पंजाब दस्तक
ब्यूरो चीफ: सुरेंद्र राणा
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (HPU) में नियमों को ताक पर रखकर चहेतों को रेवड़ियों की तरह नौकरियां बांटने का एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है। स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) ने सूचना का अधिकार (RTI) से मिले पुख्ता दस्तावेजों और कैग (CAG) की वर्ष 2025 की रिपोर्ट संख्या 4 का हवाला देते हुए कुलपति को एक विस्तृत व बेहद धारदार ज्ञापन सौंपा है। एसएफआई ने दोटूक कहा है कि यह सीधे तौर पर होनहार छात्रों और बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने वर्ष 2025 की अपनी रिपोर्ट संख्या 4 में विश्वविद्यालय के 186 शिक्षकों की भर्तियों में पहले ही गंभीर धांधली की ओर साफ इशारा किया है। इस खुलासे के बाद अब पांच बड़े विभागों के ऐसे चौंकाने वाले प्रमाण सामने आए हैं, जिसने पूरे विश्वविद्यालय प्रशासन को हिलाकर रख दिया है।
विश्वविद्यालय इकाई के परिसर सचिव मुकेश कुमार तथा अध्यक्ष आशीष कुमार ने संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति जारी कर गणित, पत्रकारिता, माइक्रोबायोलॉजी और समाजशास्त्र जैसे महत्वपूर्ण विभागों में यूजीसी (UGC) नियमों की सरेआम धंज्जियां उड़ाने के संगीन आरोप लगाए हैं।
राज्यसभा सांसद व तत्कालीन कुलपति सिकंदर कुमार का कार्यकाल जांच के दायरे में
SFI नेताओं ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि यह पूरा घोटाला तत्कालीन कुलपति और वर्तमान राज्यसभा सांसद (MP) सिकंदर कुमार के कार्यकाल में हुआ है। संगठन लंबे समय से उनके कार्यकाल के दौरान हुई इन व्यापक भर्ती अनियमितताओं की न्यायिक जांच की मांग कर रही है, किंतु विश्वविद्यालय प्रशासन लगातार इस गंभीर मांग की उपेक्षा कर रहा है। प्रशासन की इस चुप्पी से साफ है कि वह दोषियों को बचाने का प्रयास कर रहा है।
RTI के सरकारी दस्तावेजों से खुले धांधली के 5 बड़े मामले
एसएफआई ने यूजीसी विनियम 2018 के क्लॉज 10 (E) का हवाला देते हुए बताया कि किसी भी नियमित नियुक्ति के लिए गेस्ट फैकल्टी या अतिथि संकाय के अनुभव को जोड़ना पूरी तरह गैरकानूनी है। एसोसिएट प्रोफेसर पद के लिए न्यूनतम 8 वर्ष का नियमित अध्यापन/शोध अनुभव और 7 शोध प्रकाशन अनिवार्य हैं। लेकिन एचपीयू में चहेतों को उपकृत करने के लिए इन नियमों को मटियामेट कर दिया गया:
मामला 1 (गणित विभाग — आवेदन संख्या 850383011): संबंधित अभ्यर्थी की यूजीसी नेट उत्तीर्ण परीक्षा और निर्धारित पात्रता शर्तें पूरी तरह से संदिग्ध हैं। रिकॉर्ड में वर्ष 2008 से अतिथि संकाय के अनुभव को अवैध रूप से शामिल किया गया। यदि केवल वैध अनुभव जोड़ा जाए, तो 30 जनवरी 2020 तक इनका अनुभव मात्र 3 वर्ष 4 माह 1 दिन ही बनता है, जो कि अनिवार्य 8 वर्ष से आधा भी नहीं है।
मामला 2 (पत्रकारिता एवं जनसंचार — आवेदन संख्या 986709740): यहां तो हद ही पार हो गई; संबंधित अभ्यर्थी न तो यूजीसी नेट उत्तीर्ण हैं और उन्हें पीएचडी की डिग्री भी 17 सितंबर 2018 को मिली। इनके कई शोध पत्र आवेदन की अंतिम तिथि (30 जनवरी 2020) के बाद प्रकाशित हुए। आरटीआई रिकॉर्ड के अनुसार, पात्रता की दृष्टि से इनका वास्तविक अनुभव महज 1 वर्ष 4 माह 13 दिन ही बनता है।
मामला 3 (माइक्रोबायोलॉजी विभाग — आवेदन संख्या 512499130): अभ्यर्थी को पीएचडी 29 दिसंबर 2014 को प्राप्त हुई। इस तिथि से गणना करने पर 7 जनवरी 2021 तक इनका अनुभव केवल 6 वर्ष 9 दिन बनता है, जबकि आवश्यक अनुभव 8 वर्ष था। इसके अलावा, नियमों के मुताबिक आवश्यक 7 शोध प्रकाशन (Research Publications) भी इनके पास उपलब्ध नहीं थे।
मामला 4 (समाजशास्त्र विभाग — आवेदन संख्या 309897823): इस मामले में भी यूजीसी विनियम 2018 के क्लॉज 10 के विपरीत जाकर गेस्ट फैकल्टी के अनुभव को पात्रता मान लिया गया। सबसे बड़ा भाई-भतीजावाद तब दिखा जब स्क्रीनिंग कमेटी में अभ्यर्थी के ही पीएचडी सुपरवाइजर (गाइड) को शामिल किया गया, जो कि नियमों और निष्पक्षता के खिलाफ है।
”कुलपति ने किया शक्तियों का दुरुपयोग, विधिक सीमाओं का उल्लंघन”
SFI ने विश्वविद्यालय प्रशासन और तत्कालीन कुलपति पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय अधिनियम 1970 की धारा 11(1) के अंतर्गत कार्यकारी परिषद (Executive Council) को प्राप्त शक्तियों का सीधा अतिक्रमण किया गया है। कुलपति ने धारा 12(C)(7) की विधिक सीमाओं के विपरीत जाकर नियुक्तियों से संबंधित अधिकारों का दुरुपयोग किया, जबकि उक्त प्रावधान कुलपति को इस तरह की मनमानी भर्ती या सेवा समाप्ति का कोई एकाधिकार प्रदान नहीं करता।
SFI की दोटूक चेतावनी: वेतन की हो रिकवरी, रद्द हों अवैध नियुक्तियां
एसएफआई के परिसर सचिव मुकेश कुमार और परिसर अध्यक्ष आशीष कुमार ने कुलपति से मांग की है कि:
कैग (CAG) की वर्ष 2025 की रिपोर्ट संख्या 4 और आरटीआई के अकाट्य दस्तावेजों के आलोक में इन सभी 186 संदिग्ध नियुक्तियों की निष्पक्ष एवं समयबद्ध न्यायिक जांच तुरंत शुरू की जाए।
नियमों का उल्लंघन सिद्ध होने पर इन अवैध नियुक्तियों को तत्काल प्रभाव से रद्द कर कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाए।
इन अनियमित नियुक्तियों के आधार पर अब तक सरकारी खजाने से बांटे गए वेतन एवं अन्य वित्तीय लाभों की कानूनन वसूली (Recovery) की जाए।
संगठन ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यह मामला सीधे तौर पर योग्य युवाओं के हक और बच्चों के भविष्य से जुड़ा है। यदि भ्रष्ट तंत्र और इन अवैध नियुक्तियों पर तुरंत कार्रवाई नहीं की गई, तो छात्र शक्ति विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ उग्र और निर्णायक आंदोलन का बिगुल फूंक देगी।
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