षण व्यवस्था को जातिगत समीकरणों से परे हटाकर पूरी तरह से आर्थिक आधार पर लागू करने की पुरजोर मांग, और स्वर्ण समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए मजबूत कानूनी प्रावधानों तथा कई जगहों पर स्वर्ण समाज के लिए अलग से कड़े कानून बनाने की आवाज बुलंद की जा रही है।
न खाने का कोई निश्चित समय और न ही सोने का कोई ठिकाना—दिन-रात सड़कों पर चलकर यह कारवां लगातार आगे बढ़ रहा है। पैरों के छाले और शरीर की तमाम सीमाओं को दरकिनार कर रुमित सिंह ठाकुर और उनके साथी जिस जज्बे के साथ आगे बढ़ रहे हैं, वह हर किसी को हैरान कर रहा है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच अब सियासी गलियारों में यह बड़ा सवाल भी सुगबुगाने लगा है कि क्या इस तरह की उपेक्षा या संघर्ष किसी भी पार्टी के लिए राजनीतिक पतन का कारण बन सकती है? आज हर कोई यह सोचने पर मजबूर है कि क्या स्वर्ण समाज सिर्फ चुनाव के वक्त वोट डालने तक ही सीमित कर दिया गया है? हर सियासी दल और सरकार को यह गंभीरता से सोचना होगा कि जो समाज तन, मन और धन से किसी पार्टी या व्यवस्था को मजबूत करने में अपनी पूरी ताकत झोंक देता है, उसकी अनदेखी आने वाले समय में कैसी भारी पड़ सकती है।
फिलहाल, अर्की अस्पताल में रुमित सिंह ठाकुर का उपचार चल रहा है और उनकी स्थिति पर डॉक्टर लगातार नजर बनाए हुए हैं। वहीं, इस यात्रा का अगला और बेहद अहम पड़ाव 22 अक्टूबर को शिमला तय किया गया है, जहां एक बड़े प्रदर्शन का आह्वान किया गया है।
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