हिमाचली उद्योगों में बनी 31 दवाएं जांच में फेल, पेनकिलर-एंटीबायोटिक समेत ये दवाएं मानकों पर नहीं उतरी खरी

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शिमला, सुरेन्द्र राणा; केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन की पड़ताल में हिमाचल में निर्मित 31 दवाएं गुणवत्ता के पैमाने पर खरा नहीं उतर पाई है। ये दवाएं प्रदेश के 25 अलग-अलग फार्मा उद्योगों में निर्मित हुई थीं। सबसे अधिक मामले बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ (बीबीएन) फार्मा बेल्ट और कालाअंब क्षेत्र से जुड़े हैं। अप्रैल माह के ड्रग अलर्ट के अनुसार फेल हुई दवाओं में 13 टेबलेट, पांच कैप्सूल, सात इंजेक्शन, पांच सिरप और ड्रॉप्स तथा एक अन्य श्रेणी का उत्पाद शामिल है। इनमें एंटीबायोटिक, पेनकिलर, गैस्ट्रिक, हार्ट, कैल्शियम, विटामिन और इंजेक्शन श्रेणी की दवाएं शामिल हैं। अधिकांश सैंपल डिसोल्यूशन, आइडेंटिफिकेशन, पीएच, पार्टिकुलेट मैटर और स्टेरिलिटी जैसे अहम गुणवत्ता मानकों पर फेल पाए गए हैं। रिपोर्ट में सबसे गंभीर तथ्य यह सामने आया है कि हिमाचल में निर्मित कुछ दवाओं को स्पष्ट रूप से स्प्यूरियस यानी संदिग्ध/नकली श्रेणी में दर्ज किया गया है। इनमें झाड़माजरी स्थित उद्योग द्वारा निर्मित डाइक्लोफेनाक सोडियम इंजेक्शन भी शामिल है। जांच में इस इंजेक्शन में डाइक्लोफेनाक की पहचान और मात्रा दोनों फेल पाई गईं, जबकि सैंपल में बुप्रेनोर्फिन की पहचान पॉजिटिव बताई गई है। रिपोर्ट में इसे ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट की धारा 17-बी के तहत स्प्यूरियस माना गया है।

रिपोर्ट में बद्दी, नालागढ़, बरोटीवाला, झाड़माजरी, कालाअंब, परवाणू, ऊना और चंबाघाट की कई इकाइयों के उत्पाद शामिल हैं। अलर्ट में कालाअंब स्थित इकाई की एक दवा को मिसब्रांडेड भी बताया गया है। राज्य दवा नियंत्रक डा. मनीष कपूर ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा लागू किए गए रिवाइज्ड शेड्यूल के तहत अब दवा उत्पादन प्रक्रिया में कई बदलाव किए गए हैं। उत्पादन के दौरान सख्ती और गुणवत्ता मानकों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विभाग का प्रयास दवा सैंपल फेल होने के मामलों को पूरी तरह कम करना है। साथ ही लोगों से अपील की कि जो भी दवाएं फेल पाई जाती हैं, उनकी जानकारी सार्वजनिक प्लेटफार्म पर जारी की जाती है, ताकि लोग उनका उपयोग न करें।अप्रैल में देश में कुल 121 दवाइयों के सैंपल फेलअप्रैल महीने के ड्रग अलर्ट में देशभर के कुल 121 दवाओं और उत्पादों के सैंपल मानकों पर फेल पाए गए हैं। सबसे अधिक 31 सैंपल हिमाचल प्रदेश से फेल हुए हैं। इसके बाद उत्तराखंड के 24 और गुजरात के 20 सैंपल शामिल हैं। वहीं तेलंगाना के सात, सिक्किम के पांच तथा हरियाणा, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, राजस्थान और महाराष्ट्र से चार-चार दवाओं के सैंपल फेल हुए हैं। इसी तरह पंजाब, जम्मू-कश्मीर और तमिलनाडु में बनीं तीन-तीन दवाएं, जबकि पुड्डुचेरी और बिहार से दो-दो सैंपल फेल पाए गए हैं। पश्चिम बंगाल से एक सैंपल मानकों पर खरा नहीं उतर पाया।

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