नई दिल्ली (पंजाब दस्तक ब्यूरो/ऋचा शर्मा):
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के पहले ही दिन भारत और चीन के शीर्ष नेतृत्व के बीच कूटनीतिक गर्मजोशी के ऐसे दुर्लभ और अप्रत्याशित दृश्य देखने को मिले, जिसने दोनों देशों के रिश्तों में जमी बर्फ पिघलने के पुख्ता संकेत दे दिए हैं। सम्मेलन के सबसे चर्चित घटनाक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने उद्घाटन संबोधन के बीच अचानक वाणी रोक दी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की असहजता को भांपते हुए उनके अनुवादक से सीधे पूछा— “क्या आप ठीक हैं? (Is it okay?)”। कुछ ही पलों बाद जब जिनपिंग ने मुस्कुराकर सिर हिलाते हुए आश्वस्त किया, तब प्रधानमंत्री ने अपना भाषण आगे बढ़ाया। हालांकि, दिन भर के इस आत्मीय माहौल के बाद रात को पीएम मोदी द्वारा आयोजित भव्य डिनर में जिनपिंग के न पहुंचने से राजनयिक गलियारों में कयासों का बाजार पूरी तरह गरमा गया।
भाषण के बीच ठिठके मोदी, अनुवादक से पूछा हाल
दूरदर्शन द्वारा जारी फुटेज के अनुसार यह वाकया पीएम मोदी के शुरुआती भाषण के करीब 4 मिनट 40 सेकंड से 5 मिनट 11 सेकंड के बीच घटा। मंच पर भाषण के दौरान जिनपिंग के हाव-भाव में आई हल्की असहजता पर प्रधानमंत्री का ध्यान तुरंत गया। मोदी ने बिना किसी झिझक के अपना संबोधन बीच में रोका और चीनी अनुवादक की ओर मुखातिब होकर अंग्रेजी में पूछा, “इज इट ओके?”। स्पष्ट प्रतिक्रिया न मिलने पर मोदी ने दोबारा वही सवाल दोहराया। प्राथमिक तौर पर इसे ट्रांसलेशन हेडसेट या ऑडियो की तकनीकी दिक्कत माना गया। जिनपिंग के सकारात्मक इशारे के बाद ही प्रधानमंत्री पुनः अपने औपचारिक वक्तव्य पर लौटे।
थकान बनी डिनर से दूरी की वजह?
दिन भर के सकारात्मक घटनाक्रमों के बाद आधिकारिक रात्रिभोज (डिनर) से चीनी राष्ट्रपति की गैर-हाजिरी चर्चा का मुख्य केंद्र बन गई। राजनयिक सूत्रों और प्रत्यक्ष जानकारी रखने वाले अधिकारियों के अनुसार, जिनपिंग लंबी अंतरराष्ट्रीय उड़ान और भारी टाइम-ज़ोन अंतर (जेट लैग) के कारण अत्यधिक शारीरिक थकान महसूस कर रहे थे। इसी वजह से उन्होंने रात्रिभोज से विश्राम को प्राथमिकता दी, न कि किसी कूटनीतिक असहजता के चलते।
भारत मंडपम में रामनाथस्वामी मंदिर का संदेश
डिनर में गैर-मौजूदगी के इतर, भारत मंडपम में दिन भर दोनों नेताओं के बीच गजब का कूटनीतिक सामंजस्य दिखा:
शी जिनपिंग के आगमन पर प्रधानमंत्री मोदी ने गर्मजोशी से हाथ मिलाकर उनका स्वागत किया।
स्वागत मंच की पृष्ठभूमि में तमिलनाडु के ऐतिहासिक रामनाथस्वामी मंदिर के सुप्रसिद्ध विशाल गलियारे की तस्वीर सजी थी। पीएम मोदी ने जिनपिंग को मंदिर की अद्भुत द्रविड़ स्थापत्य कला और भारत के आध्यात्मिक दर्शन की बारीकियों से रूबरू कराया।
इसके उपरांत दोनों नेताओं के बीच एकांत में भी गंभीर द्विपक्षीय बातचीत हुई, जिसकी तस्वीरों ने दुनिया भर के मीडिया का ध्यान खींचा।
विदेश मंत्रालय के आधिकारिक बयान के अनुसार, दोनों नेताओं ने सीमा विवादों और मतभेदों को पीछे छोड़ते हुए संबंधों में एक रणनीतिक और दीर्घकालिक नजरिया अपनाने पर स्पष्ट सहमति जताई है। गलवान घाटी के खूनी संघर्ष के बाद से दोनों महाशक्तियों के बीच गहराए अविश्वास को पाटने के लिए पिछले कुछ वर्षों से कूटनीतिक चैनल सक्रिय थे। ब्रिक्स के पहले ही दिन सामने आए इस अभूतपूर्व संवाद और मोदी की मानवीय संवेदनशीलता ने स्पष्ट कर दिया है कि नई दिल्ली और बीजिंग अब पुराने तनाव के साये से बाहर निकलकर रिश्तों को स्थायी स्थिरता देने के ठोस रास्ते पर आगे बढ़ चुके हैं।

