हमीरपुर (पंजाब दस्तक ब्यूरो/वरिष्ठ पत्रकार उमांशी राणा):
हिमाचल प्रदेश की सियासत में छह बार मुख्यमंत्री रहे स्व. वीरभद्र सिंह, प्रेम कुमार धूमल, शांता कुमार और जयराम ठाकुर जैसे कद्दावर नेताओं ने दशकों तक प्रदेश की सत्ता संभाली। लेकिन मौजूदा मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने महज ढाई साल के कार्यकाल में वो पांच क्रांतिकारी फैसले धरातल पर उतार दिए हैं, जो 77 सालों के इतिहास में कोई सरकार नहीं कर पाई। सचिवालय के कमरों से निकलकर व्यवस्था को जनता की चौखट तक पहुंचाने वाले सुक्खू सरकार का यह ढाई साल का सफर अब आम जनमानस में ‘व्यवस्था परिवर्तन’ की मिसाल बन चुका है।
अधिकारियों की क्लास से लेकर दिल्ली दरबार तक: हर पल हिमाचल के विकास की नई सोच
लगातार 9 वर्षों तक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रहकर संगठन की बारीकियों और आम कार्यकर्ता के दर्द को समझने वाले मुख्यमंत्री सुक्खू की कार्यशैली आज सबसे अलग नजर आती है। वे न तो फाइलों में उलझते हैं और न ही कागजी रिपोर्टों पर भरोसा करते हैं। प्लानिंग की मैराथन बैठकों में वे खुद अधिकारियों की क्लास लेते हैं और दो टूक पूछते हैं—’योजनाएं धरातल पर कब उतरेंगी?’
अपने पुराने साथियों और आम कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद उनकी सबसे बड़ी ताकत है। हिमाचल के अधिकारों और विकास प्रोजेक्टों की पैरवी के लिए वे आज फिर दिल्ली दौरे पर हैं, जहां वे केंद्रीय मंत्रियों और वित्त मंत्रालय के समक्ष हिमाचल के लंबित प्रोजेक्टों को हरी झंडी दिलाने के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं।
वे 5 ऐतिहासिक फैसले, जिन्होंने रच दिया इतिहास:
1. पहली ही कैबिनेट में OPS बहाल—1.36 लाख कर्मचारियों का सुरक्षित भविष्य:
दशकों तक जो मांग सिर्फ चुनावी घोषणापत्रों की शोभा बढ़ाती थी, मुख्यमंत्री सुक्खू ने अपनी पहली ही कैबिनेट बैठक में 1.36 लाख कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना (OPS) की सौगात देकर पूरी की। जो मुलाजिम एनपीएस के तहत महज 2-3 हजार की पेंशन पर बेबस थे, आज उन्हें 20 से 40 हजार रुपये की सम्मानजनक पेंशन मिल रही है। यह केवल पेंशन नहीं, बल्कि बुजुर्ग माता-पिता का सम्मान है।
2. ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’—सुखाश्रय योजना से अनाथों के बने माता-पिता:
देश के किसी भी राज्य में आज तक बेसहारा बच्चों के लिए ऐसी सोच नहीं दिखी। मुख्यमंत्री ने 101 करोड़ रुपये का ‘मुख्यमंत्री सुखाश्रय कोष’ बनाकर अपनी पूरी पहली सैलरी इसमें दान कर दी। कानून बनाकर अनाथ बच्चों को ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ का दर्जा दिया गया—यानी अब सरकार ही इनकी माता है और सरकार ही पिता। अब प्रदेश में ‘अनाथ’ शब्द का इस्तेमाल बंद है; इन बच्चों की IIT, IIM, इंजीनियरिंग की पूरी फीस, 10 हजार रुपये कपड़ा भत्ता और त्योहार भत्ता सीधे सरकार देती है।
3. दिल्ली में 145 करोड़ का फाइव स्टार ‘हिमाचल निकेतन’:
दिल्ली में इलाज, पढ़ाई और रोजगार के सिलसिले में जाने वाले हिमाचली परिवारों के दर्द को मुख्यमंत्री ने समझा। द्वारका में 145 करोड़ की लागत से 107 कमरों वाला फाइव स्टार सुविधाओं से लैस ‘हिमाचल निकेतन’ बनवाया जा रहा है। पहले जहां दिल्ली में मात्र 36 कमरों की सीमित व्यवस्था थी, वहीं अब यह नया भवन दिल्ली में हिमाचलियों का सबसे बड़ा और आधुनिक ठिकाना बनेगा।
4. महिलाओं को ₹1500 सम्मान निधि और देश में दूध पर सबसे ज्यादा MSP:
‘इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख सम्मान निधि’ के जरिए महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए 1500 रुपये प्रति माह दिए जा रहे हैं। वहीं, ग्रामीण आर्थिकी को मजबूत करने के लिए देश में पहली बार गाय के दूध पर ₹45 और भैंस के दूध पर ₹55 की एमएसपी तय कर किसानों और पशुपालकों की जेब में सीधे लाभ पहुंचाया गया।
5. पहली कक्षा से अंग्रेजी मीडियम और 680 करोड़ का युवा स्टार्टअप फंड:
गरीब का बच्चा भी कॉन्वेंट स्कूलों की तरह धाराप्रवाह अंग्रेजी बोल सके, इसके लिए सरकारी स्कूलों में पहली कक्षा से अंग्रेजी माध्यम लागू किया गया। हर हलके में ‘राजीव गांधी डे-बोर्डिंग स्कूल’ तैयार हो रहे हैं। युवाओं के रोजगार के लिए 680 करोड़ का स्टार्टअप फंड शुरू कर ई-टैक्सी पर 50% सीधी सब्सिडी दी जा रही है।
कर्मचारियों की सुरक्षा, बेसहारा बच्चों का संरक्षण, महिलाओं का सम्मान, आधुनिक शिक्षा और दिल्ली दरबार में हिमाचल के हक की मजबूत पैरवी—यही वह विजन है जिसके दम पर आज देवभूमि की जनता कह रही है कि सुखविंदर सिंह सुक्खू ने राजनीति नहीं, बल्कि इतिहास बदलने का काम किया है।

