बैंक कर्मचारियों पर काम का दबाव और 28 से 30 सितंबर 2026 की बैंक हड़ताल

बैंक कर्मियों पर काम का तिहरा बोझ: म्यूचुअल फंड-इंश्योरेंस बेचने का दबाव, सुस्त भर्ती और घंटों की ओवर-सिटिंग;

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​चंडीगढ़ (न्यूज़ रूम से विशेष रिपोर्ट — सुरेंद्र राणा):
“सामान्य बैंकिंग करें, सरकारी योजनाएं लागू करें या सेल्समैन बनकर म्यूचुअल फंड और इंश्योरेंस बेचें?” यह तीखा सवाल आज देश भर के बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच गूंज रहा है। आगामी तीन दिनों की राष्ट्रव्यापी बैंक हड़ताल से ठीक पहले आज संडे को भी बैंक शाखाएं खुली रहीं। ‘पंजाब दस्तक’ के ब्यूरो चीफ सुरेंद्र राणा ने जब ग्राउंड ज़ीरो पर उतरकर एसबीआई (SBI), पीएनबी (PNB) और अन्य बैंकों का जायजा लिया, तो कर्मचारियों का यह गहरा असंतोष और मानसिक तनाव खुलकर सामने आया।


​1. कोर बैंकिंग छोड़कर थर्ड-पार्टी प्रोडक्ट्स बेचने का भारी दबाव
​बैंक कर्मियों का साफ कहना है कि उनका मूल काम जमा, निकासी, ऋण वितरण और सुचारू बैंकिंग सेवाएं देना है। लेकिन वर्तमान व्यवस्था में उन पर सरकारी स्कीमों के साथ-साथ म्यूचुअल फंड, जीवन बीमा और जनरल इंश्योरेंस जैसी थर्ड-पार्टी पॉलिसियां बेचने का अघोषित दबाव बना दिया गया है। टारगेट पूरे न होने पर समीक्षा बैठकों में मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ती है।


​2. सुस्त भर्ती प्रक्रिया और मैनपावर की भारी किल्लत
​कर्मचारियों के मुताबिक, पिछले कई वर्षों से बैंकों में नई भर्ती प्रक्रिया बेहद सुस्त और सीमित हो चुकी है। सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों की जगह नए पद नहीं भरे जा रहे हैं। नतीजतन, कई शाखाएं आधे स्टाफ के सहारे चल रही हैं। इस मैनपावर की कमी का सीधा असर यह है कि कर्मचारियों को रोजाना तय समय से 2 से 3 घंटे अतिरिक्त (ओवर-सिटिंग) काम करना पड़ रहा है, जिसका न कोई अतिरिक्त पारिश्रमिक मिलता है और न ही काम की कोई तय समय-सीमा बची है।


​3. एलआईसी जैसे संस्थानों में 5-डे वर्किंग, तो बैंकों में क्यों नहीं?
​कर्मचारियों का तर्क है कि जब एलआईसी (LIC) और अन्य प्रमुख वित्तीय व सार्वजनिक संस्थानों में हफ्ते में 5 दिन काम (5-Day Banking) का नियम सफलतापूर्वक लागू है, तो बैंकों के साथ यह दोहरा मापदंड क्यों?
​पूरे हफ्ते 10 से 12 घंटे काम करने के बाद संडे को भी शाखाओं में बुलाए जाने से पारिवारिक जीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो चुका है।


​कर्मचारियों का कहना है कि वे भी इंसान हैं, कोई रोबोट नहीं जो बिना रुके सिर्फ आंकड़े और फाइलें निपटाते रहें।
​कैमरे के पीछे बयां हुआ सच प्रशासनिक पाबंदियों और सर्विस रूल्स के डर से भले ही कई कर्मियों और अधिकारियों ने कैमरे के सामने खुलकर बोलने से परहेज किया, लेकिन कैमरे के पीछे उन्होंने साफ कहा कि आगामी तीन दिन की हड़ताल कोई शौक नहीं, बल्कि मैनपावर की बहाली और काम के मानवीय घंटों की मांग को लेकर उठाया गया अंतिम कदम है।


​ग्राहकों के लिए जरूरी अलर्ट:
रविवार को शाखाएं खुलने के बावजूद आगामी तीन दिनों तक हड़ताल के चलते बैंकिंग सेवाएं बाधित रहेंगी। खाताधारक अपने जरूरी वित्तीय लेन-देन, चेक क्लीयरेंस और ट्रांसफर डिजिटल माध्यमों से समय रहते निपटा लें।


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