पंजाब दस्तक विशेष: चंडीगढ़ न्यूज़ रूम से सीधी बात
सुरेंद्र राणा (ब्यूरो चीफ, पंजाब दस्तक):
नमस्कार, मैं सुरेंद्र राणा, ब्यूरो चीफ ‘पंजाब दस्तक’, इस वक्त चंडीगढ़ न्यूज़ रूम से मुखातिब हूं। हिमाचल प्रदेश के पेंशनरों से जुड़ा एक बड़ा और बेहद संवेदनशील मुद्दा गरमाया हुआ है। इसमें कोई लाग-लपेट या इधर-उधर की बात नहीं है—सीधी और बेबाक बात है। इस समय कांगड़ा से सीधे हमारे साथ टेलीफोन लाइन पर जुड़े हैं हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश ठाकुर जी। अभी-अभी फोन पर उनसे जो गंभीर और दिल खोलकर बातचीत हुई है, उसके मुख्य अंश हम सीधे आपके सामने रख रहे हैं।
ठाकुर साहब, नमस्कार! आप कांगड़ा में हैं और इस वक्त पूरे हिमाचल के पेंशनर्स में भारी रोष है। वित्त विभाग ने 14 सितंबर 2026 को पेंशन कम्यूटेशन को लेकर जो नई अधिसूचना जारी की है, उस पर आपकी समिति का क्या स्टैंड है?
सुरेश ठाकुर (प्रदेश अध्यक्ष, कांगड़ा से):
राणा जी, नमस्कार। चंडीगढ़ न्यूज़ रूम में बैठे आप और पूरा प्रदेश यह जान ले कि यह अधिसूचना पूरी तरह से अन्यायपूर्ण और पेंशनर विरोधी तुगलकी फरमान है। वित्त विभाग ने 14 सितंबर 2026 की अधिसूचना जारी करके कम्यूटेशन नियम 8(1)(i) और 8(1)(iii) को समाप्त कर दिया है। इसका सीधा प्रहार 1 जनवरी 2016 से 31 जनवरी 2022 के बीच सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों पर हुआ है।
इस संशोधन से पहले महालेखाकार (AG) इन सभी पेंशनरों के कम्यूटेशन केस पास करके जिला कोषाधिकारियों को अदायगी के निर्देश दे चुके थे। लेकिन इस एक आदेश से सारी देनदारियां रोक दी गईं, जिससे एक-एक बुजुर्ग पेंशनर को 5 से 10 लाख रुपये तक का सीधा नुकसान उठाना पड़ रहा है। हमारी दो-टूक मांग है कि 14 सितंबर की अधिसूचना तुरंत रद्द हो और 25 फरवरी 2022 की अधिसूचना के तहत यथास्थिति बहाल की जाए।
सुरेंद्र राणा:
आप इसे खुला भेदभाव क्यों बता रहे हैं? क्या यह फैसला सभी पर लागू नहीं है?
सुरेश ठाकुर:
यह सरासर भेदभाव है, राणा जी! सरकार का दोहरा मापदंड देखिए—31 जनवरी 2022 के बाद रिटायर होने वाले कर्मचारियों के लिए कम्यूटेशन के नियम पुराने ही रहेंगे, लेकिन 1 जनवरी 2016 से 31 जनवरी 2022 के बीच रिटायर हुए वर्ग को बलि का बकरा बना दिया गया। सबसे अफसोस की बात यह है कि कुछ स्वयंभू पेंशनर संगठन सरकार के सामने आवाज उठाने के बजाय चाटुकारिता में लगे हैं, सरकार का झूठा गुणगान कर रहे हैं और पेंशनर समाज की पीठ में छुरा घोंप रहे हैं।
सुरेंद्र राणा:
ठाकुर साहब, एक तीखा सवाल सरकार और आम जनता की ओर से भी उठता है। प्रदेश पहले से ही भारी कर्ज और आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रहा है। जब खजाने में फंड नहीं है, तो सरकार बाजार से भारी ब्याज पर ‘उधार लेकर’ पेंशनरों को कम्यूटेशन का एकमुश्त अग्रिम (उधार) क्यों दे? जो नियमित पेंशन मिल रही है, वही काफी क्यों नहीं है?
