शिमला, सुरेंद्र राणा: हिमाचल प्रदेश में इस बार भी पंचायत प्रधान और पंचायत समिति (बीडीसी) सदस्यों के चुनाव में खर्च की कोई सीमा तय नहीं की गई है। स्टेट इलेक्शन कमीशन ने इन पदों के लिए चुनावी खर्च की सीमा निर्धारित करने का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा था, लेकिन सरकार ने इसे मंजूरी नहीं दी। ऐसे में प्रधान और बीडीसी का चुनाव लडऩे वाले उम्मीदवारों को अपने खर्च का कोई ब्यौरा देने की बाध्यता नहीं होगी। हालांकि जिला परिषद और नगर निकायों में पार्षद पद के उम्मीदवारों पर खर्च सीमा पहले से लागू है। इन उम्मीदवारों को चुनावी खर्च का पूरा रिकॉर्ड रखना होगा और निर्धारित नियमों का पालन करना अनिवार्य रहेगा। चुनाव समाप्त होने के एक महीने के भीतर उन्हें अपना खर्च विवरण इलेक्शन कमीशन को जमा करना होगा। पिछले चुनावों में यह देखा गया है कि पंचायत प्रधान पद के उम्मीदवार भी जीत के लिए भारी खर्च करते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए कमीशन ने सरकार को खर्च सीमा तय करने का सुझाव दिया था, लेकिन इस बार भी इसे लागू नहीं किया गया।
प्रदेश में इन चुनावों में 65 हजार से अधिक उम्मीदवार मैदान में उतरते हैं। इनमें जिला परिषद और पार्षद पद के उम्मीदवारों को अपने खर्च का पूरा लेखा-जोखा रखना जरूरी होगा। चुनाव के दौरान खर्च पर नजर रखने के लिए जिला निर्वाचन अधिकारियों द्वारा फ्लाइंग स्क्वॉड और निगरानी टीमें गठित की जाएंगी। ये टीमें उम्मीदवारों के बैंक खाते, रसीदों और प्रचार से जुड़े खर्च की जांच करेंगी। उम्मीदवारों को प्रचार सामग्री, जनसंपर्क, समर्थकों के खान-पान और वाहनों पर होने वाले खर्च का पूरा रिकॉर्ड रजिस्टर में दर्ज करना होगा और मांगने पर एक-एक रुपए का हिसाब देना होगा। गौरतलब है कि राज्य की 3757 पंचायतों और 73 नगर निकायों में चुनाव प्रस्तावित हैं। चुनाव तारीखों का ऐलान 20 अप्रैल के बाद कभी भी हो सकता है, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने 31 मई से पहले चुनाव कराने के निर्देश दिए हैं।
