मोहाली में NABI के पास 8 साल से अधूरा मौली पुल

8 साल से अटका नाबी (NABI) इंस्टीट्यूट के पास का मौली पुल: 200 मीटर के विवाद में फंसी हजारों परिवारों की ‘सहूलियत’, भाजपा प्रदेश प्रवक्ता हरदेव उभा और पार्षद गुरप्रीत कौर ने उठाए गंभीर सवाल

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​पंजाब दस्तक | रिपोर्ट: ब्यूरो चीफ सुरेंद्र राणा
​करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी जनता सहूलियत को तरसी; 2 बार टूटा पुल, विजिलेंस जांच और विधानसभा सत्र में मुद्दा उठाने की मांग
​मोहाली:
सरकारी तंत्र की घोर लापरवाही और प्रशासनिक ढुलमूल रवैये का इससे बड़ा उदाहरण क्या होगा कि नेशनल एग्री-फूड बायोटेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट (NABI) के पास स्थित अति-महत्वपूर्ण ‘मौली पुल’ पिछले 7-8 वर्षों से अधर में लटका हुआ है। यह पुल सेक्टर 66, 67 से सेक्टर 80, 81 होते हुए वेव स्टेट (सेक्टर 84, 85) और मौली गाँव को आपस में जोड़ता है, जिससे सीधा एयरपोर्ट रोड, चंडीगढ़ के मध्य मार्ग और बनूर-लांडरा रोड की दूरी घटती है।


​इस बेहद महत्वपूर्ण परियोजना पर सरकार के करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद आज तक जनता को इसका कोई लाभ नहीं मिल सका है। मुख्य सड़क का ढांचा तो बनकर तैयार है, लेकिन महज 200 मीटर के एक विवादित टुकड़े के कारण यह पुल सफेद हाथी बना हुआ है, जिससे हजारों शहरवासी रोजाना ट्रैफिक की मार झेलने को मजबूर हैं।


​जनहित के इस ज्वलंत मुद्दे पर पंजाब दस्तक द्वारा लगातार चलाई जा रही खोजी मुहिम का बड़ा असर देखने को मिला है। पंजाब दस्तक की Ground Report के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पंजाब के स्टेट प्रेस सचिव एवं वरिष्ठ प्रदेश प्रवक्ता हरदेव सिंह उभा ने सेक्टर 41 की पार्षद गुरप्रीत कौर उभा के साथ नाबी के पास स्थित इस अधूरे पुल का मुआयना किया और सरकार व गमाडा (GMADA) प्रशासन के रवैये पर कड़े सवाल खड़े किए।


​करोड़ों रुपये स्वाहा, फिर भी जनता सहूलियत से महरूम
​नाबी के पास अधूरे पड़े मौली पुल पर पंजाब दस्तक से विशेष बातचीत करते हुए भाजपा प्रवक्ता हरदेव सिंह उभा और पार्षद गुरप्रीत कौर उभा ने कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा:
​”करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी यदि 7-8 सालों से जनता को वह सहूलियत और सीधी कनेक्टिविटी नहीं मिल पा रही है जिसकी वे हकदार हैं, तो यह सीधे तौर पर प्रशासनिक नाकामी है। सेक्टर 66, 67, 80, 81, 84, 85, वेव स्टेट और मौली गाँव के हजारों-हजारों निवासियों का रोजाना का आवागमन नारकीय बना हुआ है। लोग बिना किसी वजह के कई किलोमीटर लंबा चक्कर लगाने को मजबूर हैं, जिससे उनके समय, पैसे और ईंधन का भारी नुकसान हो रहा है।”


