डॉ. जनक राज भरमौर पांगी में जनसभा को संबोधित करते हुए

‘मैं कोई चोर-उचक्का या आतंकवादी नहीं, जो गीदड़भभकियों से डर जाऊं… दम है तो एक भी घपला साबित करो, अभी छोड़ दूंगा विधायकी!’

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​भरमौर-पांगी के सियासी अखाड़े में विधायक डॉ. जनक राज का प्रचंड प्रहार; पूर्व विधायक जिया लाल कपूर के आरोपों की उड़ाईं धज्जियां, बोले— ‘मैं डॉक्टर हूं, मरीजों की नब्ज और पर्चियां टटोलता हूं, दलाली खाना मेरा काम नहीं!’


​धमाकेदार ग्राउंड रिपोर्ट: सुशील (वरिष्ठ पत्रकार)
विशेष कवरेज: पंजाब दस्तक डिजिटल नेटवर्क, पांगी-चंबा
​घाटी की सियासत में भूचाल, विरोधियों की लफ्फाजी पर विधायक का सीधा प्रहार
जनजातीय क्षेत्र भरमौर-पांगी का सियासी पारा इन दिनों सातवें आसमान पर पहुंच चुका है। पूर्व विधायक जिया लाल कपूर द्वारा लगाए जा रहे तथाकथित आरोपों और बयानों पर पलटवार करते हुए स्थानीय विधायक डॉ. जनक राज ने विरोधियों के सियासी तंबू हिला दिए हैं। बर्फबारी और दुर्गम रास्तों के बीच पांगी घाटी के तूफानी दौरे पर पहुंचे विधायक ने जनता की अदालत से विरोधियों को खुली ललकार दी। डॉ. जनक ने साफ लफ्जों में कहा कि जो लोग उन्हें डराने और धमकाने का दिवास्वप्न देख रहे हैं, वे यह गांठ बांध लें कि उनके साथ घाटी के अवाम का अटूट विश्वास और आशीर्वाद खड़ा है।


​”मेरी खैर अवाम के हाथ में, किसी के रहमोकरम पर नहीं जीता!”
​पांगी में उमड़े भारी जनसैलाब को संबोधित करते हुए विधायक डॉ. जनक राज का आक्रोश खुलकर सामने आया। उन्होंने विरोधियों के बयानों की धज्जियां उड़ाते हुए दहाड़ लगाई:
​”गली-कूचों में खड़े होकर यह कहने वाले कान खोलकर सुन लें कि मेरी खैरियत तय करने वाले मेरे अपने लोग हैं, किसी नेता के फरेबी बोल नहीं! आखिर किस बिनाह पर मेरी खैर न होने की दुहाई दी जा रही है? क्या मैं कोई घोषित अपराधी हूं? क्या मैंने जनता का खजाना लूटा है? या मैं कोई देशद्रोही और आतंकवादी हूं? अगर हिम्मत है तो जनता के सामने आकर तथ्यों के साथ बात करो, पीठ पीछे कायरों की तरह फिकरे कसना बंद करो!”


​”एक सुबूत लाओ, इसी वक्त त्यागपत्र लो… मैं पर्चियां देखता हूं, दलाली नहीं!”
​वित्तीय हेराफेरी के मनगढ़ंत आरोपों पर करारा तंज कसते हुए डॉ. जनक राज ने कहा कि राजनीति में मर्यादा और प्रमाण होने चाहिए। उन्होंने भरे मंच से खुली चुनौती फेंकी:
​”मैं जनता के सेवक के रूप में काम कर रहा हूं। अगर पूर्व विधायक या उनके सिपहसालारों में जरा भी सच्चाई है, तो मेरे खिलाफ किए गए किसी एक भी गलत काम का पुख्ता प्रमाण पेश कर दें। अगर आरोप सच निकला, तो मैं एक पल भी गवांए बिना इसी वक्त विधानसभा की सदस्यता से त्यागपत्र दे दूंगा। मैं एक पेशेवर डॉक्टर हूं, पर्चियां देखकर लोगों का दर्द बांटना जानता हूं, कमीशनखोरी और कट-कमीशन की दलाली खाना मेरा पेशा नहीं है!”


​दफ्तरों की मलाई छोड़कर बर्फानी रास्तों पर जनता की सेवा
​डॉ. जनक राज ने कहा कि पांगी-भरमौर जैसा इलाका भौगोलिक रूप से बेहद विकट है। यहां की असली लड़ाई सड़क, बिजली, स्वास्थ्य, पानी और शिक्षा की बदहाली से है, न कि झूठी बयानबाजी से। उन्होंने कहा कि वे शिमला या चंबा के बंद कमरों में बैठकर राजनीति करने वाले नुमाइंदे नहीं हैं, बल्कि शून्य से नीचे के तापमान में भी जनता के दुख-दर्द को बांटने सीधे उनके घर-आंगन तक पहुंचते हैं। जनता की हर जायज आवाज को विधानसभा से लेकर सरकार के सर्वोच्च पटल तक पहुंचाना ही उनका एकमात्र मकसद है।


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