वेव एस्टेट में तानाशाही का खेल: पहले कोठियों पर डंडा चलाकर बिना बताए बढ़ाया चार्ज, अब फ्लैटों को मोहरा बनाकर ‘कैम चार्ज’ का नया प्रहार; बदहाल सड़कें, लटकती तारें, सोरे वाला पानी, आवारा कुत्तों का आतंक और राम भरोसे सुरक्षा के बीच पूछते हैं 1800 परिवार– ‘जब सुविधाएं मलबे में, तो जेब पर डाका आखिर क्यों?’
सुरेंद्र राणा, पंजाब दस्तक (वेव एस्टेट, मोहाली, सेक्टर 85 और 99 से ग्राउंड रिपोर्ट)
मोहाली (वेव एस्टेट, सेक्टर 85 और 99):
मोहाली के सेक्टर 85 और 99 स्थित ‘वेव एस्टेट’ में मेंटेनेंस शुल्क बढ़ाने का नया फरमान जारी होने के बाद से ही निवासियों के भीतर गहरा विचार-विमर्श शुरू हो गया है। Management द्वारा अचानक थोपे जाने वाले इस नए आर्थिक बोझ के खिलाफ वेव एस्टेट के सभी ब्लॉक्स और सोसाइटियों—जिसमें जॉय होम्स, न्यू जॉय होम्स, कैनवस-1, कैनवस-2, पैराडाइज, सवांता ग्रीन्स, वेव गार्डन्स और एंटेलिटिक शामिल हैं—के 1800 से अधिक परिवारों के बीच अंदरूनी बातचीत और एकजुटता का दौर शुरू हो चुका है। आम निवासियों और प्रबुद्ध बुजुर्गों का साफ मानना है कि अब सभी 1800 परिवारों को एक मजबूत ‘महासंघ’ के बैनर तले अपनी बात Management के सामने रखनी होगी, ताकि कोई भी एकतरफा निर्णय निवासियों पर न थोपा जा सके।
वेव एस्टेट के बुजुर्गों और सीनियर रेजिडेंट्स ने Management और डिलवर्ड विभाग की कार्यप्रणाली पर चर्चा करते हुए इस आर्थिक विषय को उजागर किया: “Management शातिर तरीके से अलग-अलग प्रहार कर रही है। पहले कोठियों (प्लॉट मालिकों) पर डंडा चलाया गया। शुरुआत में रेट ₹5 था, फिर कोर्ट-कचहरी और ना जाने कहाँ अंदरूनी बात हुई, किससे टॉक हुई कि उसे ₹6.60 पैसे कर दिया गया। निवासियों ने सोचा कि चलो ₹6.60 पर बात स्थिर हो गई है। लेकिन मार्च बीतते ही Management ने तानाशाही दिखाई और बिना किसी को बताए, बिना कोई चिट्ठी या नोटिस निकाले, 1 अप्रैल से सीधा मेंटेनेंस चार्ज बढ़ा दिया और ₹8 स्क्वायर फीट के हिसाब से वसूली शुरू कर दी! आज की डेट में कोठियों के लोग मजबूरन इस बढ़े हुए रेट पर भुगतान कर रहे हैं जिससे कोठियों और फ्लैटों का बिल सीधा ₹1000 से ₹1500 महीना बढ़ गया है। बुद्धिजीवी रेजिडेंट्स ने खुद चेक इकट्ठे करके करोड़ों दिए, लेकिन Management ने न सड़कें सुधारीं, न पार्क और न ही सोरे वाला पानी ठीक किया।”
निवासियों का कहना है कि कोठियों से बिना पूर्व सूचना बढ़ा हुआ चार्ज वसूलने के बाद, अब वही प्रहार फ्लैटों के मालिकों पर करने की तैयारी है। फ्लैटों का मेंटेनेंस पहले ही बहुत भारी है, और अब इस नई बढ़ोतरी से हर परिवार का बिल ₹600-₹700 से लेकर ₹1000-₹1500 तक सीधा बढ़ जाएगा, जिससे मध्यमवर्गीय परिवारों की जेब पर सीधा असर पड़ेगा। इसे लेकर निवासियों के भीतर गंभीर चिंता है।
## 1800 परिवारों का डिलवर्ड विभाग और Management से सीधा यक्ष प्रश्न:
सवाल 1: रात को डर का माहौल और चोरियों का खतरा! करोड़ों खर्च करके भी जनता निडर होकर सो क्यों नहीं सकती?
