विशेष ग्राउंड रिपोर्ट: पंजाब दस्तक टीम
विशेष रिपोर्ट: नेहा अग्रवाल (वरिष्ठ पत्रकार) एवं सिद्धार्थ शर्मा (वरिष्ठ पत्रकार, दिल्ली ब्यूरो)
नई दिल्ली:NEET-UG 2026 परीक्षा में हुई कथित धांधली, paper लीक और देश की शिक्षा व्यवस्था में फैले भ्रष्टाचार के खिलाफ जारी आंदोलन अब देश की सबसे बड़ी राजनीतिक जंग में तब्दील हो चुका है। राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 18 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे प्रख्यात शिक्षाविद और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की सेहत बेहद नाजुक मोड़ पर पहुंच गई है। 28 जून 2026 से अनशन पर बैठे वांगचुक अब पूरी तरह बिस्तर से चिपक गए हैं, उनका वजन तेजी से गिरा है और लगातार होते शारीरिक नुकसान के बावजूद उनके हौसले फौलादी हैं।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और जवाबदेही की मांग पर अड़े वांगचुक ने आगामी 20 जुलाई को देशव्यापी ‘चलो संसद’ मार्च का ऐतिहासिक आह्वान कर दिया है, जिसे ‘काकरोच जनता पार्टी’ (CJP) का भी पूरा समर्थन मिल रहा है।
आगामी मानसून सत्र पर संकट के बादल: ठप होने के कगार पर संसद?
इस आंदोलन की टाइमिंग ने देश के सियासी गलियारों में भारी खलबली मचा दी है। देश में सोमवार से संसद का मानसून सत्र शुरू होने वाला है, और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विपक्ष को सरकार को घेरने के लिए बैठे-बिठाए ब्रह्मास्त्र मिल गए हैं। एक तरफ जहां अयोध्या का राम मंदिर चंदा चोरी का संवेदनशील मामला पहले से ही सुलग रहा है, वहीं दूसरी तरफ नीट परीक्षा में करोड़ों बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ का यह महा-मुद्दा जुड़ गया है।
अब यह साफ नजर आ रहा है कि विपक्ष इन दोनों बड़े मुद्दों को लेकर मानसून सत्र में सरकार पर चौतरफा हमला बोलेगा। आशंका जताई जा रही है कि वांगचुक के ‘चलो संसद’ मार्च और विपक्ष के भारी हंगामे के चलते आगामी मानसून सत्र पूरी तरह से विरोध की भेंट चढ़ सकता है और संसद की कार्यवाही ठप हो सकती है।
”करे कोई, भरे कोई” का खेल: लद्दाख के पुराने वादे और सियासी चश्मा
सोनम वांगचुक के इस कड़े रुख के पीछे लद्दाख के अधिकारों (छठी अनुसूची) को लेकर केंद्र सरकार से चल रही उनकी पुरानी वैचारिक और राजनीतिक तनातनी को भी मुख्य वजह माना जा रहा है। यही कारण है कि इस आंदोलन को राजनीतिक चश्मे से भी देखा जा रहा है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि परीक्षा प्रणाली की इस पूरी हेराफेरी में “करे कोई और भरे कोई” वाली स्थिति बनी हुई है। चंद भ्रष्ट अधिकारियों और पेपर माफियाओं की करतूतों का खामियाजा देश के लाखों ईमानदार छात्रों और उनके माता-पिता को भुगतना पड़ रहा है। आम जनता का स्पष्ट मानना है कि सिर्फ बयानों से काम नहीं चलेगा, बल्कि इस पूरी परीक्षा प्रणाली में एक बहुत बड़े और अमूल-चूल सुधार की तुरंत जरूरत है।
”जनता की जवाबदेही के लिए नहीं तोड़ूंगा अनशन” – बिस्तर से मार्मिक संदेश
अपनी बेहद गिरती सेहत के बीच, वांगचुक ने अपने बिस्तर से ही एक मार्मिक वीडियो संदेश जारी कर देश को झकझोर दिया है। उन्होंने कहा, “मुझे देश-विदेश से बड़े-बड़े राजनेताओं और शुभचिंतकों के हजारों संदेश मिल रहे हैं जो मुझसे अनशन तोड़ने की भावुक अपील कर रहे हैं। यहां तक कि जबरदस्ती खाना खिलाने के लिए अदालत का दरवाजा भी खटखटाया गया है। लेकिन मैं साफ कर देना चाहता हूं कि अगर मैं इस मोड़ पर पीछे हटा, तो सरकार को गलत संदेश जाएगा कि जनता के प्रति जवाबदेह होने की कोई जरूरत नहीं है। मैं करोड़ों छात्रों के भविष्य की इस हार को स्वीकार नहीं कर सकता।”
पंजाब दस्तक की पूरी दिल्ली ब्यूरो टीम जंतर-मंतर से लेकर संसद भवन तक की हर एक हलचल और हर राजनीतिक इनपुट पर पैनी नजर बनाए हुए है। देश के करोड़ों बच्चों के भविष्य और इस बड़े राजनीतिक घटनाक्रम की एक-एक सच्ची, सटीक और सबसे धारदार लाइव अपडेट देखने के लिए हमारे पंजाब दस्तक फेसबुक चैनल, ग्रुप और सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को अभी सब्सक्राइब, फॉलो और शेयर जरूर करें।
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