पंजाब दस्तक
ग्राउंड रिपोर्ट: काजल, वरिष्ठ पत्रकार (ऊना)
पंजाब दस्तक ब्यूरो, शिमला / ऊना
पूर्व MLA चैतन्य शर्मा पर ठेका दिलाने के नाम पर ₹8 लाख ऐंठने का आरोप; धारा 17A के तहत अभियोजन स्वीकृति के लिए भेजा प्रस्ताव
ऊना / शिमला:
हिमाचल प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी भूचाल आ गया है। कांग्रेस का ‘हाथ’ छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का ‘कमल’ थामने वाले नेताओं की मुश्किलें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। प्रदेश में धर्मशाला के विधायक सुधीर शर्मा और देहरा के पूर्व विधायक होशियार सिंह के बाद अब एक और दिग्गज भाजपा नेता विजिलेंस के सीधे निशाने पर आ गए हैं।
इस बार विजिलेंस के रडार पर गगरेट के पूर्व विधायक चैतन्य शर्मा हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, लोक निर्माण विभाग (PWD) के सरकारी ठेके दिलाने के नाम पर ₹8 लाख के कथित लेन-देन के मामले में विजिलेंस ने चैतन्य शर्मा के खिलाफ शिकंजा कस दिया है। विजिलेंस ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) की धारा 17A के तहत मामला दर्ज करने और अभियोजन स्वीकृति (Prosecution Sanction) के लिए सक्षम प्राधिकारी को औपचारिक प्रस्ताव भेज दिया है।
सरकारी ठेका दिलाने के नाम पर ₹8 लाख का आरोप
ऊना के एक स्थानीय सरकारी ठेकेदार की शिकायत पर यह पूरी कार्रवाई शुरू हुई है। शिकायत में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा गया है कि वर्ष 2024 में लोक निर्माण विभाग के सरकारी टेंडर दिलाने के नाम पर ₹8 लाख की मांग की गई थी।
लेन-देन का ब्योरा: शिकायतकर्ता का दावा है कि ₹6 लाख बैंक ट्रांसफर के जरिए दिए गए, जबकि ₹2 लाख नकद चुकाए गए थे।
धोखाधड़ी का दावा: आरोप है कि पूरी रकम वसूलने के बावजूद न तो ठेकेदार को कोई सरकारी टेंडर दिलाया गया और न ही उसके पैसे वापस लौटाए गए।
जयराम ठाकुर ने भी दिए थे कार्रवाई के संकेत
हाल ही में शिमला में कांग्रेस सरकार के खिलाफ भाजपा की विशाल रैली के बाद नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने भी मीडिया के सामने संकेत दिए थे कि सरकार चैतन्य शर्मा के खिलाफ विजिलेंस कार्रवाई की तैयारी कर रही है। नेता प्रतिपक्ष के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में यह मामला और ज्यादा तूल पकड़ गया है।
चैतन्य शर्मा बोले— “यह पूरी तरह राजनीतिक साजिश”
दूसरी ओर, पूर्व विधायक चैतन्य शर्मा ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने इसे प्रदेश सरकार की राजनीतिक दुर्भावना और साजिश करार दिया है। उनका कहना है कि उपचुनाव हारने के बाद उन्हें राजनीतिक रूप से निशाना बनाने की कोशिश की जा रही है।
राज्यसभा चुनाव से शुरू हुआ था यह सियासी घटनाक्रम
गौरतलब है कि वर्ष 2024 के राज्यसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस के 6 विधायकों ने पार्टी लाइन से हटकर भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की थी। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने उनकी सदस्यता रद्द कर दी थी। बाद में ये सभी नेता भाजपा में शामिल हो गए।
इसके बाद हुए उपचुनावों में:
सुधीर शर्मा (धर्मशाला) चुनाव जीतकर दोबारा विधानसभा पहुंचने में सफल रहे।
चैतन्य शर्मा (गगरेट) को उपचुनाव में हार का सामना करना पड़ा।
अब विजिलेंस द्वारा एक-एक कर इन नेताओं पर कसते शिकंजे से प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज होना तय है।
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