सिरमौर के नया गांव हाई स्कूल में कर्मचारी की गलत सेवानिवृत्ति और वेतन विवाद का मामला

शिक्षा विभाग का गजब कारनामा: स्कूल में ड्यूटी बजा रहा चतुर्थ श्रेणी कर्मी, फाइलों में कर दिया ‘रिटायर’; 2 माह से वेतन बंद

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​सिरमौर से मीनाक्षी, वरिष्ठ पत्रकार, पंजाब दस्तक
​नाहन / सिरमौर:

हिमाचल प्रदेश शिक्षा महकमे की कार्यशैली पर एक बार फिर गंभीर सवालिया निशान लग गया है। सिरमौर जिले में एक बेहद हैरान करने वाला प्रशासनिक घालमेल उजागर हुआ है, जहां स्कूल में रोज हाजिरी भरकर अपनी सेवाएं दे रहे चतुर्थ श्रेणी कर्मी को विभागीय फाइलों में समय से पहले ही ‘सेवानिवृत्त’ घोषित कर दिया गया। विभागीय तंत्र की इस अंधी लापरवाही की मार सीधे तौर पर पीड़ित कर्मी पर पड़ी है, जिसे बीते दो महीनों—अगस्त और सितंबर—से फूटी कौड़ी तक वेतन के रूप में नहीं मिली है। नतीजतन, कर्मचारी का परिवार भारी माली तंगी से घिर गया है।


​2028 में होना था सेवामुक्त, 58 की उम्र में ही थमा दी ‘कागजी सेवानिवृत्ति’
​यह चौंकाने वाला प्रकरण सिरमौर के नया गांव हाई स्कूल से जुड़ा है। यहां तैनात क्लास-4 मुलाजिम बिशन दत्त रोजाना अपनी नियमित सेवाएं दे रहे हैं, मगर विभाग के रिकॉर्ड ने उन्हें 60 वर्ष की तय सीमा से पहले ही महज 58 साल की उम्र में रिटायर दिखा दिया।
​पीड़ित बिशन दत्त के मुताबिक, उन्होंने सितंबर 1997 में शिक्षा विभाग में बतौर वाटर कैरियर (जलवाहक) अपना सफर शुरू किया था। सरकारी सेवा नियमों के तहत उन्हें वर्ष 2028 में सेवानिवृत्त होना है।


​ट्रेजरी पहुंची फाइल तो उड़ा होश, जुलाई में ही बंद कर दी थी सर्विस बुक
​अगस्त महीने की तनख्वाह खाते में न आने पर जब बिशन दत्त ने दफ्तर के चक्कर काटे, तो पहले उन्हें जल्द भुगतान का दिलासा देकर टरकाया जाता रहा। मामला जब संबंधित शाखा और ट्रेजरी तक पहुंचा, तब इस बड़ी धांधली की परतें खुलीं। ट्रेजरी रिकॉर्ड में दर्ज था कि कर्मचारी तो जुलाई माह में ही रिटायर हो चुका है। शुरुआती पड़ताल में इसे डीडीओ (DDO) स्तर पर हुई गंभीर लिपिकीय चूक (क्लेरिकल ब्लंडर) माना जा रहा है।


​सरकारी नियमों की खुली अनदेखी
​हिमाचल प्रदेश सरकार के वित्त विभाग द्वारा 28 अप्रैल 2023 को जारी स्पष्ट आदेशों के मुताबिक, 10 मई 2001 से पूर्व दैनिक वेतनभोगी अथवा पार्ट-टाइम सेवा में आए और बाद में नियमित हुए चतुर्थ श्रेणी मुलाजिमों की रिटायरमेंट आयु 60 वर्ष तय है। इस नियम के तहत बिशन दत्त वर्ष 2028 तक पूरी सेवा देने के हकदार हैं, लेकिन महकमे ने नियमों को ताक पर रखकर कागजों में उन्हें पहले ही घर बैठा दिया। इसके अलावा शाखा से जुड़े अन्य कर्मियों का सितंबर का वेतन भी अधर में लटका होने की सूचना है।


​दोषियों पर गिरेगी गाज, होगी निष्पक्ष जांच: उच्च शिक्षा उपनिदेशक मदन लाल
​इस पूरे प्रशासनिक बवंडर पर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए सिरमौर के उच्च शिक्षा उपनिदेशक मदन लाल ने कड़ा संज्ञान लिया है। उन्होंने दो-टूक कहा कि यह प्रकरण बेहद संगीन है। मामले की तह तक जाकर पड़ताल की जाएगी कि आखिर कागजी फेरबदल और इतनी भारी चूक किस स्तर पर अंजाम दी गई। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि जांच में जिस भी अधिकारी अथवा बाबू की लापरवाही पाई जाएगी, उसके विरुद्ध कड़ा अनुशासनात्मक एक्शन लिया जाएगा।
​फिलहाल, पीड़ित कर्मचारी अपनी अटकी तनख्वाह मिलने और सर्विस रिकॉर्ड के दुरुस्त होने की बाट जोह रहा है।


​देखते रहें ‘पंजाब दस्तक’ — सच की आवाज़!
जनता से जुड़ा कोई भी मसला हो या दफ्तरों में दबा भ्रष्टाचार, हम हर पीड़ित की आवाज़ को शासन-प्रशासन के कानों तक मजबूती से पहुंचाते रहेंगे।

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