शिमला, सुरेंद्र राणा: हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज चुनाव की सरगर्मियां अपने चरम पर है. ऐसे में भाजपा कांग्रेस भी आमने-सामने आ गए हैं. शुक्रवार को शिमला में मीडिया से बातचीत करते हुए भाजपा प्रदेश मीडिया संयोजक कर्ण नंदा ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए. कर्ण नंदा ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार पंचायती राज चुनाव को प्रभावित करने का काम कर रही है. कर्ण नंदा ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार अनुसूचित जाति वर्ग की महिलाओं को चुनाव प्रक्रिया से बाहर करने काम कर रही है. नंदा ने आरोप लगाया कि वर्तमान कांग्रेस सरकार छल, कपट और सत्ता के दुरुपयोग के माध्यम से चुनाव जीतने का प्रयास कर रही है और लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने में लगी हुई है.
कर्ण नंदा ने कहा कि पंचायतीराज चुनावों की घोषणा 29 अप्रैल 2026 को हो चुकी थी और उसी दिन से चुनाव प्रक्रिया प्रारंभ हो गई थी। नामांकन प्रक्रिया 7 मई से शुरू हुई, जबकि मतदान की तिथियां 26, 28 और 30 मई निर्धारित की गई हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद 8 मई 2026 को पंचायतीराज विभाग द्वारा एक विवादित नोटिफिकेशन जारी किया गया, जो पूरी तरह चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप और उसे प्रभावित करने का प्रयास है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार द्वारा जारी इस नोटिफिकेशन के माध्यम से अनुसूचित जाति वर्ग की उन महिलाओं को चुनाव लड़ने से रोका जा रहा है जिन्होंने हिमाचल प्रदेश के बाहर विवाह किया है, भले ही उनका विवाह अपनी ही अनुसूचित जाति श्रेणी में हुआ हो। उन्होंने कहा कि यह निर्णय पूरी तरह महिला विरोधी, दलित विरोधी और संविधान विरोधी है। कर्ण नंदा ने सिरमौर जिले के नाहन क्षेत्र की अनुसूचित जाति वर्ग से संबंध रखने वाली महिला अनुरानी का उदाहरण देते हुए कहा कि उनकी शादी वर्ष 2009-10 में हरियाणा के यमुनानगर से हिमाचल प्रदेश के काला अंब स्थित वाल्मीकि परिवार में हुई थी। उनके तीन बच्चे हैं और उनके पास हिमाचल प्रदेश का बोनाफाइड प्रमाण पत्र भी है। बावजूद इसके उनका नामांकन केवल इस नोटिफिकेशन के आधार पर रद्द कर दिया गया। कर्ण नंदा ने कहा कि भाजपा के तीन मुख्य सवाल हैं — पहला, चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद इस प्रकार की नोटिफिकेशन कैसे जारी की जा सकती है? दूसरा, मतदाता सूची में नाम और बोनाफाइड प्रमाण पत्र होने के बावजूद अनुसूचित जाति महिला को चुनाव लड़ने से कैसे रोका जा सकता है? और तीसरा, क्या यह संविधान और लोकतांत्रिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन नहीं है?
उन्होंने कहा कि यह केवल एक महिला का मामला नहीं है, बल्कि हिमाचल प्रदेश में ऐसे अनेक मामले सामने आए हैं जहां महिलाओं को चुनाव लड़ने से रोका गया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार अपने “मित्रों की फौज” को फायदा पहुंचाने और विपक्षी समर्थित उम्मीदवारों को रोकने के लिए प्रशासनिक मशीनरी का दुरुपयोग कर रही है।
भाजपा नेता ने कहा कि यह पूरा मामला कांग्रेस सरकार का असली चेहरा उजागर करता है। कांग्रेस केवल महिलाओं को ₹1500 देने के झूठे वादे करती है, लेकिन वास्तविकता में महिलाओं को उनके लोकतांत्रिक अधिकारों से वंचित कर रही है।
कर्ण नंदा ने कहा कि प्रदेश की जनता कांग्रेस सरकार की इस महिला विरोधी, अनुसूचित जाति विरोधी और लोकतंत्र विरोधी मानसिकता को समझ चुकी है और आने वाले पंचायतीराज चुनावों में कांग्रेस को करारा जवाब देगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार का “काउंटडाउन” शुरू हो चुका है और प्रदेश की जनता अब बदलाव का मन बना चुकी है।
