पंजाब दस्तक / मीनाक्षी (वरिष्ठ पत्रकार), शिमला:
राजधानी शिमला में पेयजल व्यवस्था संभाल रही कंपनी शिमला जल प्रबंधन निगम लिमिटेड (SJPNL) और इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (IGMC) की ताजा संयुक्त जांच रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है। शहर के करीब 93 फीसदी प्राकृतिक व भूमिगत जलस्रोत दूषित हो चुके हैं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सख्त हेल्थ अलर्ट जारी किया है।
42 में से 39 बावडियों और 10 से ज्यादा हैंडपंपों का पानी दूषित
जांच रिपोर्ट के अनुसार, चौड़ा मैदान, विकासनगर, न्यू शिमला और आसपास के उपनगरों में हालात बेहद चिंताजनक हैं। इन इलाकों में 40 से 42 बावडियों में से 39 बावडियों और 10 से ज्यादा हैंडपंपों के पानी के नमूनों में डायरिया, हेपेटाइटिस-ए और हेपेटाइटिस-ई फैलाने वाले खतरनाक बैक्टीरिया पाए गए हैं।
सेप्टिक टैंकों और अनकनेक्टेड सीवरेज की गंदगी भूमिगत जल में घुली
जांच में सामने आया है कि उपनगरों में सेप्टिक टैंकों और अनकनेक्टेड सीवरेज की गंदगी रिसकर सीधे भूमिगत जल में घुल रही है। इसके चलते स्वास्थ्य विभाग ने बावडियों का पानी सीधे पीने पर रोक लगाते हुए पानी उबालकर इस्तेमाल करने की सख्त एडवाइजरी जारी की है।
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