हिमाचल में IAS-IPS की बड़ी कटौती के CM सुक्खू के निर्देश

​हिमाचल में IAS-IPS और IFS की ‘बड़ी फौज’ पर मुख्यमंत्री का सीधा निर्देश: 300-400 करोड़ का हो रहा खर्च, 6 नहीं सीधे 40 तक पद कम करो

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पंजाब दस्तक
​रिपोर्ट: सुरेंद्र राणा
ब्यूरो, दस्तक (शिमला):

​हिमाचल प्रदेश जैसे छोटे राज्य में प्रशासनिक अधिकारियों की भारी-भरकम फौज और उनके वेतन-भत्तों पर हर साल खर्च होने वाले करोड़ों रुपये को लेकर मुख्यमंत्री ने बेहद कड़ा और सीधा रुख अख्तियार कर लिया है। ‘दस्तक’ इंटरव्यू में मुख्यमंत्री ने राज्य की ब्यूरोक्रेसी के ऊंचे ढांचे पर सीधा प्रहार करते हुए पदों में बड़ी कटौती करने का स्पष्ट निर्देश दिया है।


​मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में इस वक्त आईएएस (IAS), आईपीएस (IPS) और आईएफएस (IFS) अधिकारियों की एक बहुत बड़ी फौज खड़ी हो चुकी है। इतने छोटे से पहाड़ी राज्य में अफसरों के इस विशाल तंत्र को चलाने के लिए जनता की गाढ़ी कमाई से सालाना तकरीबन 300 से 400 करोड़ रुपये का भारी-भरकम खर्च किया जा रहा है।


​6 पद कम करना नाकाफ़ी, मुख्यमंत्री बोले— “30 से 40 पद कम करो”
​मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक सुधारों के नाम पर आईएएस कैडर की कुल 153 पोस्टों में से महज 6 पोस्टें कम करने के फैसले को नाकाफ़ी बताते हुए दोटूक शब्दों में कहा:
​”आईएएस की 153 में से जो छह पोस्टें कम की हैं, वो छह पोस्टें कम मत करो। आईएएस की कम से कम आप 30 और 40 पोस्टें कम करो।”


​IPS और IFS महकमे में भी सीधे पद कम करने के निर्देश
​मुख्यमंत्री का यह सीधा निर्देश सिर्फ सचिवालय तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने पुलिस और वन विभाग के शीर्ष ढांचे को भी छोटा करने को कहा है। उन्होंने स्पष्ट पैमाना बताते हुए कहा कि:
​आईएएस (IAS): इनकी भारी-भरकम फौज को देखते हुए सीधे 30 से 40 पोस्टें कम की जाएं।
​आईपीएस (IPS): पुलिस महकमे में शीर्ष अधिकारियों की संख्या घटाने के लिए कम से कम 10 से 20 पोस्टें कम करो।
​आईएफएस (IFS): वन सेवा में भी अधिकारियों की बड़ी फौज खड़ी है, इसलिए आईएफएस की भी कम से कम 30 से 40 पोस्टें कम करो।


​खजाने पर बोझ बर्दाश्त नहीं
​’दस्तक’ को दिए इस इंटरव्यू से साफ है कि मुख्यमंत्री राज्य के सीमित वित्तीय संसाधनों को अफसरों की फौज पर लुटाने के सख्त खिलाफ हैं। 300-400 करोड़ रुपये का यह सालाना खर्च राज्य के खजाने पर एक बड़ा बोझ है। मुख्यमंत्री के इस तीखे और सीधे निर्देश के बाद अब हिमाचल के प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।


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