पंजाब दस्तक ब्यूरो
नई दिल्ली / शिमला / सुरेंद्र राणा:
देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा ‘नीट-यूजी’ (NEET-UG) इस बार इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गई है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा परीक्षा की शुचिता, गोपनीयता और पारदर्शिता को अक्षुण्ण रखने के लिए इस बार केंद्र सरकार और विभिन्न राज्य सरकारों ने मिलकर जो कदम उठाए हैं, उसने देश में प्रशासनिक मुस्तैदी का एक नया और कड़ा बेंचमार्क स्थापित कर दिया है।
एक तरफ जहां जमीन से लेकर आसमान (डिजिटल और एआई निगरानी) तक सुरक्षा का ऐसा अभेद्य पहरा था जिसे भेद पाना नामुमकिन था, वहीं दूसरी तरफ कई राज्य सरकारों ने परीक्षार्थियों के लिए अपने खजाने खोल दिए।
🚨 आसमान से जमीन तक सुरक्षा का अभूतपूर्व ‘सुपर चक्रव्यूह’
पेपर लीक, फर्जीवाड़ा और धांधली जैसी पुरानी चुनौतियों को जड़ से खत्म करने के लिए इस बार नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) और गृह मंत्रालय के समन्वय से सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह ‘हाई-टेक और फुलप्रूफ’ बनाया गया था:
ढाई लाख जांबाज और अर्धसैनिक बल: देश भर के परीक्षा केंद्रों पर कानून व्यवस्था और सुरक्षा को चाक-चौबंद रखने के लिए ढाई लाख (2,50,000) पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था। संवेदनशील और अति-संवेदनशील केंद्रों पर मोर्चा संभालने के लिए 1500 अर्धसैनिक बलों (Paramilitary Forces) के जवान मुस्तैद रहे।
93 करोड़ की क्षमता वाला डिजिटल जैमर नेटवर्क: परीक्षा केंद्रों के भीतर या आसपास किसी भी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक गैजेट, ब्लूटूथ या मोबाइल सिग्नल के इस्तेमाल को रोकने के लिए 93,11,11,111 (करीब 93 करोड़) सिग्नल ब्लॉक क्षमता वाले अत्याधुनिक जैमर्स लगाए गए थे। इसके चलते पूरे परीक्षा केंद्र ‘नो नेटवर्क ज़ोन’ में तब्दील हो गए।
’तीसरी आंख’ और एआई का पहरा: डिजिटल निगरानी के स्तर को बढ़ाते हुए देश भर में 1.5 लाख हाई-सिक्योरिटी और एआई (AI) आधारित सीसीटीवी कैमरों से पल-पल की लाइव मॉनिटरिंग की जा रही थी। दिल्ली स्थित मुख्य कमांड सेंटर से हर एक डेस्क, छात्र की मूवमेंट और इनविजिलेटर्स पर सीधी नजर रखी गई।
इतिहास में पहली बार ‘मॉक ड्रिल’ और एडवांस चेकिंग: मुख्य परीक्षा से ठीक पहले देश भर में एक व्यापक ‘मॉक ड्रिल’ की गई, जिसके तहत प्रश्नपत्रों के सुरक्षित आवागमन (जीपीएस ट्रैकिंग), मल्टी-लेयर बायोमेट्रिक हाजिरी और डिजिटल स्क्रीनिंग की हर कड़ी को पहले ही जांच लिया गया था ताकि मुख्य दिन एक प्रतिशत भी चूक की गुंजाइश न बचे।
🚌 छात्र-हित में सरकारों का बड़ा कदम: निशुल्क सफर की सौगात
एक तरफ जहां सुरक्षा के नियम लोहे की तरह सख्त थे, वहीं दूसरी तरफ देश के भविष्य यानी परीक्षार्थियों के सफर को आसान बनाने के लिए सरकारों ने संवेदनशीलता की नई मिसाल पेश की।
सुक्खू सरकार का ऐतिहासिक फैसला: दिल्ली सरकार की तर्ज पर ही हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने छात्र-हित में बड़ा निर्णय लेते हुए नीट परीक्षा दे रहे सभी बच्चों के लिए सरकारी बसों में निशुल्क (फ्री) बस यात्रा सुविधा प्रदान की।
घर से केंद्र और केंद्र से घर तक मुफ्त सफर: परीक्षार्थियों को अपने घर से परीक्षा केंद्रों तक आने और परीक्षा खत्म होने के बाद वापस सुरक्षित लौटने के लिए बसों में कोई किराया नहीं देना पड़ा।
19 हजार पहाड़ी बच्चों को संजीवनी: इस बार हिमाचल प्रदेश के कठिन और दूरदराज के क्षेत्रों से करीब 19,000 परीक्षार्थी नीट परीक्षा में शामिल हुए। सुक्खू सरकार के इस फैसले ने इन बच्चों और उनके अभिभावकों को भारी आर्थिक और मानसिक राहत दी। दिल्ली और हिमाचल के साथ-साथ कई अन्य राज्यों ने भी इस प्रकार की अनूठी पहल कर छात्र-छात्राओं की राह आसान की।
👥 कड़े पहरे के बावजूद 22 लाख से ज्यादा बच्चों ने रचा इतिहास
तमाम सख्त नियमों, गहन चेकिंग, बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन और डिजिटल स्क्रीनिंग की कड़े प्रक्रियाओं से गुजरने के बाद भी छात्रों के हौसले बुलंद दिखे। देश भर में 22 लाख से अधिक परीक्षार्थियों ने इस महा-परीक्षा में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
पंजाब दस्तक का विशेष विश्लेषण:
इस बार की नीट परीक्षा केवल एक परीक्षा नहीं, बल्कि प्रशासनिक मुस्तैदी और सरकारी संवेदनशीलता का एक बेहतरीन वैश्विक मॉडल बनकर उभरी है। जहां सुरक्षा के कड़े डिजिटल चक्रव्यूह ने धांधली करने वालों के हौसले पस्त किए, वहीं मुफ्त परिवहन जैसी सुविधाओं ने साबित किया कि सरकारें अपने देश के भविष्य के साथ मजबूती से खड़ी हैं। अभिभावकों और छात्र-छात्राओं ने इस पारदर्शी व्यवस्था और निशुल्क सफर की चौतरफा सराहना की है।
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