सुरेंद्र राणा, ब्यूरो चीफ, पंजाब दस्तक
शिमला: हिमाचल प्रदेश विधानसभा के भीतर भाजपा के वरिष्ठ विधायक सतपाल सत्ती ने एक बार फिर अपने चिर-परिचित बेबाक और फ्रंट-फुट अंदाज में सदन को हिलाकर रख दिया। अपने आक्रामक और तार्किक तेवर के लिए पहचाने जाने वाले सत्ती ने सीधे तौर पर प्रदेश की सियासत और सोशल मीडिया पर गिरते विमर्श के स्तर पर तीखा हमला बोला।
सदन के भीतर सतपाल सत्ती के भाषण के प्रमुख और तीखे बिंदु:
लोकतंत्र का श्रृंगार है आंदोलन, अराजकता नहीं: सत्ती ने साफ लफ्जों में कहा कि लोकतंत्र में आंदोलन, धरने और विरोध प्रदर्शन करना सबका अधिकार है। यह लोकतंत्र की सुंदरता और उसका आभूषण है। लेकिन विरोध की भी एक लक्ष्मण रेखा होती है। विरोध का यह तरीका बिल्कुल गलत है कि लोग नेताओं के घरों के बाहर जाकर पुतले फूंकने लगें और उनके परिवारों को निशाना बनाएं।
घर-आंगन और रिश्तेदारों तक पहुंची गंदी सियासत: सत्ती ने तंज कसते हुए कहा कि आज विरोध का स्तर इतना गिर चुका है कि नेताओं के घर आने वाले रिश्तेदारों, मौसी या परिवार के अन्य सदस्यों तक को घसीटकर उनके खिलाफ अभद्र नारेबाजी की जाती है। राजनीति और विरोध को किसी के घर की चौखट तक ले जाना सरासर गलत है।
आपके लिए मोदी सही, तो उनके लिए राहुल-सोनिया: सदन में दोनों पक्षों को आईना दिखाते हुए सत्ती ने कहा कि जिस तरह भाजपा के कार्यकर्ताओं और नेताओं के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी आदरणीय और सही हैं, उसी तरह कांग्रेसियों के लिए सोनिया गांधी और राहुल गांधी जी का मान-सम्मान है। हर कार्यकर्ता को अपने नेता के प्रति निष्ठा रखने का हक है, लेकिन इसके नाम पर सोशल मीडिया पर नेताओं और उनके परिवारों का व्यक्तिगत चरित्र हनन (कैरेक्टर असैसिनेशन) करना बेहद निंदनीय है।
दूसरों पर उंगली उठाने से पहले गिरेबान में झांकें: सत्ती ने दो-टूक कहा कि सोशल मीडिया पर दूसरों के चरित्र पर कीचड़ उछालने से पहले लोगों को अपना आचरण देखना चाहिए। वैचारिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन निजी जीवन और परिवार पर ओछे वार किसी भी सूरत में बर्दाश्त के काबिल नहीं हैं।
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