शिमला (मीनाक्षी): हिमाचल प्रदेश की सियासत से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। राजधानी शिमला के जिला परिषद चुनाव में सत्ताधारी कांग्रेस को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा है। प्रदेश में सरकार होने के बावजूद कांग्रेस अपने ही गढ़ में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष दोनों पदों पर चुनाव हार गई, जबकि भारतीय जनता पार्टी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए परिषद की सत्ता पर कब्जा जमा लिया है।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू अभी दिल्ली दौरे से शिमला लौटे ही थे कि उन्हें इस बड़े सियासी झटके की खबर मिली।
वीरवार को बचत भवन में हुआ कड़ा मुकाबला
शिमला के बचत भवन में आयोजित चुनावी प्रक्रिया में भाजपा ने पूरी रणनीति के साथ मैदान संभाला:
अध्यक्ष पद: भाजपा ने वार्ड नंबर-14 (चंदोल) से भूपेंद्र को प्रत्याशी बनाया, जिन्होंने शानदार जीत हासिल की। उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार सुरेंद्र रेटका को पराजित किया।
उपाध्यक्ष पद: भाजपा के वार्ड नंबर-9 से भारत सिंह कलानटा ने जीत का परचम लहराया। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी को मात दी।
हाईकोर्ट तक पहुंचा था चुनाव टालने का विवाद
गौरतलब है कि शिमला जिला परिषद के इस चुनाव को लेकर लंबा सियासी घमासान चला था। कांग्रेस सरकार पर चुनाव को लगातार टालने के गंभीर आरोप लगे थे, जिसके बाद यह मामला हाईकोर्ट तक भी पहुंचा था। आज जब चुनाव संपन्न हुए, तो नतीजों ने सत्ताधारी दल के दावों की हवा निकाल दी। इतिहास में पहली बार भाजपा ने शिमला जिला परिषद पर जीत हासिल की है, जहां दशकों से कांग्रेस का वर्चस्व माना जाता था।
भगवा रंग में रंगा शिमला, जमकर लगे नारे
नतीजों का ऐलान होते ही बचत भवन के बाहर भाजपा कार्यकर्ताओं का हुजूम उमड़ पड़ा। ढोल-नगाड़ों की थाप पर जश्न शुरू हो गया और पूरा शहर ‘भारतीय जनता पार्टी जिंदाबाद’ और ‘नरेंद्र मोदी जिंदाबाद’ के नारों से गूंज उठा।
इस जीत के ऐतिहासिक मौके पर भाजपा के दोनों राज्यसभा सांसद हर्ष महाजन और डॉ. सिकंदर कुमार, चौपाल के विधायक बलवीर वर्मा, पार्टी के कई पूर्व मंत्री, विधायक और वरिष्ठ नेता कार्यकर्ताओं के साथ जश्न में शामिल हुए। नेताओं ने इसे कांग्रेस सरकार की नीतियों के खिलाफ जनता और जनप्रतिनिधियों का जनादेश करार दिया।
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