निवासी पूछते हैं कि जब लोगों ने अपनी जीवनभर की गाढ़ी कमाई लगाकर, करोड़ों रुपये खर्च करके कोठियां बनाई हैं और महंगे फ्लैट लिए हैं, तो उन्हें रात को ‘डर के साए’ में क्यों जीना पड़ रहा है? वेव एस्टेट की सुरक्षा पूरी तरह चरमरा चुकी है। चीफ सिक्योरिटी ऑफिसर (CSO) और उच्च अधिकारी जवाब दें कि रात के समय कोठियों के आगे और सभी फ्लैटों के ब्लॉकों में सुरक्षा गार्ड्स घूमते (पेट्रोलिंग करते) क्यों नजर नहीं आते? सुरक्षाकर्मियों की भारी कमी के कारण एस्टेट में चोरियों का खतरा लगातार बना रहता है। जब तक रात को चारों तरफ गार्ड्स मुस्तैदी से चक्कर नहीं लगाएंगे, तब तक लोग अपने ही घरों में निडर होकर चैन की नींद कैसे सो पाएंगे?
सवाल 2: आवारा कुत्तों का हिंसक आतंक, गंदगी और गहरा खौफ: सुबह अकेले निकलने वाले निवासियों के पीछे दौड़ते हैं आक्रामक कुत्ते, बच्चों और बुजुर्गों को काटने की घटनाओं के बाद भी Management मौन क्यों?
वेव एस्टेट के निवासियों ने Management की लचर व्यवस्था पर कड़ा रोष जताते हुए पूछा है कि लाखों-करोड़ों रुपये मेंटेनेंस वसूलने के बावजूद सुरक्षा और स्वास्थ्य को दांव पर क्यों लगा दिया गया है? आज एस्टेट के भीतर आवारा कुत्तों की तादाद बहुत ज़्यादा बढ़ चुकी है और उनकी संख्या दिन-प्रतिदिन तेजी से बढ़ती जा रही है। सोसाइटी से सटे हुए जंगल और शमशान घाट वाले रास्तों से रोज़ नए कुत्ते अंदर दाखिल हो रहे हैं। ए-ब्लॉक, बी-ब्लॉक, सी-ब्लॉक, एफ-2 ब्लॉक (वॉलीबॉल ग्राउंड), सभी पार्कों के बाहर और हर नुक्कड़-कोने पर आक्रामक कुत्तों के झुंड हमेशा सक्रिय रहते हैं। यहाँ कई कुत्ते इतने खराब और हिंसक हो चुके हैं कि सुबह 5 बजे जब कोई सिंगल (अकेला) आदमी वॉक के लिए निकलता है, तो ये सीधे उनके पीछे भागते हैं और हमला कर देते हैं। ये कुत्ते कई मासूम बच्चों और असहाय बुजुर्गों को बुरी तरह काट चुके हैं। इसके अलावा, ये कुत्ते लोगों के पर्सनल गार्डन और घरों के सामने पोटी (गंदगी) कर देते हैं, जिससे लोगों का पैर उस पर पड़ जाता है और हर जगह पेशाब करके पूरी सोसाइटी की स्वच्छता को बर्बाद कर रहे हैं। प्रबुद्ध बुजुर्ग और महिलाएं हाथों में लाठी लेकर, गहरे खौफ के साए में कदम बढ़ाने पड़ते हैं। पूरे वेव एस्टेट में निवासियों के बीच अत्यधिक असुरक्षा और बेबसी का माहौल है, लेकिन Management इस विकट समस्या पर पूरी तरह आंखें मूंदे बैठी है!
सवाल 3: गेट नंबर 1 पर दिखावे की सजावट, तो अंदरूनी सड़कों का बुरा हाल क्यों? गेटों पर गार्ड्स की कमी क्यों?
