ब्यूरो चीफ, सुरेंद्र राणा
शिमला (चौड़ा मैदान):
हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बाहर ऐतिहासिक चौड़ा मैदान में मंगलवार (1 सितंबर) को पेंशनरों का ऐसा अभूतपूर्व, विराट और ऐतिहासिक जनसैलाब उमड़ा जिसने राजधानी की पूरी प्रशासनिक व्यवस्था को हिलाकर रख दिया। प्रदेश के सभी 12 जिलों से पहुंचे हजारों सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने सरकार की वादाखिलाफी के खिलाफ प्रचंड हुंकार भरी। बिजली बोर्ड, पथ परिवहन निगम (HRTC), लोक निर्माण (PWD), शिक्षा, स्वास्थ्य, वन और सिंचाई सहित हर सेक्टर के 18 पेंशनर संगठनों ने एक जाजम पर आकर अपनी चट्टानी एकजुटता का प्रदर्शन किया।
दुष्यंत कुमार की मशहूर पंक्तियों को याद करते हुए मंच से गूंज उठी आवाज—
”सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं,
मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए।
मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही,
हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए।”
लाठियों के सहारे चलकर 80 वर्ष से भी अधिक आयु के बुजुर्ग पेंशनर दूर-दराज के दुर्गम क्षेत्रों—चंबा, कांगड़ा, कुल्लू, किन्नौर, सिरमौर और लाहौल-स्पीति से पिछले कल शाम 5 बजे से लगातार लंबा और कष्टदायी सफर तय करके राजधानी पहुंचे थे। चौड़ा मैदान में उमड़ा यह ऐतिहासिक हुजूम साफ बता रहा था कि बुजुर्गों के सब्र का बांध अब पूरी तरह टूट चुका है।
बुजुर्गों के त्याग को नमन, देवभूमि के आशीर्वाद से सफल हुआ आंदोलन
18 पेंशनर संगठनों के संयुक्त मोर्चा के चेयरमैन सुरेश ठाकुर ने विशाल जनसमूह को संबोधित करते हुए भावुक अंदाज में कहा कि इतनी भीषण कठिनाइयों और लंबी यात्रा के बावजूद 80 पार कर चुके बुजुर्गों का यह जोश और जुनून ऐतिहासिक है। उन्होंने पेंशनर भाइयों-बहनों को शीश झुकाकर नमन करते हुए कहा कि वे उनके इस अदम्य साहस और जज्बे को दिल से सलाम करते हैं। उन्होंने कहा, “आज का यह विशाल जमावड़ा और ऐतिहासिक शक्ति प्रदर्शन कुल देवता और ईश्वर की असीम कृपा से ही संभव हुआ है। भगवान की पूरी मेहरबानी रही है कि प्रदेश भर से हमारे बुजुर्ग साथी सकुशल शिमला पहुंचे और अपने हक की आवाज को इतनी बुलंदी दी।”
समझौते से मुकरी सरकार: 30 जुलाई की मियाद बीती, फूटा पेंशनरों का गुस्सा
सुरेश ठाकुर ने सरकार पर गंभीर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए आंदोलन के पूरे घटनाक्रम को विस्तार से रखा। उन्होंने कहा कि यह पेंशनरों का तीसरा बड़ा चरणबद्ध आंदोलन है:
पहला चरण (28 जनवरी 2025): धर्मशाला के तपोवन में 15 हजार से अधिक पेंशनरों का ऐतिहासिक शक्ति प्रदर्शन हुआ था।
दूसरा चरण (30 मार्च 2026): शिमला में विधानसभा घेराव के दौरान सरकार हरकत में आई और मुख्यमंत्री ने वार्ता के लिए आमंत्रित किया।
सुरेश ठाकुर ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री के साथ तमाम कर्मचारी नेताओं की मौजूदगी में सौहार्दपूर्ण माहौल में यह सहमति बनी थी कि 1 जनवरी 2016 से 31 दिसंबर 2022 के बीच सेवानिवृत्त हुए सभी कर्मचारियों की लीव इनकैशमेंट, ग्रेच्युटी और संशोधित पेंशन के बकाये का 40 प्रतिशत भुगतान हर हाल में 30 जुलाई 2026 से पहले कर दिया जाएगा। लेकिन अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक है कि 30 जुलाई की समय-सीमा बीते हुए लंबा वक्त निकल गया, फिर भी सरकार ने अपना वादा पूरा नहीं किया और बुजुर्गों को सिर्फ तारीखों के धोखे में रखा।
’फूट डालो और राज करो’ की नीति पर तीखा प्रहार
सुरेश ठाकुर ने तीखे तेवर अपनाते हुए कहा कि समझौते के अनुसार भुगतान करने के बजाय सरकार ने 18 अगस्त को एक नई अधिसूचना जारी कर पेंशनरों के बीच फूट डालने का प्रयास किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले उम्र के स्लैब (65, 70, 75 और 80 वर्ष) बनाकर 15%, 20%, 30% और 35% भुगतान का वर्गीकरण किया गया और अब क्लास-1, क्लास-2, क्लास-3 व क्लास-4 की श्रेणियों में बांटने की साजिश रची जा रही है।
सुरेश ठाकुर ने दो-टूक ऐलान किया कि जिन 70-75 वर्ष से ऊपर के साथियों को कुछ आंशिक राशि मिली भी है, वे भी सरकार की इस बांटने वाली नीति के झांसे में नहीं आए हैं। वे सभी साथी आज पूरी मजबूती और एकजुटता के साथ चौड़ा मैदान में डटे हुए हैं। यह लड़ाई किसी एक वर्ग या उम्र की नहीं, बल्कि हर उस सेवानिवृत्त कर्मचारी के हक और स्वाभिमान की है जिसकी जिंदगी भर की कमाई पर रोक लगाई गई है।
अब बातों से नहीं बनेगा काम, आर-पार का होगा संग्राम
संबोधन के अंत में सुरेश ठाकुर ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अब समय आ गया है जब सरकार को कोरे आश्वासनों और टालमटोल की राजनीति छोड़नी होगी। अब कोरी बातों से बात बनने वाली नहीं है। पेंशनरों का तय कार्यक्रम और संघर्ष अब किसी भी सूरत में रुकने वाला नहीं है। सभी 18 संगठनों के संयुक्त नेतृत्व ने एक स्वर में ऐलान किया कि यदि सरकार ने संशोधित पेंशन, एरियर, ग्रेच्युटी और लीव इनकैशमेंट के समस्त बकाये का त्वरित और एकमुश्त भुगतान नहीं किया, तो यह आंदोलन सचिवालय से लेकर प्रदेश के कोने-कोने तक और अधिक उग्र रूप अख्तियार करेगा।
चौड़ा मैदान शिमला से सीधा प्रसारण:
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