हिमाचल में ड्रोन से डाक और पार्सल डिलीवरी का ट्रायल

आसमान में ड्रोन, जमीन पर सवाल: हिमाचल में डाक विभाग का डिजिटल ट्रायल सफल, लेकिन नौजवानों के रोजगार का क्या?

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​पंजाब दस्तक ब्यूरो
रिपोर्ट: उमांश


​शिमला/मंडी: हिमाचल प्रदेश के दुर्गम पहाड़ों में अब वह दिन दूर नहीं जब डाकिया नहीं, बल्कि आसमान में उड़ता हुआ ड्रोन डाक और पार्सल लेकर पहुंचेगा। डाक विभाग ने मंडी और शिमला जिलों में पोस्ट ऑफिस ब्रांचों तक ड्रोन से डाक व पार्सल पहुंचाने का सफल ट्रायल पूरा कर लिया है। आधुनिक तकनीक से घंटों का सफर चंद मिनटों में तो सिमट गया है, लेकिन इस डिजिटल रफ्तार ने एक बड़ा और गंभीर सवाल भी खड़ा कर दिया है—अगर सारा काम ड्रोन और रोबोट ही करेंगे, तो हमारे बेरोजगार नौजवान कहां जाएंगे और उन्हें रोजगार कैसे मिलेगा?


​मंडी और शिमला में सफल ट्रायल: दिन भर का काम अब 7 से 15 मिनट में
​पहाड़ों के जिन दुर्गम रास्तों पर डाक और जरूरी पार्सल पहुंचाने में पहले पूरा-पूरा दिन लग जाता था, वही काम अब ड्रोन तकनीक की बदौलत मात्र 7 से 15 मिनट के भीतर पूरा किया जा रहा है।
​वजन क्षमता व रेंज: इन ड्रोन के जरिए 7 से 10 किलोग्राम तक के डाक पार्सल एक पोस्ट ऑफिस से दूसरे पोस्ट ऑफिस तक भेजे जा रहे हैं। डाक विभाग द्वारा उड़ाए जा रहे इन ड्रोन की रेंज 5 से 80 किलोमीटर तक है।
​संचालन व लागत: उड़ान और लैंडिंग दोनों सिरों पर ऑपरेटर तैनात रहते हैं। डाक सेवा में लगे एक ड्रोन का मासिक किराया करीब ₹17,000 है। सुरक्षा के मद्देनजर भारी बारिश और खराब मौसम के दौरान फिलहाल इन ड्रोन को नहीं उड़ाया जाता।


​110 स्थानों पर विस्तार की तैयारी: मंडी में ट्रायल के आधार पर 4 ड्रोन उड़ाए गए थे, जिनका अब नियमित डाक सेवा के लिए उपयोग किया जा रहा है। प्रदेश भर में कुल लगभग 110 रूट्स एवं लोकेशनों पर यह सेवा शुरू करने की योजना है। मंडी डाक मंडल के अधीक्षक संजय के अनुसार, जिले में जल्द ही 30 अन्य लोकेशनों पर यह सेवा शुरू की जाएगी और मंडी के 30 सब-पोस्ट ऑफिसों तक डाक पहुंचाने की कवायद तेज कर दी गई है।


​यहां से भरी जा रही है उड़ान:
​मंडी जिला: मंडी प्रधान डाकघर से रेहड़धार, पदीहूं, रंधाड़ा, अलाथू, तिल्ली, मंजबाड़ और जोगिंद्रनगर से बियूं तक ड्रोन नियमित उड़ान भर रहे हैं। इन स्थानों की दूरी हेड ऑफिस से 9 से 15 किलोमीटर तक है।
​शिमला जिला: हाटकोटी सब-पोस्ट ऑफिस से कठासू, एंटी, झराग और नंदपुर शाखा डाकघरों तक ड्रोन डाक सेवा संचालित की जा रही है।


​डिजिटल भारत बनाम रोजगार का संकट: नौजवान कहां जाएं?
​तकनीकी विकास और ‘डिजिटल इंडिया’ की यह तस्वीर सराहनीय तो है, लेकिन सिक्के का दूसरा पहलू बेहद चिंताजनक है। सरकारी सेवाओं और डाक जैसे महकमों में मिलने वाले फील्ड और क्लर्कियल रोजगार अब आधुनिक मशीनों, रोबोटिक्स और ड्रोन के हवाले होते जा रहे हैं।
​घटते रोजगार के अवसर: ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी नौकरियां हमेशा से युवाओं का बड़ा सहारा रही हैं। अगर डाक वितरण जैसे पारंपरिक कार्य भी पूरी तरह ऑटोमेटेड हो गए, तो सामान्य पृष्ठभूमि के युवाओं के लिए अवसरों का दायरा और सिकुड़ जाएगा।
​डिग्रियों के बाद भी अनिश्चितता: युवा तकनीकी और सामान्य शिक्षा पूरी करने के बाद नौकरियों की तलाश में भटक रहे हैं, लेकिन बाजार में मैनपावर की जगह ऑटोमेशन पैर पसार रहा है।


​समाधान: ग्रामीण पर्यटन हब और युवाओं के लिए नई नीतियां जरूरी
​तकनीकी बदलाव को नकारा नहीं जा सकता, लेकिन सरकारों को संतुलन साधने के लिए ठोस और नई नीतियां बनानी होंगी:
​गांव-गांव में बने टूरिज्म हब: हिमाचल प्रदेश में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। सरकार को चाहिए कि ग्रामीण इलाकों में ‘टूरिज्म हब’ विकसित करे। गांवों में होमस्टे, गाइडिंग, साहसिक खेल और स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग से युवाओं को घर-द्वार पर स्थायी रोजगार के अवसर मिल सकते हैं।


​कौशल और आधुनिक नीतियों का तालमेल: युवाओं को महज परंपरागत शिक्षा तक सीमित न रखकर उन्हें ड्रोन तकनीक, डेटा हैंडलिंग, मरम्मत और आधुनिक स्किल से जोड़ा जाए, ताकि वे तकनीक से विस्थापित होने के बजाय उसके नियंत्रक और संचालक बन सकें।
​डिजिटल रफ्तार और ड्रोन तकनीक पहाड़ी इलाकों में सेवाओं को तेज जरूर बना सकती है, लेकिन जब तक पढ़े-लिखे बेरोजगार युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने की ठोस रणनीति नहीं बनेगी, तब तक यह विकास अधूरा ही रहेगा।


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