Management बाहर से आने वाले नए खरीदारों को आकर्षित करने के लिए गेट नंबर 1 को तो खूब सजाकर और चमकाकर रखती है, लेकिन जैसे ही कोई सोसाइटी के अंदर कदम रखता है, अंदरूनी सड़कों की बदहाली देखकर हैरान रह जाता है। पूरी सड़कें टूटी हुई हैं और जगह-जगह गड्ढे मुंह बाए खड़े हैं। इसके अलावा, सोसाइटी के जो दो-तीन मुख्य गेट चालू हैं, वहां सुरक्षा के नाम पर महज एक-एक गार्ड खड़ा किया गया है! इतने बड़े प्रोजेक्ट में मुख्य द्वारों पर कम से कम दो-दो, तीन-तीन गार्ड्स की मुस्तैदी होनी चाहिए थी। गार्डों की संख्या में इतनी भारी कटौती क्यों की गई है?
सवाल 4: सफाई और हॉर्टिकल्चर स्टाफ की भारी छंटनी क्यों? बदहाल पार्कों और गंदगी का जिम्मेदार कौन?
1 से 1.5 किलोमीटर के इस विशाल दायरे में फैले प्रोजेक्ट की सफाई व्यवस्था का दिवाला निकल चुका है। डिलवर्ड विभाग ने पैसे बचाने के चक्कर में सफाई कर्मचारियों और माली (हॉर्टिकल्चर स्टाफ) की भारी छंटनी कर दी है। पूरे ए-ब्लॉक की सफाई के लिए मात्र 1 या 2 स्वीपर छोड़े गए हैं, जिससे हर तरफ सूखे पत्ते और कूड़े के ढेर लगे रहते हैं। एस्टेट में खूब सारा सफाई कर्मचारी और हॉर्टिकल्चर का पूरा स्टाफ रखा जाना चाहिए था, ताकि झाड़ियों और पौधों की समय पर कटाई हो सके। आज हालात यह हैं कि सुबह वॉक करते समय जंगली झाड़ियों के झुंड लोगों के मुंह पर लगते हैं।
सवाल 5: एडवांस में करोड़ों का खेल! 7-8 सालों के ब्याज सहित लगभग ₹30-32 करोड़ से ज्यादा जुटाए, तो हमारा स्विमिंग पूल और बड़ी जिम कहाँ गायब कर दी?
पजेशन के समय Management ने हर एक फ्लैट मालिक से ₹1.5-1.5 लाख और कोठियों से ₹75,000 से लेकर ₹1 लाख तक क्लब हाउस के नाम पर एडवांस इकट्ठा किए थे। साल 2018 से 2025 तक यानी इन पिछले 7-8 सालों का भारी-भरकम ब्याज मिलाकर यह पूरा फंड लगभग ₹30 से ₹32 करोड़ से भी ज्यादा बनता है। लेकिन विडंबना देखिए कि इतने भारी-भरकम बजट के बदले Management ने मात्र ₹6-7 करोड़ की लागत वाला एक साधारण कम्युनिटी सेंटर खड़ा कर दिया! बुकिंग के समय किए गए वादे के मुताबिक स्विमिंग पूल (Swimming Pool) आज तक गायब है। 1800 से अधिक परिवारों के लिए महज ‘ऊंट के मुंह में जीरे’ जैसी छोटी सी जिम थमा दी गई है, जबकि यहाँ कम से कम दो फ्लोर की बड़ी और आधुनिक जिम होनी चाहिए थी। Management ने निवासियों की सुविधाओं का विस्तार करने के बजाय अपनी मोटी कमाई के लिए दो बड़े हॉल बना दिए ताकि पार्टियों की बुकिंग से वे खुद पैसा वसूल सकें! बाकी बचे हुए करोड़ों रुपये और सालों का ब्याज कहाँ गया? डिलवर्ड विभाग इसका सीधा जवाब दे!
सवाल 6: नलों में सोरा (खारा पानी) और स्वास्थ्य से खिलवाड़ क्यों?
घरों में सप्लाई होने वाले पानी में इस कदर सोरा (खारेपन का पाउडर/केमिकल) आ रहा है कि लोगों के घरों के महंगे नलके और फ्लैट्स अंदर से गल रहे हैं। इस खारे पानी से लोगों का स्वास्थ्य गंभीर रूप से बिगड़ रहा है। आज निवासी खुद अपने स्तर पर भाखड़ा का साफ पानी सोसाइटी में लाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
सवाल 7: इंटरनेट की लटकती तारों से ‘फिश मार्केट’ और बंद पड़े वीआईपी गेट क्यों?
