सिरमौर: मीनाक्षी: भाजपा विधायक एवं प्रदेश कार्यसमिति सदस्य रीना कश्यप ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ऐतिहासिक और युगांतरकारी निर्णय बताते हुए कहा कि इस कानून के माध्यम से देश की महिलाओं को राजनीति में सशक्त भागीदारी और नेतृत्व का अवसर मिलेगा।उन्होंने कहा कि सितंबर 2023 में पारित यह संवैधानिक संशोधन लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और दिल्ली विधानसभा में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण सुनिश्चित करता है, जो भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।रीना कश्यप ने कहा कि यह केवल आरक्षण का विषय नहीं, बल्कि देश के भविष्य और समावेशी विकास से जुड़ा हुआ निर्णय है।“जब महिलाएं नेतृत्व में आती हैं, तो शासन अधिक संवेदनशील, जवाबदेह और जन-केंद्रित बनता है—यह अनुभव पंचायत स्तर पर पहले ही साबित हो चुका है,” उन्होंने कहा।उन्होंने कहा कि देश में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है—लगभग 47 करोड़ महिला मतदाता,कई चुनावों में पुरुषों से अधिक मतदान,पंचायतों में लगभग 46% महिला प्रतिनिधित्व,लेकिन इसके बावजूद संसद और विधानसभाओं में उनका प्रतिनिधित्व अभी भी सीमित है।“इसी अंतर को खत्म करने के लिए नारी शक्ति वंदन अधिनियम आवश्यक है,” उन्होंने कहा।रीना कश्यप ने केंद्र सरकार की योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले दशक में महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए अनेक ऐतिहासिक कदम उठाए गए हैं—10 करोड़ उज्ज्वला कनेक्शन,14.45 करोड़ घरों में जल जीवन मिशन के तहत पानी,मुद्रा योजना के 60% से अधिक लाभार्थी महिलाएं,32 करोड़ से अधिक महिलाओं के जनधन खाते,जिनसे महिलाओं का सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण हुआ है।उन्होंने कहा कि अब अगला कदम महिलाओं को नीति निर्माण में बराबरी का अधिकार देना है।“महिलाएं अब केवल योजनाओं की लाभार्थी नहीं, बल्कि नीति निर्माण की भागीदार बनेंगी—यही इस अधिनियम की सबसे बड़ी ताकत है,” उन्होंने कहा।रीना कश्यप ने प्रदेश सरकार से मांग की कि इस अधिनियम को जल्द लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं।“यह कानून केवल कागजों में नहीं रहना चाहिए—इसका शीघ्र और प्रभावी क्रियान्वयन ही सच्चे अर्थों में महिला सशक्तिकरण को सुनिश्चित करेगा,” उन्होंने कहा।अंत में उन्होंने कहा कि“नारी शक्ति वंदन अधिनियम भारत को अधिक समावेशी, सशक्त और विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में निर्णायक कदम है।”
