पंजाब दस्तक
ब्यूरो रिपोर्ट: सुरेंद्र राणा
हिमाचल प्रदेश की राजनीति में सोलन नगर निगम के नतीजे एक बड़ा उलटफेर लेकर आए हैं। सत्ताधारी कांग्रेस के लिए यह परिणाम एक बड़ा झटका है। कुल 17 वार्डों वाली इस नगर निगम में भाजपा ने 10 सीटों पर जीत दर्ज कर स्पष्ट बहुमत प्राप्त कर लिया है, जबकि कांग्रेस 6 सीटों पर सिमट गई और 1 सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी ने कब्जा जमाया। सोलन के वरिष्ठ नेता और प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धनीराम शांडिल के गृह क्षेत्र में कांग्रेस की यह हार पार्टी के लिए गंभीर आत्मचिंतन का विषय है।
भाजपा की संगठनात्मक मजबूती और मेहनत
सोलन में भाजपा की यह जीत किसी चमत्कार से कम नहीं है, जिसके पीछे प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल का कुशल मार्गदर्शन और कार्यकर्ताओं की दिन-रात की मेहनत रही है। भाजपा की महिला विंग, यूथ विंग और सोलन के तमाम कार्यकर्ताओं ने जिस एकजुटता के साथ काम किया, उसने सोलन में भगवा फहरा दिया। शिमला के सांसद सुरेश कश्यप जी ने इस चुनाव में अपनी पूरी ताकत झोंक दी। सुरेश कश्यप ने खुद घर-घर जाकर मतदाताओं से संवाद किया और पार्टी के पक्ष में माहौल तैयार किया। साथ ही, भाजपा के राज्यसभा सदस्यों ने भी सोलन का निरंतर दौरा कर कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ाया। महिलाओं की टोलियों ने घर-घर जाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ के मंत्र को हर मतदाता तक पहुँचाया।
इस ऐतिहासिक जीत पर भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं की मेहनत को चरितार्थ करता यह श्लोक बिल्कुल सटीक बैठता है:
”उद्यमेन हि सिध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः।
न हि सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति मुखे मृगाः॥”
(अर्थ: कार्य करने से ही सिद्ध होते हैं, केवल इच्छा करने से नहीं। जैसे सोते हुए सिंह के मुख में मृग स्वयं प्रवेश नहीं करते, उन्हें शिकार के लिए परिश्रम करना पड़ता है। ठीक उसी प्रकार भाजपा कार्यकर्ताओं और सांसद सुरेश कश्यप की मेहनत से यह जीत हासिल हुई है।)
विजेता प्रत्याशियों का विवरण:
नीलम (भाजपा), सुषमा (भाजपा), गौरव आजाद (निर्दलीय), रोहित भारद्वाज (भाजपा), प्रियंका पंज (भाजपा), रेखा सनी (भाजपा), पूजा (कांग्रेस), सुरेंद्र (भाजपा), मीनाक्षी (कांग्रेस), अंकुश सूद (कांग्रेस), सरिता ठाकुर (भाजपा), प्रियंका अग्रवाल (भाजपा), नरेंद्र ठाकुर (कांग्रेस), सुलक्षणा कोड (कांग्रेस), अभिषेक ठाकुर (भाजपा), सीमा (भाजपा), अरुण ठाकुर (कांग्रेस)।
क्या स्वास्थ्य मंत्री के गढ़ में बिखराव है?
वरिष्ठ नेता डॉ. धनीराम शांडिल का सोलन में लंबे समय से वर्चस्व रहा है, लेकिन नगर निगम चुनावों के ये नतीजे कांग्रेस के भीतर बढ़ते असंतोष और गुटबाजी की ओर इशारा करते हैं। भाजपा की रणनीतिक स्पष्टता और सोलन के विकास के मुद्दों पर जनता का भरोसा, कांग्रेस की ढीली संगठनात्मक संरचना पर भारी पड़ा।
कांग्रेस कार्यकर्ता प्रदेश सरकार की लोक-लुभावन योजनाओं को धरातल पर प्रभावी ढंग से रखने में कहीं न कहीं विफल रहे हैं। क्या यह हार आगामी चुनावों के लिए एक बड़ी चेतावनी है? डॉ. शांडिल और पार्टी नेतृत्व को यह समझना होगा कि यदि वे अपने गढ़ में ही सरकार की नीतियों को जन-जन तक नहीं पहुँचा पा रहे हैं, तो पार्टी का भविष्य खतरे में है।
निष्कर्ष
सोलन के इन परिणामों ने कांग्रेस को आईना दिखा दिया है। यदि समय रहते पार्टी ने अपने कार्यकर्ताओं और संगठन की कार्यप्रणाली में सुधार नहीं किया, तो यह हार 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए एक बड़ा संकेत हो सकती है। सोलन की जनता ने ‘काम’ के आधार पर अपना मत दिया है।
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