शिमला/ब्यूरो (सुरेंद्र राणा):
हिमाचल प्रदेश के सैकड़ों सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए एक बेहद राहत भरी खबर है। पिछले लंबे समय से अटके पड़े पेंशन संशोधन के मामलों को सुलझाने के लिए ‘हिमाचल प्रदेश पेंशनर संयुक्त संघर्ष समिति’ द्वारा किए जा रहे जमीनी प्रयास अब सिरे चढ़ते नजर आ रहे हैं। इस सिलसिले में समिति के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने उप महालेखाकार मीनू शर्मा के साथ एक अत्यंत महत्वपूर्ण आधिकारिक बैठक की, जिसमें आगामी दो हफ्तों (15 दिन) के भीतर सभी पेंडिंग केसों को क्लीयर करने का ठोस आश्वासन मिला है।
संघर्ष समिति के अतिरिक्त महासचिव भूपराम वर्मा ने ‘पंजाब दस्तक’ को दी जानकारी
इस पूरे घटनाक्रम और वार्ता की विस्तृत जानकारी ‘हिमाचल प्रदेश पेंशनर संयुक्त संघर्ष समिति’ के अतिरिक्त महासचिव भूपराम वर्मा ने विशेष रूप से ‘पंजाब दस्तक’ के साथ साझा की। उन्होंने बताया कि उनकी अगुवाई में गए छह सदस्यीय डेलिगेशन ने उप महालेखाकार को एक औपचारिक मांग पत्र सौंपा।
भूपराम वर्मा ने बताया कि 50% और 23% मैट्रिक्स लेवल के आधार पर पेंशन संशोधन के करीब 29 ऐसे मामले हैं, जो काफी समय से सिर्फ अप्रूवल (स्वीकृति) न मिलने के कारण लटके हुए हैं। इसके साथ ही उन्होंने इस प्रशासनिक खामी को भी उजागर किया कि महालेखाकार कार्यालय से फाइलें पास होने के बाद उन्हें ट्रेजरी (कोषागार) तक पहुंचने में बहुत लंबा वक्त लग रहा है। इस लेट-लतीफी के कारण बुजुर्ग पेंशनरों को न केवल प्रशासनिक चक्कर काटने पड़ रहे हैं, बल्कि वे आर्थिक तंगी से भी जूझ रहे हैं।
प्रशासनिक कमियां और डाक की सुस्ती भी देरी की वजह
पेंशनर प्रतिनिधियों की दलीलों को गंभीरता से सुनने के बाद उप महालेखाकार मीनू शर्मा ने भरोसा दिलाया कि कार्यालय इन सभी मामलों को प्रायोरिटी (प्राथमिकता) पर रखते हुए तुरंत निपटाएगा। इसके साथ ही उन्होंने देरी के कुछ मुख्य कारणों को स्पष्ट करते हुए कहा कि:
अक्सर विभिन्न विभागों के DDO (डीडीओ) पेंशन से जुड़े दस्तावेज अधूरे या त्रुटिपूर्ण भेज देते हैं, जिससे उनकी जांच की प्रक्रिया में अधिक समय लग जाता है।
सरकारी डाक व्यवस्था में होने वाली देरी भी फाइलों के समय पर न पहुंचने की एक बड़ी वजह है।
महालेखाकार कार्यालय के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में पेंशन संशोधन के लगभग 100 से ऊपर मामले लंबित हैं, जिन्हें आगामी 15 दिनों के भीतर हर हाल में निपटाने और शुद्ध करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
प्रतिनिधिमंडल में ये गणमान्य रहे मौजूद
उप महालेखाकार के साथ हुई इस सफल वार्ता के दौरान अतिरिक्त महासचिव भूपराम वर्मा के साथ संघर्ष समिति के अन्य प्रमुख चेहरे गंगाराम शर्मा, सैनराम नेगी, भागचंद चौहान, नेकराम नेगी और मनमोहन सिंह मंचाण भी मुख्य रूप से उपस्थित रहे। समिति के इन सभी पदाधिकारियों ने इस सकारात्मक निर्णय पर संतोष जताया है और उम्मीद जाहिर की है कि तय समय सीमा के भीतर पेंशनरों की इस पुरानी समस्या का स्थाई समाधान हो जाएगा।
हिमाचल प्रदेश और देश-दुनिया की पल-पल की और सटीक खबरों के लिए लगातार देखते रहें ‘पंजाब दस्तक’। ताजा अपडेट्स के लिए हमारे चैनल को सब्सक्राइब करें और फॉलो करें।