सुरेश ठाकुर:
राणा जी, चंडीगढ़ न्यूज़ रूम से आपने यह सबसे जरूरी और चुभता हुआ सवाल पूछा है। जो लोग इसे ‘उधार लेकर उधार देना’ कह रहे हैं, वे या तो कम्यूटेशन का गणित नहीं समझते या जनता को गुमराह कर रहे हैं:
कम्यूटेशन कोई खैरात या कर्ज नहीं है: कर्मचारी अपनी ही मासिक पेंशन का एक हिस्सा (अधिकतम 40%) 15 साल के लिए सरकार के पास गिरवी रखता है। सरकार जो एकमुश्त पैसा देती है, उसकी पूरी रिकवरी हर महीने पेंशनर की पेंशन से ब्याज समेत काटी जाती है। 15 साल बाद पेंशनर पाई-पाई चुका देता है।
कुप्रबंधन की सजा बुजुर्गों को क्यों? सरकार के पास बोर्ड-निगमों में राजनीतिक अध्यक्षों की फौज, सलाहकारों और शाही ठाठ-बाठ के लिए फंड की कोई कमी नहीं है, लेकिन 35-40 साल ईमानदारी से सेवा करने वाले बुजुर्गों के हक, इलाज और बुनियादी जरूरतों के लिए खजाना खाली होने का रोना रोया जाता है।
दोहरे मापदंड क्यों? अगर पैसा नहीं है, तो 31 जनवरी 2022 के बाद वालों को किस खजाने से कम्यूटेशन दिया जा रहा है? एक ही राज्य में दो अलग-अलग नियम संविधान के समानता के अधिकार की धज्जियां उड़ाते हैं।
सुरेंद्र राणा:
आने वाले त्योहारों को देखते हुए पेंशनर्स और कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) व महंगाई राहत (DR) को लेकर आपकी क्या मांग है?
सुरेश ठाकुर:
सरकार को स्पष्ट चेतावनी है कि दिवाली से पहले पेंशनर्स और कर्मचारियों को 15% महंगाई राहत और लंबित महंगाई भत्ते की किस्त तुरंत जारी की जाए। सरकार यह न भूले कि पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने पंजाब सरकार द्वारा डीए की किस्तें न देने पर वहां के मुख्य सचिव के खिलाफ अवमानना (कंटेंप्ट पिटिशन) की कार्रवाई शुरू कर दी है। यदि हिमाचल सरकार ने समय रहते फैसला नहीं लिया, तो हम भी उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे और सरकार को इसी कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
सुरेंद्र राणा:
आपने मुख्यमंत्री को 17 सूत्रीय मांग पत्र भी सौंपा है। उसमें 2016 से जुड़ी वित्तीय देनदारियों को लेकर मुख्य मांगें क्या हैं?
सुरेश ठाकुर:
हमने 22 सितंबर 2026 को मुख्यमंत्री को 17 सूत्रीय मांग पत्र सौंपकर 1 जनवरी 2016 से 31 दिसंबर 2020 तक की सभी देनदारियों के त्वरित भुगतान का आग्रह किया है:
1 जनवरी 2016 से लेकर आज दिन तक सेवानिवृत्त हुए सभी पेंशनरों के वेतन एरियर का भुगतान।
संशोधित ग्रेच्युटी की बकाया 80% राशि की तुरंत अदायगी।
संशोधित लीव इनकैशमेंट का भुगतान।
क्लास-1 और क्लास-2 के अधिकारियों का 50% बकाया पेंशन एरियर जारी करना।
सुरेंद्र राणा:
निगमों, बोर्डों और पुलिस पेंशनर्स के संदर्भ में आपके मांग पत्र में क्या प्रमुख मांगें रखी गई हैं?