जिओ (Jio), एयरटेल (Airtel) व अन्य कंपनियों की इंटरनेट तारें लोगों के सुंदर घरों के आगे भद्दे गुच्छे बनाकर लटकी हुई हैं, जिससे पूरा का पूरा इलाका एक ‘मछली बाजार’ जैसा नजर आता है। बाहरी और वीआईपी गेट बंद होने से लेबर और निवासियों को एक ही गेट पर मिनटों तक जाम से जूझना पड़ता है। स्कूल के लिए तय जमीन का अलॉटमेंट भी अभी तक अधर में लटका हुआ है।
## 1800 परिवारों का अंतिम फैसला (सुविधाएं दो, पैसा लो!):
सोसाइटी के भीतर मौजूद आवारा कुत्तों को तुरंत गेटों से बाहर खदेड़ा जाए, जंगल और शमशान घाट की तरफ से आने वाले कुत्तों को रोकने के लिए पुख्ता फेंसिंग और प्रबंध किए जाएं ताकि गंदगी, बच्चों-बुजुर्गों पर हो रहे हमले और सुबह के वॉक के समय से भय का माहौल पूरी तरह खत्म हो।
सुरक्षाकर्मियों (Guards) की संख्या खूब बढ़ाई जाए, हर एक मुख्य गेट पर कम से कम 2-2 मुस्तैद गार्ड तैनात हों, और रात के समय सभी फ्लैटों व कोठियों के आगे सुरक्षा गार्ड्स की लगातार गश्त (पेट्रोलिंग) सुनिश्चित की जाए ताकि लोग निडर होकर सो सकें।
अंदरूनी टूटी हुई सड़कों का पूर्ण नवीनीकरण हो, पानी के सोरे का स्थाई समाधान हो और वादे के मुताबिक स्विमिंग पूल व भाखड़ा का साफ पानी तुरंत चालू किया जाए।
सफाई कर्मचारियों और हॉर्टिकल्चर (बागवानी) का पूरा स्टाफ वापस बहाल किया जाए ताकि सफाई व्यवस्था दुरुस्त हो और झाड़ियों की छंटनी हो सके।
हार्मनी पार्क जैसी सुंदर सुविधा हर ब्लॉक के पार्क में मिले, न कि सिर्फ विज्ञापन और फ्लैट बेचने के लिए एक पार्क चमकाया जाए।
## बिना ‘टेबल टॉक’ के नया रेट मंजूर नहीं: निवासियों की सामूहिक बात
1800 परिवारों और सीनियर बुजुर्गों ने स्पष्ट किया है कि बुकिंग के दिनों में एग्रीमेंट को कोई इतनी गहराई से नहीं पढ़ पाता, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि Management अपनी जिम्मेदारी से भाग जाए और मनमानी दिखाए। हम मेंटेनेंस charge देने से मना नहीं कर रहे हैं, लेकिन Management और डिलवर्ड विभाग की यह एकतरफा नीति, बदहाल सुरक्षा, टूटी सड़कें और कुत्तों का यह भयानक आतंक अब बर्दाश्त नहीं होगी। “पहले सुविधाएं दो, फिर पैसा लो” का सिद्धांत ही अब वेव एस्टेट में लागू होना चाहिए।
निवासियों का कहना है कि Management और डिलवर्ड अथॉरिटी सबसे पहले सभी सोसाइटियों (जॉय होम्स, कैनवस, पैराडाइज, सवांता, वेव गार्डन्स, एंटेलिटिक) की कार्यकारिणी व वरिष्ठ निवासियों को एक मेज पर बुलाकर ‘टेबल टॉक’ (आधिकारिक वार्ता) करे। बिना लोकतांत्रिक सहमति के लिया गया कोई भी एकतरफा निर्णय जनता कतई स्वीकार नहीं करेगी।
ब्यूरो रिपोर्ट: पंजाब दस्तक इस पूरे मामले पर ग्राउंड जीरो से पैनी नजर बनाए हुए है। यह बातचीत कोठियों और फ्लैटों के भेदभाव से ऊपर उठकर 1800 परिवारों के हक, उनकी सुरक्षा और उनके भविष्य की है।
