शिमला, सुरेंद्र राणा: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य में बन रही घटिया और असुरक्षित दवाओं के मामले में कड़ा संज्ञान लिया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और केंद्र के संबंधित विभागों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
अदालत ने चिंता व्यक्त की कि ये दवाएं सार्वजनिक स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती हैं। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (भारत सरकार) को इस मामले में प्रतिवादी के रूप में शामिल करने का आदेश दिया है।
वहीं, अदालत ने इस मामले को इसी तरह की एक अन्य लंबित जनहित याचिका के साथ सूचीबद्ध करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने यह कार्रवाई मुख्य न्यायाधीश को सचिवालय से प्राप्त एक पत्र और समाचार पत्रों में छपी रिपोर्टों के आधार पर की है। रिपोर्ट के अनुसार ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) ने राज्य दवा प्राधिकरण को बद्दी, सोलन, पांवटा साहिब और कांगड़ा में 19 दवा कंपनियों की ओर से निर्मित 26 दवाओं के निर्माण और वितरण को तुरंत रोकने का निर्देश दिया है।
