हिमाचल नगर निगम चुनाव 2026: मंडी, धर्मशाला और सोलन में भाजपा की बड़ी जीत

​हिमाचल का ‘भगवा’ मंथन: मंडी, धर्मशाला और सोलन में भाजपा की ऐतिहासिक जीत; पालमपुर में कांग्रेस की साख बची

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पंजाब दस्तक
​ब्यूरो रिपोर्ट: सुरेंद्र राणा
​हिमाचल प्रदेश के नगर निगम चुनावों के नतीजे प्रदेश की बदलती सियासी तस्वीर को बयां कर रहे हैं। मंडी, धर्मशाला और सोलन में भारतीय जनता पार्टी ने अपनी संगठनात्मक मजबूती और जमीनी जुड़ाव से कांग्रेस को करारी शिकस्त दी है, जबकि पालमपुर में कांग्रेस अपनी साख बचाने में कामयाब रही है। इस चुनावी महासमर में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल का कुशल मार्गदर्शन, पूर्व मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर की जन-स्वीकार्यता और भाजपा के समर्पित कार्यकर्ताओं की दिन-रात की मेहनत का बड़ा योगदान रहा है।


​1. मंडी: जय राम का जादू और कांग्रेस की गुटबाजी
​मंडी में भाजपा ने 14 में से 12 सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। विधायक अनिल शर्मा और स्वर्गीय पंडित सुखराम जी की विरासत यहाँ भाजपा की नींव रही। चंपा ठाकुर अपने गृह वार्ड में भी भाई प्रवीण कुमार को नहीं बचा सकीं। पूर्व सांसद प्रतिभा सिंह, मंत्री विक्रमादित्य सिंह और कौल सिंह ठाकुर जैसे दिग्गजों की मौजूदगी के बावजूद कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया। एकमात्र ‘Nela Ward’ की जीत का श्रेय कांग्रेस की रणनीति को नहीं, बल्कि नर्मदा के निजी रसूक को जाता है।


​2. धर्मशाला: सुधीर शर्मा की मेहनत का रंग
​धर्मशाला में भाजपा ने 17 में से 11 वार्डों पर कब्जा जमाया है। पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा ने कांग्रेस से भाजपा में आने के बाद जिस तरह घर-घर जाकर जन-संपर्क किया और बुजुर्गों के पैर छुए, वह अद्वितीय है। इसमें कांगड़ा के वरिष्ठ नेता मनीष शर्मा की रणनीतिक भूमिका ने भाजपा की जीत पक्की की। यहाँ कांग्रेस महज 5 सीटों पर सिमट गई।


​3. सोलन: स्वास्थ्य मंत्री के गढ़ में भाजपा की सेंध
​सोलन में भाजपा ने 17 में से 10 सीटों पर स्पष्ट बहुमत पाया है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धनीराम शांडिल के गढ़ में भाजपा की यह जीत कांग्रेस के लिए बड़ा झटका है। इसके सूत्रधार शिमला के सांसद सुरेश कश्यप रहे, जिन्होंने हर घर तक दस्तक दी। भाजपा की महिला और यूथ विंग की सक्रियता ने सोलन में भगवा फहराया।


​4. पालमपुर: जहाँ कांग्रेस ने की वापसी
​पालमपुर नगर निगम में कांग्रेस ने अपनी साख को बचाते हुए भाजपा को मात दी है। यहाँ के विधायकों ने जनता के साथ सीधा जुड़ाव और व्यक्तिगत संपर्क बनाकर पार्टी को जीत दिलाई। यह क्षेत्र साबित करता है कि जहाँ नेतृत्व और कार्यकर्ताओं का आपसी तालमेल है, वहाँ कांग्रेस अभी भी मुकाबले में है।


​भाजपा के कार्यकर्ताओं और संगठन के समर्पण पर गीता का सार:
​”यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरो जनः।
स यत्प्रमाणं कुरुते लोकस्तदनुवर्तते॥”
(अर्थ: श्रेष्ठ पुरुष जो आचरण करते हैं, सामान्य लोग भी उसी का अनुसरण करते हैं। भाजपा नेताओं की मेहनत और जन-सेवा के आचरण को जनता ने अपना प्रमाण माना है।)


​निष्कर्ष: कांग्रेस के लिए आईना
इन चारों नगर निगमों के नतीजे स्पष्ट संकेत देते हैं कि कांग्रेस के प्रदेश मुखिया विनय कुमार जी की विफलताओं ने पार्टी को भारी नुकसान पहुँचाया है। कांग्रेस की गुटबाजी, नेताओं की बयानबाजी और सरकार की नीतियों का जनता तक न पहुँच पाना हार का मुख्य कारण है। पालमपुर को छोड़ दें, तो शेष तीन निगमों में हार यह बताती है कि जनता अब दिग्गजों के आपसी झगड़ों से ऊब चुकी है। यह परिणाम 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए कांग्रेस के लिए एक गंभीर चेतावनी है।
​ब्यूरो रिपोर्ट: सुरेंद्र राणा
(पंजाब दस्तक)
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