सुरेश ठाकुर:
हमने हर वर्ग के हित की बात मजबूती से उठाई है:
HRTC पेंशनर्स: एचआरटीसी पेंशनरों को 3% महंगाई राहत और 50,000 रुपये की पिछली बकाया किस्त तुरंत अदा की जाए।
बिजली बोर्ड: बिजली बोर्ड कर्मियों और पेंशनरों के लिए पुरानी पेंशन योजना (OPS) पूरी तरह बहाल की जाए।
शहरी निकाय: नगर निगम व शहरी निकायों के सेवानिवृत्त कर्मचारियों को 1/1/2016 के पे-स्केल के आधार पर पेंशन दी जाए।
कॉरपोरेट सेक्टर: कॉरपोरेट सेक्टर के सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन बहाल हो और 1999 की पेंशन अधिसूचना को लागू किया जाए।
पुलिस पेंशनर्स: पुलिस विभाग के रिटायर्ड जवानों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा और सेना की तर्ज पर कैंटीन सुविधा उपलब्ध करवाई जाए।
सुरेंद्र राणा:
यदि सरकार आपके मांग पत्र पर बातचीत की पहल नहीं करती, तो संघर्ष समिति का अगला कदम क्या होगा?
सुरेश ठाकुर:
यदि सरकार ने सुरेश ठाकुर की अध्यक्षता वाली संयुक्त संघर्ष समिति को बातचीत की मेज पर नहीं बुलाया, तो यह शांति तूफान से पहले की साबित होगी। पेंशनर एक बार फिर सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होंगे और इस उग्र आंदोलन का पूरा खामियाजा सरकार को भुगतना पड़ेगा।
सुरेंद्र राणा:
डिप्टी रजिस्ट्रार शिमला द्वारा ‘सुरेश ठाकुर बनाम आत्माराम’ मामले में 3 अक्टूबर 2026 को दिए गए फैसले पर आपकी क्या कानूनी तैयारी है?
सुरेश ठाकुर:
उस फैसले के खिलाफ एक से दो दिन के भीतर सक्षम न्यायालय में अपील दायर की जा रही है। हम अदालत से इस आदेश पर स्टे ऑर्डर प्राप्त करेंगे। सच्चाई और कानून हमारे साथ है।
सुरेंद्र राणा:
राजनीतिक बयानबाजी, खासकर आम आदमी पार्टी के प्रवक्ताओं और कुछ नेताओं द्वारा पेंशनर आंदोलन में दखल देने पर आप क्या कहना चाहेंगे?
सुरेश ठाकुर:
मैं साफ शब्दों में चेतावनी देता हूं कि आम आदमी पार्टी के जो प्रवक्ता और कुछ मुट्ठी भर लोग सरकार के पिट्ठू बनकर पेंशनरों के स्वयंभू नेता बनने का ढोंग कर रहे हैं और अनाप-शनाप बयानबाजी कर रहे हैं, वे बाज आएं। पेंशनरों के गैर-राजनीतिक संगठन का इस्तेमाल अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए न करें और बुजुर्गों को गुमराह करने की कोशिश बंद करें।
सुरेंद्र राणा:
कांगड़ा से सीधे चंडीगढ़ न्यूज़ रूम में हमारे साथ जुड़ने और हर सवाल का बेबाक, तार्किक व दिल खोलकर जवाब देने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद, ठाकुर साहब।
सुरेश ठाकुर:
धन्यवाद राणा जी, और धन्यवाद पंजाब दस्तक का जो हमेशा पेंशनरों के हक की आवाज उठाता है।
पंजाब दस्तक की विशेष अपील
हिमाचल प्रदेश के तमाम पेंशनर भाइयों और बहनों से ‘पंजाब दस्तक’ की ओर से विनम्र प्रार्थना और अपील है:
हम आपके अधिकारों और समस्याओं को लेकर पूरी तरह समर्पित हैं। चाहे सरकार का स्तर हो या प्रशासन का, पेंशनरों के हर एक मुद्दे को हम पूरी निष्पक्षता और बेबाकी से उठाते आए हैं और आगे भी उठाते रहेंगे।
आपसे आग्रह है कि हिमाचल के कोने-कोने में पेंशनरों से जुड़ी हर छोटी-बड़ी खबर, हर आंदोलन और हर अधिकार की पल-पल की जानकारी सीधे पाने के लिए:
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