​देश-विदेश से आने वाले वैज्ञानिकों और छात्रों को भी परेशानी
​हरदेव उभा ने आगे उजागर किया कि इस पुल के ठीक पास स्थित नाबी (NABI) एक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय अनुसंधान संस्थान है, जहाँ देश-विदेश से बड़े-बड़े वैज्ञानिक, शोधकर्ता और छात्र प्रतिदिन आते हैं। महज 200 मीटर सड़क का निर्माण न होने से यहाँ आने-जाने वाले वैज्ञानिकों और छात्रों को भी भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है, जो शहर के बुनियादी ढाँचे और प्रशासनिक व्यवस्था पर एक गंभीर सवाल खड़ा करता है।
​देखरेख के अभाव में 2 बार टूटा नाबी के पास का पुल, विजिलेंस जांच की मांग


​उभा ने गंभीर आरोप लगाते हुए खुलासा किया कि प्रशासनिक देखरेख की कमी और घटिया निर्माण के कारण नाबी के पास का यह अधूरा मौली पुल अब तक दो बार टूट चुका है। सरकारी खजाने के करोड़ों रुपये और जनता के टैक्स का पैसा भ्रष्टाचार व लापरवाही की भेंट चढ़ गया है। उन्होंने मांग की कि इस पूरे मामले की समयबद्ध (Time-bound) विजिलेंस जांच कराई जाए और दोषी अधिकारियों व ठेकेदारों पर तुरंत सख्त कानूनी कार्रवाई हो।


​”अगर कोई अड़चन या झगड़ा है, तो तुरंत निपटाए प्रशासन!”
​नाबी के पास पुल के इस 200 मीटर के पैच पर बात करते हुए हरदेव उभा ने कहा:
​”अगर इस 200 मीटर के दायरे को लेकर कोई कानूनी पेच, राजस्व अड़चन या आपसी झगड़ा है, तो गमाडा और प्रशासन उसे जनता के सामने लाए और युद्ध स्तर पर दूर करे। 8 साल का समय किसी विवाद को सुलझाने के लिए कम नहीं होता। अधिकारी तत्काल इस 200 मीटर के झगड़े का समाधान कर पुल का शेष निर्माण पूरा करवाएं।”


​विधायक कुलवंत सिंह विधानसभा में मुख्यमंत्री और PWD मंत्री पर बनाएं दबाव: उभा
​उभा और पार्षद गुरप्रीत कौर उभा ने स्थानीय विधायक सरदार कुलवंत सिंह से पुरजोर मांग करते हुए कहा:
​”स्थानीय विधायक अपने चुनावी वादे को याद करें और आगामी विधानसभा सत्र के दौरान ‘क्वेश्चन अवर’ (प्रश्नकाल) तथा ‘जीरो अवर’ (शून्यकाल) में इस मुद्दे को पूरे जोर-शोर से उठाएं। विधायक महोदय विधानसभा के भीतर माननीय मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान और PWD मंत्री पर सीधा दबाव बनाएं ताकि इस 200 मीटर के विवादित पैच की अड़चन तुरंत दूर हो सके। जनप्रतिनिधि जब तक इस मुद्दे को विधानसभा में कड़ाई से नहीं उठाएंगे, तब तक लाखों लोगों को राहत नहीं मिल पाएगी।”


​इसके साथ ही उन्होंने सांसद मालविंदर सिंह कंग (आप) से भी अपील की कि वे गमाडा और राज्य सरकार के अधिकारियों से बात कर इस प्रोजेक्ट को जल्द से जल्द शुरू करवाएं।


​”निर्णायक मोड़ पर खड़ा है मामला, जल्द पूरा किया जाए काम”
​हरदेव सिंह उभा ने अंत में कहा कि अब यह मामला अत्यंत संवेदनशील और निर्णायक मोड़ पर आ चुका है। क्षेत्र के निवासी अब इस अड़चन से पूरी तरह परेशान हो चुके हैं और जल्द से जल्द इसका स्थायी समाधान चाहते हैं। सरकार और गमाडा को बिना किसी और देरी के इस पुल के कार्य को युद्ध स्तर पर पूरा कर लाखों लोगों को बड़ी राहत देनी चाहिए।

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