वरिष्ठ पत्रकार: मीनाक्षी (ऊना) —
ऊना सदर और मैहतपुर क्षेत्र: ग्रामीण सरकार बनाने के लिए सियासी बिसात बिछी; कड़े मुकाबले के आसार
ऊना: जिला मुख्यालय से सटे ऊना सदर और मैहतपुर बेल्ट की ग्राम पंचायतों में चुनावी माहौल पूरी तरह गरमा चुका है। हाल ही में हुए शहरी निकाय चुनावों की हलचल के बाद अब ग्रामीण क्षेत्रों में प्रधान, उप-प्रधान और वार्ड सदस्यों की सीटों को लेकर जोड़-तोड़ का खेल शुरू हो गया है। तीनों चरणों के मतदान के लिए उम्मीदवारों ने दिन-रात एक कर दिया है। सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण इन पंचायतों में विकास कार्यों और स्थानीय रोजगार के मुद्दे सबसे आगे हैं। वोटर्स को अपने पक्ष में करने के लिए देर रात तक गुप्त रणनीतिक बैठकें और चौपालें आयोजित की जा रही हैं, क्योंकि इन क्षेत्रों के चुनावी नतीजे पूरे जिले की राजनीतिक हवा तय करते हैं।
## हरोली विधानसभा क्षेत्र: दिग्गजों के गढ़ में साख की लड़ाई; हर पंचायत में सीधी भिड़ंत
हरोली: ऊना जिले के सबसे हाई-प्रोफाइल माने जाने वाले हरोली क्षेत्र की ग्राम पंचायतों में चुनावी जंग इस बार मान-प्रतिष्ठा का सवाल बन चुकी है। हालांकि यह चुनाव आधिकारिक तौर पर पार्टी सिंबल पर नहीं हो रहे हैं, लेकिन अंदरूनी तौर पर बड़े राजनीतिक धड़ों का सीधा हस्तक्षेप साफ दिखाई दे रहा है। हरोली की कई संवेदनशील पंचायतों में पुराने और अनुभवी चेहरों को नए युवा उम्मीदवारों से कड़ी चुनौती मिल रही है। सोशल मीडिया से लेकर गांवों की गलियों तक पोस्टर वॉर शुरू हो चुका है और बड़े नेता पर्दे के पीछे से अपने-अपने समर्थित उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने के लिए पूरी फील्डिंग सजा रहे हैं।
## गगरेट और मुबारिकपुर बेल्ट: नुक्कड़ सभाओं में गूंज रहे स्थानीय मुद्दे; मतदाताओं की खामोशी से प्रत्याशी परेशान
गगरेट: गगरेट उपमंडल और उससे सटी ग्राम पंचायतों में चुनाव प्रचार अब अपने शबाब पर पहुंच चुका है। ग्रामीण क्षेत्रों की नुक्कड़ सभाओं में सड़कों की मरम्मत, पेयजल आपूर्ति और आवारा पशुओं की समस्या जैसे बुनियादी मुद्दों पर तीखी बहस छिड़ गई है। इस बार के चुनाव में उच्च शिक्षित युवाओं की भागीदारी ने पारंपरिक राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह हिला कर रख दिया है। प्रत्याशी घर-घर जाकर मतदाताओं को रिझाने के लिए बड़े-बड़े दावे तो कर रहे हैं, लेकिन समझदार और खामोश मतदाताओं ने इस बार अपने पत्ते नहीं खोले हैं, जिससे प्रत्याशियों की धड़कनें बढ़ी हुई हैं।
## अंब और चिंतपूर्णी क्षेत्र: धार्मिक और ग्रामीण बेल्ट में कड़ा मुकाबला; त्रिकोणीय संघर्ष की स्थिति
अंब/चिंतपूर्णी: अंब ब्लॉक और चिंतपूर्णी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्रामीण इलाकों में राजनीतिक सरगर्मी सातवें आसमान पर है। पंचायत चुनाव के आगामी चरणों को देखते हुए उम्मीदवारों ने अपना-अपना पारंपरिक वोट बैंक सुरक्षित करना शुरू कर दिया है। इस पहाड़ी और धार्मिक बेल्ट की कई पंचायतों में पुराने वफादारों के ही आमने-सामने डट जाने से मुकाबला त्रिकोणीय हो चुका है। स्थानीय प्रशासन ने भी सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर कमर कस ली है। संवेदनशील और अति-संवेदनशील मतदान केंद्रों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं ताकि चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराए जा सकें।
## बंगाणा और कुटलैहड़ क्षेत्र: दुर्गम इलाकों में प्रचार तेज; महिला उम्मीदवारों ने बिगाड़ा पुराने दिग्गजों का गणित
बंगाणा: कुटलैहड़ निर्वाचन क्षेत्र के तहत आने वाले बंगाणा ब्लॉक के ग्रामीण और दुर्गम इलाकों में चुनावी रणभेरी बजते ही हर गांव सियासी अखाड़े में तब्दील हो चुका है। पहले चरण के मतदान के लिए प्रत्याशियों ने मीलों पैदल चलकर मतदाताओं से संपर्क साधना शुरू कर दिया है। इस बार के चुनाव की सबसे बड़ी विशेषता महिला उम्मीदवारों की भारी तादाद और उनका आक्रामक प्रचार है, जिसने पुराने सियासी पंडितों के सारे गुणा-भाग बिगाड़ दिए हैं। अंदरूनी बैठकों में जातिगत और पारिवारिक समीकरणों को साधने की हरसंभव कोशिश जारी है, जिससे मुकाबला हर घंटे और रोचक होता जा रहा है।
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