वरिष्ठ पत्रकार भेषज की विशेष ग्राउंड रिपोर्ट
कांगड़ा (पंजाब दस्तक): ‘हाथी के दांत खाने के और, दिखाने के और’—कांगड़ा के विकास के दावों की असल हकीकत आज यही बनकर रह गई है। मंचों से जुमलों की बौछार करने और सरकारी जलसों में धाम खिलाने से जनता की तकदीर नहीं बदलती; विकास कागजों में नहीं, जमीन पर दिखना चाहिए। यह सीधा और तीखा हमला भाजपा युवा नेता राजेश परियाल ने प्रदेश सरकार और स्थानीय नेतृत्व पर बोला है।
परियाल ने नीति वाक्य का हवाला देते हुए सरकार को आईना दिखाया:
उद्यमेन हि सिध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः।
न हि सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति मुखे मृगाः॥
(अर्थात: कोई भी कार्य केवल मन के ख्याली पुलाव या खोखली घोषणाओं से सिद्ध नहीं होता, उसके लिए धरातल पर कठोर परिश्रम करना पड़ता है। सोए हुए शेर के मुंह में हिरण खुद चलकर नहीं आता।)
राजेश परियाल ने जनहित से जुड़े गंभीर मुद्दों पर सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए तीखे सवाल दागे:
महिला मंडलों से 3 साल का छल: पिछले तीन वर्षों से महिला मंडलों को ₹20,000 देने की घोषणा का ढोल पीटा जा रहा है। परियाल ने पूछा कि यह राशि अब तक महिलाओं के खातों में क्यों नहीं पहुंची? कागजी घोषणाओं से चूल्हा नहीं जलता, सरकार स्थिति स्पष्ट करे।
धाम और तमाशों से नहीं संवरेगा भविष्य: जनता के पैसों से बड़े-बड़े जलसे आयोजित करने और धाम परोसने से इलाके की तस्वीर नहीं बदलती। माताओं-बहनों के सम्मान की बात करने वाले जनप्रतिनिधि पहले उनके बच्चों के रोजगार और भविष्य की सुध लें।
सालाना 5,000 नौकरियों का दावा हवा-हवाई: चुनावों के दौरान युवाओं को हर साल 5,000 रोजगार देने की बात कही गई थी। आज कांगड़ा का युवा डिग्रियां हाथ में लेकर ‘दर-दर की ठोकरें’ खाने को मजबूर है। सरकार बताए कि रोजगार की वह ठोस योजना कहां गुम हो गई?
एयरपोर्ट विस्तार: आशियाने उजाड़ना विकास नहीं: हवाई अड्डा विस्तार की आड़ में सैकड़ों परिवारों के पुश्तैनी आशियाने और उपजाऊ जमीनें छिनने की कगार पर हैं। विकास का अर्थ स्थानीय बाशिंदों को बेघर करना नहीं हो सकता। सरकार विस्थापितों के लिए सम्मानजनक पुनर्वास और उचित मुआवजे की पारदर्शी नीति तत्काल पटल पर रखे।
NHAI के निर्माण से जनता बेहाल: राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की लचर कार्यप्रणाली के कारण उड़ती धूल, लंबे जाम और खस्ताहाल रास्तों ने आम जनजीवन नरक बना दिया है। बेहतर संपर्क मार्ग के साथ सुरक्षित और सुगम आवागमन सुनिश्चित करना भी प्रशासन का पहला दायित्व है।
10-15 किमी पर भी टोल वसूली, जनता की जेब पर डाका: स्थानीय धार्मिक स्थलों और आसपास के मात्र 10-15 किलोमीटर के सफर पर भी टोल टैक्स वसूला जा रहा है, जो स्थानीय जनता की जेब पर सीधा डाका है। केंद्र में भाजपा की सरकार है, ऐसे में स्थानीय जनता को इस बेतुके टोल से तुरंत राहत मिलनी चाहिए। कम दूरी के सफर पर ‘जबरन वसूली’ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं होगी।
राजेश परियाल ने दो टूक चेतावनी दी कि महिला मंडलों की आर्थिक मदद, युवाओं के रोजगार, एयरपोर्ट विस्थापितों के पुनर्वास और टोल की लूट पर सरकार को जवाब देना ही होगा। कांगड़ा का सच्चा विकास वही है, जिसका लाभ अंतिम पंक्ति में खड़े युवा, महिला, बुजुर्ग और प्रभावित परिवार तक पहुंचे।
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